लखनऊ (जेएनएन)। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे से भाजपा में असंतोष है। कुछनेता अपनी नाराजगी दिखा रहे हैं लेकिन ज्यादातर चुप्पी साधे हैं। ऊपर से शांत दिखने वाले भाजपा नेताओं से भितरघात का खतरा देख पार्टी ने ऐसे नेताओं के महत्व बढ़ाओ रणनीति पर अमल शुरू कर दिया है। हाईकमान ऐसे लोगों पर नजर रखे है। भाजपा प्रदेश प्रभारी ओमप्रकाश माथुर ने यूपी में रहकर हालात की समीक्षा की। इसके बाद असंतुष्टों का महत्व बढ़ाने की रणनीति पर काम शुरू है। उनको मनाने के प्रयास भी किए जाएंगे।

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टिकट कटने पर उठी टीस सुनी समझी

कल भाजपा मुख्यालय में ओम माथुर कार्यकर्ताओं से मिले। इस दौरान टिकट हासिल करने में चूके हमीरपुर जिले के एक दावेदार ने उनसे मिलकर अपनी टीस जाहिर की। बोले कि आपने तैयारी के लिए कहा था लेकिन टिकट नहीं मिला। माथुर बोले कि एक सीट पर आखिर एक ही टिकट दे सकते थे। बहरहाल, उन्हें सांत्वना दी और भविष्य के अवसर दिखाए साथ ही जिले के बाकी नेताओं की आंतरिक रिपोर्ट लेना नहीं भूले। यह तो सिर्फ बानगी है। ऐसे ही पूरे दिन वह प्रदेश भर का जायजा ले रहे हैं।

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बूथ स्तर से लेकर प्रदेश मुख्यालय तक बनाई गयी टीम ग्राउंड रिपोर्ट भेज रही हैं। माथुर समेत भाजपा के रणनीतिकार स्थिति के अवलोकन के साथ ही समन्वय पर भी जोर दे रहे हैं। असंतुष्टों को मनाने के साथ ही उन्हें आगे कर महत्व देने की रणनीति बनी है। यह मानना है कि टिकट न मिल पाने से आक्रोश उठना स्वाभाविक है लेकिन, पर्याप्त महत्व और जिम्मेदारी दिए जाने से उनकी सक्रियता भी बढ़ेगी। पर यह भी तय हो चुका है कि लाख मनाने के बावजूद अगर किसी की जिद नहीं टूटी तो कार्रवाई भी होगी। ऐसे लोगों की भी सूची तैयार हो रही है। माथुर का कहना है कि पूरे प्रदेश में अधिकतम 15 से 20 विधानसभा क्षेत्र ही ऐसे होंगे जहां चुनौती है।

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कैराना पर कोर्ट के फैसले का स्वागत

भाजपा ने कैराना में पलायन के मुद्दे पर हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय को लागू करने में तब तक कठिनाई रहेगी जब तक अखिलेश सरकार के निर्देशों पर काम करने वाले उनके चहेते अफसरों को हटाने का काम नहीं होगा। पाठक ने मांग की कि सैफई परिवार के चहेते अफसरों को हटाया जाए। पाठक ने कहा कि कैराना में हुए पलायन समेत पश्चिमी उप्र के कई जिलों में दंगों के दौरान पुलिस के जिम्मेदार अफसरों की भूमिका पर शुरू से ही सवाल खड़े होते रहे हैं।

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