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    Lok Sabha Election 2019 : ...रजवाड़ों के गढ़ में जीती बाजी हार गए थे उदयराज

    By Brijesh SrivastavaEdited By:
    Updated: Sun, 31 Mar 2019 11:59 AM (IST)

    1991 के चुनाव में अंतिम राउंड में भाजपा प्रत्‍याशी उदयराज मिश्र को शिकस्त मिली थी। भाजपा ने इसे साजिश करार दिया था। जीतने वाले राजा अभय प्रताप के खिलाफ कोर्ट में तक मामला गया था।

    Lok Sabha Election 2019 : ...रजवाड़ों के गढ़ में जीती बाजी हार गए थे उदयराज

    आशुतोष तिवारी, प्रतापगढ़/प्रयागराज : राजा-रजवाड़ों के गढ़ में जो न हो जाए कम है। कुछ ऐसा ही वर्ष 1991 के लोकसभा चुनाव में हुआ था। मतगणना के सभी राउंड में आगे चल रहे भाजपा प्रत्याशी उदयराज मिश्र आखिरी राउंड में काउंटिंग स्थल से थोड़ी देर के लिए बाहर गए और बाजी पलट गई। महज साढ़े तीन हजार मतों के अंतर से वह दूसरे स्थान पर रह गए। उन्हें अपनी अप्रत्याशित हार का बड़ा सदमा पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी लेकिन जो होना था हो गया था। हर संसदीय चुनाव के मौके पर इस प्रसंग का जिक्र आ ही जाता है।

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    1991 कई का राजनीतिक सफर नए मुकाम पर पहुंचा

    वर्ष 1991 का लोकसभा चुनाव अयोध्या विवाद से उपजी राम लहर के बीच हो रहा था। इसमें ना जाने कितनों का राजनीतिक सफर नए मुकाम पर पहुंचा। भाजपा ने शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी उदयराज मिश्र पर भरोसा जताते उन्हें मैदान में उतारा था। प्रतापगढ़ से लेकर मुंबई तक कारोबार जगत में मशहूर उदयराज सरल स्वभाव की वजह से लोकप्रिय भी थे। उनके सामने जनता दल से राजा अभय प्रताप सिंह और कांग्रेस से राजा दिनेश सिंह चुनाव लड़ रहे थे। जनता पार्टी से मंशा अहमद और बसपा से हरीनाथ यादव मैदान में थे।  

    और उदयराज का पड़ला भारी होने लगा

    एमडीपीजी काॅलेज में हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डाॅ. हंसराज त्रिपाठी स्मरण शक्ति पर जोर डालते हुए बताते हैं कि कांग्रेस का पलड़ा पहले भारी लगा, मगर बाद में राजा अभय प्रताप का चुनाव चढऩा शुरू हुआ। भाजपा उम्मीदवार उदयराज के पक्ष में भी माहौल था। काउंटिंग शुरू हुई तो उदयराज पहले ही राउंड से आगे चलने लगे। अंतिम राउंड  आते-आते वह काफी मतों से आगे जा चुके थे। भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई थी, वह स्वागत की तैयारी में लग गए। पार्टी के ही कुछ नेताओं ने उदयराज मिश्र को सलाह दी कि स्वागत सत्कार की तैयारी देखें, यहां काउंटिंग करा ली जाएगी। इस पर वह घर चले गए।

    अंतिम राउंड ने पलट दी थी जीत

    उधर, अंतिम राउंड की काउंटिंग में जनता दल प्रत्याशी राजा अभय प्रताप अचानक आगे निकल गए। उनके पक्ष में एक लाख 10 हजार 858 मत थे, जबकि भाजपा के उदयराज मिश्र के पक्ष में कुल एक लाख सात हजार 142 मत। इस तरह तीन हजार 696 वोट से हार गए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने काउंटिंग में गड़बड़ी करने का आरोप लगा जमकर हंगामा किया था। अपनी पराजय को साजिश बताते हुए भाजपा उम्मीदवार उदय राज मिश्र कोर्ट की शरण में चले गए, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। उनके बेटे रामकृष्ण मिश्र गुड्डू कहते हैं, यह पुराने घाव को कुरेदने जैसा है। उनके पिता उदयराज ने अपनी इस हार पर कहा था कि राजनीति सज्जन और सरल लोगों के लिए नहीं है।

    1991 का चुनाव परिणाम, एक नजर में

        प्रत्याशी                        पार्टी                  मिले मत

    1. अभय प्रताप सिंह            जनता दल           1, 10, 838

    2. उदय राज मिश्र               भाजपा                1. 07, 142

    3. दिनेश सिंह                    कांग्रेस                70, 648

    4., मंशा अहमद                 जनता पार्टी          22, 296

    5,. हरीनाथ यादव               बसपा                 18, 132