अनुप्रिया वर्मा, मुंबई. एक दौर में चार्मिंग हीरो के रूप में जाने जाने वाले, हिंदी सिनेमा में 60-70 के दशक में हमेशा पांच शीर्ष नायकों की फेहरिस्त में शामिल बिस्वजीत चटर्जी उर्फ़ विश्वजीत 14 दिसंबर को अपना 82 वां जन्मदिन मना रहे हैं. इसी दौरान जागरण डॉट कॉम से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि वह अगले वर्ष 2019 में अपनी आत्मकथा अपने जन्मदिन के अवसर पर ही लॉन्च करेंगे. इस ऑटो बायोग्राफी में उन्होंने अपने जीवन की सारी महत्वपूर्ण घटनाओं का जीवंत चित्रण किया है. ऐसे में इस पुस्तक में शामिल होने वाले कुछ हिस्सों के बारे में उन्होंने जागरण डॉट कॉम से साझा की है.

विश्वजीत खुद को इस बात के लिए खुशनसीब मानते हैं कि वह अपना जन्मदिन राजकपूर के साथ शेयर करते हैं. विश्वजीत ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 10 साल के उम्र से की थी. फिल्मों में आने से पहले विश्वजीत कहते हैं कि वह एक कार्टूनिस्ट और पेंटर थे. विश्वजीत के पिता आर्मी में डॉक्टर थे. वह कहते हैं, यही वजह थी कि मेरा बचपन लाहौर, लखनऊ, मेरठ और कराची में बीता. यही वजह है कि मेरी हिंदी भाषा पर पकड़ बनी. मेरी मां को अभिनय में बेहद दिलचस्पी थी. जब मैं 13 साल का था, तब मां को खो दिया था, वह मेरे लिए कठिन समय था. वह बताते हैं कि मेरे मामा ड्रामा के संस्थापक थे. ऋषिकेश बनर्जी. उनके साथ कई प्रोफेशनल एक्टर भी काम करते थे.

फिल्मों में आने की नहीं थी अनुमति, बंगाल के केस्टो कहलाये

विश्वजीत कहते हैं कि मैंने खूब अच्छे से डायलॉग बोला था. मुझे 30 रुपये मिलते थे. विश्वजीत कहते हैं कि घर में थियेटर करने की अनुमति थी, लेकिन फिल्मों में जाने की नहीं. उस दौर में मेरे जो पुरुष दोस्त थे, वह महिलाओं का किरदार करते थे. चूंकि महिलाओं को तो फिल्मों में आने की इजाजत नहीं मिलती थी. इसलिए विश्वजीत ने छुप कर फिल्मों में काम शुरू किया. लेकिन घर में फिल्म की रिलीज़ होने से पहले ही घर में सबको जानकारी हो गई. सब नाराज हो गए. विश्वजीत को घर छोड़ कर जाना पड़ा. उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में कृष्ण का किरदार निभाया. बंगाली फिल्म में . ऐसे में उनके पास फिर लगातार कृष्ण वाला ही किरदार आने ऑफ़र हो गये. तो विश्वजीत को सब कहने लगे कि ये कृष्ण बन कर ही रहेगा. इससे अधिक कुछ नहीं कर पायेगा. रास्ते में भी सब मुझे केस्टो कह कर बुलाने लगते थे. लेकिन उन्हें अभिनेता विकास ने समझाया कि उन्हें संभल के अब काम करना चाहिए, वरना सब तुमको गिरा देंगे. तो फिर धीरे-धीरे अच्छी फिल्मों का साथ मिला.

जब गुरुदत्त ने कहा तुम मेरे भूतनाथ हो

विश्वजीत कहते हैं कि उत्तम कुमार भी मुझे बेहद पसंद करते थे. उन्होंने कई फिल्मों में मुझे मौके दिए. वह बताते हैं कि गुरुदत्त ने मेरा काम बांग्ला फिल्म साहेब बीवी गुलाम में देखा था और उन्होंने कहा कि तुम मेरे भूतनाथ हो, तुमको मुंबई आना होगा. विश्वजीत मुंबई आये. वह आगे कहते हैं कि गुरुदत्त ने मीना कुमारी, वहीदा से मुलाक़ात करवाई. लेकिन मैं वह फिल्म में काम नहीं कर पाया. चूंकि मैं एक करार में बंधा हुआ था. बाद में मैं फिर बंगाल वापस चला गया. लेकिन उस दौरान मुझे हेमंत कुमार मिले और उन्होंने कहा कि तुम मुंबई जाओ. मैं 1962 में मुंबई आ गया. यहां आने के बाद मेरी फिल्म संस्पेंस थ्रिलर के रूप में फिल्म 20 साल बाद सुपर डुपर हिट हुई और मुझे तमगा मिला सस्पेंस हीरो फ्रॉम बंगाल. मुझे लगातार थ्रिलर फिल्में मिलने लगी और हिंदी फिल्मों में भी धराधर थ्रिलर बनने लगीं. मुझे लगातार फिर सस्पेंस फिल्में ही ऑफ़र होने लगी. लेकिन मैंने अपना ट्रेंड बदला. चूंकि मुझे डर था कि फिर से मुझे सिर्फ सस्पेंस फिल्मों तक ही सीमित न कर दिया जाये तो मैंने म्यूजिकल और रोमांटिक फिल्में करनी शुरू की. तो मेरा नाम म्यूजिकल रोमांटिक हीरो बना.

जब धर्मेंद्र तीन दिनों तक मेरे बेडरूम में पड़े रहे थे

विश्वजीत धर्मेंद्र के बेहद करीब हैं. दोनों आज भी एक दूसरे से मिलते रहते हैं. विश्वजीत कहते हैं कि धर्मेंद्र पहले इतनी शायरी नहीं करते थे लेकिन पार्टी खूब करते थे. अभी हाल में मैं जब उनके घर गया तो उन्होंने मुझे बोला कि अब तो शराब पीनी छोड़ दी है, तो मेरा बार म्यूजियम बन गया है. मुझे याद है कि हमलोग एक पार्टी में गए थे. और हमने इतनी दारू पी ली थी, कि तीन दिनों तक धर्मेंद्र उठ ही नहीं पाए थे और तीन दिनों तक वह मेरे ही घर में पड़े रहे थे. उस वक्त सनी छोटा था, वह जमुनाबाई में पढ़ता था. वह हर दिन आता था देखने कि धर्मेंद्र नींद से जागे क्या. मजेदार बात थी कि उस वक़्त धर्मेंद्र जीवन मृत्यु फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, प्रोडक्शन के लोग उनको उठाने आ रहे थे. लेकिन वह उठे नहीं थे. बाद में जब वह उठे तो मुझे बोलते हैं कि तू बंगाली है. मैं जाट हूं.

आशा पारेख टॉम बॉय थीं

आशा पारेख के साथ कई फिल्मों में अभिनय कर चुके विश्वजीत बताते हैं कि वह आशा से काफी करीब रहे हैं. वह सेट पर सबसे अधिक मस्ती करती थी. एक बार उसको दूसरे दिन शूटिंग करने का मन नहीं था, तो उसने सारे क्रू मेम्बर को जमाल गोटा पिला दिया था. आशा ने लेकिन मुझे बता दिया था. तो मैंने नहीं खाया था. आशा ने कहा कि कल शूटिंग नहीं हो पायेगी. राखी के बारे में कहते हैं कि बांग्ला भोजन बना कर सेट पर लाती थीं. विश्वजीत कहते हैं कि मुझे सारी अभिनेत्रियाँ काफी पसंद करती थीं. वह मेरे साथ सहज थीं, तो उनके साथ अच्छी बांडिंग हो जाती थी. रोमांटिक सीन में मैं बनावटी नहीं हो सकता था.

रेखा किसिंग सीन को लेकर विवाद

कुछ दिनों पहले ही यह खबर खूब वायरल हुई थी कि रेखा को फिल्म अंजाना सफर में विश्वजीत ने एक दृश्य में उनकी बिना जानकारी के सीन के दौरान किस किया था.फिल्म की शूटिंग मेहबूब स्टूडियो में हुई थी. विश्वजीत कहते हैं कि हां, यह सच है कि रेखा को इस बात की जानकारी नहीं थी. उन्होंने निर्देशक के कहने पर ऐसा किया था. बाद में यह खबर उस दौर की हेडलाइन बनी थी. लेकिन विश्वजीत कहते हैं कि मीडिया में यह जो बात लिखी गयी है कि इसके बाद रेखा खूब रोने लगी थीं और उन्होंने विश्वजीत के साथ फिर काम करने से इनकार कर दिया था. इसमें कोई भी सच्चाई नहीं है.

चूंकि सच यह है कि हम दोनों जानते थे कि वह सिर्फ फिल्म के लिए था. हकीकत में मैं कैसा आदमी हूं उन्हें पता है और इसके बाद भी हमने लगातार कई फिल्मों में काम किया. यही नहीं उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने अपनी एक फिल्म प्रोडयूसर के रूप में बनाई तब भी रेखा ने फिल्म में काम किया था. आज भी रेखा से उनके रिश्ते खास रहे हैं. साथ ही वह यह भी कहते हैं कि रेखा उन्हें प्यार से बिशु बाबा ही कह कर बुलाती थीं और उनकी ड्रेसिंग सेन्स को लेकर वह बहुत प्रभावित रहती थीं. विश्वजीत कहते हैं कि रेखा खुद बेहतरीन अभिनेत्री हैं और दिल की बहुत ही अच्छी छवि की हैं. इसलिए आज भी उनका उनकी अभिनेत्रियों से रिश्ता कायम है. फिलवक्त , विश्वजीत अपनी सिंगिंग टैलेंट के साथ विदेशों में कई टूर करते रहते हैं.

जब किशोर दा के लिए स्टेडियम में पियानो भेजना पड़ा

विश्वजीत कहते हैं कि उनकी सिंगिंग की लोग तारीफ़ करते थे. लेकिन विश्वजीत ने हिंदी फिल्मों के बारे में सोच लिया था कि वह अपने गानों को आवाज नहीं देंगे. चूंकि उन्हें लगता था कि उनके गानों को अगर किशोर दा, मोहम्मद रफी आवाज देंगे तो अलग बात होगी. और ऐसे भी मैं हीरो बनने आया था. लेकिन फिर भी दो शिकारी का टाइटल सांग मुझे गाना पड़ा था.

किशोर कुमार के बारे में अपनी बांडिंग के बारे में विश्वजीत कहते हैं कि हमलोग काफी क्लोज थे. वह कहते हैं कि मैंने बंगाल में बाढ़ प्रभावितों के लिए एक शो किया था. तो लोग कहते थे कि किशोर इसमें नहीं आयेंगे. क्योंकि वह पैसे के बगैर कुछ नहीं करते. लेकिन मैं गया उनके घर. ,मैंने कहा कि सब आ रहे हैं. रणजी स्टेडियम में होना था. धर्मेंद्र, वहीदा, नर्गिस सब आयेंगे. सारे सिंगर्स को लेकर गया था. तो मुझसे किशोर ने पूछा कि कितना पैसा दोगे. मैंने कहा कोई पैसे नहीं मिलेंगे, आपके जाने से लोगों को फायदा होगा. उन्हें रिलीफ मिलेगी. फंड से. फिर किशोर ने कहा कि ठीक है, मैं आऊंगा, लेकिन मेरे स्टेज के ऊपर पियानो लाना होगा, तो मैं आऊंगा. फिर मैंने पार्क होटल वाले से पियानो को रणजी स्टेडियम में पहुँचाने को कहा, क्योंकि किशोर ने कह दिया था. पियानों ने नहीं होगा तो वहीं से भाग जाऊँगा. फिर वह आये और गाना गाया. शो हिट रहा. मेरी ही एक फिल्म का एक गाना था पंचम का म्यूजिक था. छोटे नवाब के लिए. महमूद मैं और पंचम खास दोस्त थे.

महमूद को म्यूजिक सेन्स था. तो उसमें एक गाना था बम चिक चिक.. किशोर ने गाना गाया. लेकिन उन्होंने कहा कि ये गाना तो गा लिया मैंने. लेकिन तुम लिप सिंक नहीं कर पाओगे. मैं उनको पगला बाबू बोलता था. वो मुझे विशू बाबू बोलते थे. मैंने 9 दिनों में लिप सिंक किया. फिर किशोर को बुलाया और उन्होंने सुना तो वाह क्या बात है तुमने मिला लिया.

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Edited By: Manoj Khadilkar