नई दिल्ली, प्रेट्र। देश में आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मैसेजिंग एप वाट्सएप ने नई पहल की है। वाट्सएप ने मंगलवार को 'चेकपॉइंट टिपलाइन' का अनावरण किया, जिसकी मदद से यूजर फर्जी खबरों की पड़ताल कर सकेंगे। फर्जी और गुमराह करने वाली खबरों पर नकेल की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।

वाट्सएप ने बताया, 'भारतीय स्टार्टअप फर्म प्रोटो ने इस टिपलाइन को विकसित किया है। इसकी मदद से चुनाव के दौरान अफवाहों और फर्जी खबरों को लेकर डाटाबेस तैयार किया जाएगा। यह डाटाबेस चेकपॉइंट की तरह काम करेगा। इस प्रोजेक्ट को तकनीकी मदद वाट्सएप की तरफ से मिलेगी।'

कंपनी ने बताया कि भारतीय यूजर अब वाट्सएप नंबर +91-9643000888 पर चेकपॉइंट टिपलाइन को भ्रामक पोस्ट या खबर के बारे में मैसेज कर सकेंगे। वाट्सएप यूजर की ओर से संदिग्ध मैसेज की जानकारी मिलते ही प्रोटो की टीम उस मैसेज के बारे में पड़ताल करेगी। इसके बाद यूजर को बताया जाएगा कि मैसेज में दी गई जानकारी सही है, गलत है, गुमराह करने वाली है, विवादित है या विषय से बाहर की है। साथ ही उसके बारे में उपलब्ध अन्य जानकारियों से भी यूजर को अवगत कराया जाएगा।

हर तरह के कंटेंट पर रहेगी नजर
यह सेंटर तस्वीर, वीडियो लिंक या टेक्स्ट के रूप में आने वाली सभी पोस्ट की समीक्षा करने में सक्षम है। इसमें अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी, तेलुगु, बंगाली और मलयालम भाषा में आने वाले पोस्ट को भी जांचा जा सकेगा। प्रोटो इस दिशा में देशभर में जमीनी स्तर पर काम रहे संगठनों के साथ मिलकर काम करने की दिशा में भी प्रयासरत है।

उठाए हैं और भी कदम
पिछले साल वाट्सएप पर फैली अफवाहों के कारण हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं के बाद भारत सरकार ने वाट्सएप की मूल कंपनी फेसबुक के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी। अफवाहों और फर्जी खबरों पर लगाम कसने के बढ़ते दबाव के बीच वाट्सएप ने पिछले साल मैसेज फॉरवर्ड करने की सीमा घटा दी थी। अब एक बार में एक साथ अधिकतम पांच लोगों को ही मैसेज भेजा जा सकता है। वाट्सएप ने लोगों को जागरूक करने के लिए टीवी, अखबार और रेडियो पर विज्ञापन भी दिया है।

सरकार भी दिखा रही है सख्ती
सोशल मीडिया के जरिये बढ़ती अफवाहों पर नकेल के लिए सरकार भी सख्ती बरत रही है। सरकार ने गलत तरीके से चुनाव को प्रभावित करने के मामले सामने आने पर सोशल मीडिया कंपनियों को कड़ी कार्रवाई का सामना करने को कहा है। सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) को लेकर सरकार के प्रस्तावित नियमों में भी सोशल मीडिया को ज्यादा जवाबदेह बनाने की बात है। इसमें यह प्रावधान भी है कि जांच के समय सरकारी एजेंसियों की मांग पर सोशल मीडिया कंपनियां फर्जी मैसेज भेजने वालों की पहचान साझा करें। हालांकि वाट्सएप ने इस प्रावधान का यह कहते हुए विरोध किया है कि इससे एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन कमजोर होगा।

Edited By: Sanjeev Tiwari