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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 09, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Rajasthan Election 2023: हाई कोर्ट ने सरकारी डॉक्टर को दी चुनाव लड़ने की परमिशन, हारने के बाद भी कर सकेंगे डॉक्टरी

By Abhinav AtreyEdited By: Abhinav Atrey
Published: Thu, 09 Nov 2023 11:33 PM (IST)

राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने एक सरकारी डॉक्टर को विधानसभा चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी है। इसके ...और पढ़ें

राजस्थान हाई कोर्ट ने दिया आदेश, दीपक बीटीपी के टिकट पर उतरे मैदान में (फाइल फोटो)
राजस्थान हाई कोर्ट ने दिया आदेश, दीपक बीटीपी के टिकट पर उतरे मैदान में (फाइल फोटो)

HighLights

  1. राजस्थान हाई कोर्ट ने दिया आदेश, दीपक बीटीपी के टिकट पर उतरे मैदान में
  2. पढ़े-लिखे लोगों का राजनीति में आना बहुत जरूरी- घोघरा
  3. राजस्थान में 25 नवंबर को मतदान होगा

जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने एक सरकारी डॉक्टर को विधानसभा चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी है। इसके बाद डूंगरपुर के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर दीपक घोघरा भारतीय ट्राईबल पार्टी (बीटीपी) के टिकट पर डूंगरपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतर गए हैं। वह बीटीपी के प्रदेशाध्यक्ष वेलाराम घोघरा के बेटे हैं।

घोघरा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए। इस पर जस्टिस पुष्पेन्द्र सिंह भाटी ने आदेश दिया कि घोघरा को विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए चिकित्सा अधिकारी पद से रिलीव किया जाए। यह भी ध्यान रखा जाए कि यदि वह चुनाव हार जाते हैं तो उन्हें फिर चिकित्सा अधिकारी पद पर कार्य करने की अनुमति दी जाए।

पढ़े-लिखे लोगों का राजनीति में आना बहुत जरूरी- घोघरा

घोघरा ने बताया कि मैं पिछले 10 साल से डूंगरपुर में कार्यरत हूं। स्थानीय लोग मुझे अच्छी तरह पहचानते हैं। पढ़े-लिखे लोगों का राजनीति में आना बहुत जरूरी है। जब मैंने राजनीति में आने का फैसला किया तो लोगों ने इसका स्वागत किया। यहां लोगों से मेरा व्यक्तिगत लगाव है। इसलिए मुझे पूरा विश्वास है कि मैं इस सीट पर जीत दर्ज करूंगा।

प्रदेश में 25 नवंबर को मतदान

डूंगरपुर सीट पर घोघरा के अलावा कांग्रेस से गणेश घोघरा और भाजपा के टिकट पर बंशीलाल कटारा चुनाव लड़ रहे हैं। प्रदेश में 25 नवंबर को मतदान होगा और तीन दिसंबर को चुनाव परिणाम आएंगे। बता दें कि मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी निशा बांगरे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहती थीं। वह छतरपुर जिले में उप कलक्टर पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने नौकरी से त्याग-पत्र दे दिया था।

हालांकि, मध्य प्रदेश सरकार ने जब उनका त्याग-पत्र स्वीकार नहीं किया तो वह कोर्ट में गईं थीं। कोर्ट के आदेश के बाद सरकार को उनका त्याग-पत्र स्वीकार करना पड़ा।कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया।

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