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अतीत के आईने: दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी, जनसंघ से भाजपा तक की पूरी कहानी

जनसंघ की स्थापना श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा 21 अक्टूबर 1951को दिल्ली में की गई थी। 1952 के संसदीय चुनाव में जनसंघ ने दो सीटें जीती थी। तो वहीं आज भाजपा के पास 282 सीटें जीती थी।

By Dhyanendra SinghEdited By: Published: Sun, 31 Mar 2019 09:06 AM (IST)Updated: Sun, 31 Mar 2019 09:07 AM (IST)
अतीत के आईने: दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी, जनसंघ से भाजपा तक की पूरी कहानी

नई दिल्ली, अंकुर अग्निहोत्री। 1951 में गठित जनसंघ से अलग होकर 6 अप्रैल, 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई। भाजपा कांग्रेस के बाद भारत की दूसरी प्रमुख राजनीतिक पार्टी है। यह संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के मामले और प्राथमिक सदस्यता के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। भाजपा एक दक्षिणपंथी पार्टी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ इसके वैचारिक और संगठनात्मक संबंध हैं। 

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जनसंघ:

भारतीय जनसंघ की स्थापना अक्टूबर 1951 में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की। 1952 में पहले आम चुनाव हुए। इस चुनाव में जनसंघ ने हिस्सा लिया और तीन सीटें जीतीं। जनसंघ का राष्ट्रीय पार्टी के रूप में उदय हुआ।

अटल बने सांसद :

1957 के दूसरे लोकसभा चुनाव में जनसंघ को 4 सीटें मिलीं। अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार सांसद बने। 1962 में तीसरे लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में जनसंघ को बड़ी बढ़त मिली और पार्टी ने 14 सीटों पर जीत दर्ज की। 1967 के लोकसभा चुनाव में जनसंघ ने एक बार फिर बड़ी छलांग लगाई। इस बार पार्टी के 35 सांसद जीतकर आए।

मुखर्जी का देहांत:

चुनाव के एक साल बाद 1968 में जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का निधन हो गया। इसके बाद 1969 में अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष चुने गए। 1971 में पांचवीं लोकसभा के चुनाव हुए और भारतीय जनसंघ के 22 सांसद जीतकर आए।

आपातकाल का दौर:

1975 में इंदिरा गांधी के आपातकाल के फैसले के खिलाफ कई लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी राजनीतिक दल एक साथ आ गए। भारतीय जनसंघ और दूसरे कई दलों के इस महागठबंधन को जनता पार्टी का नाम दिया गया।

पहली बार आए सत्ता में :

1977 में छठी लोकसभा के लिए चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली। जनता पार्टी को 295 सीटें मिलीं। मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। जबकि अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बने और आडवाणी को सूचना एवं प्रसारण मंत्री की जिम्मेदारी मिली। आंतरिक कलह के चलते 30 महीनों के भीतर ही जनता पार्टी का विघटन हो गया। कई पार्टियों ने समर्थन वापस ले लिया। मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। जून, 1979 में चौधरी चरण सिंह ने पीएम पद की शपथ ली। कांग्रेस ने चरण सिंह को समर्थन का वादा किया लेकिन सदन में बहुमत साबित करने से पहले ही कांग्रेस मुकर गई। नतीजा ये हुआ कि जनवरी, 1980 में फिर से चुनाव कराए गए।

जनता पार्टी के नाम पर लड़ा चुनाव:

1980 का आम चुनाव भारतीय जनसंघ ने जनता पार्टी के नाम पर ही लड़ा। जनसंघ के साथ जनता पार्टी को महज 31 सीटों पर जीत मिली। कांग्रेस ने 353 सीटों के साथ सरकार बनाई।

भाजपा का उदय :

सातवीं लोकसभा की करारी हार ने भाजपा को जन्म दिया। 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया। 1984 के अपने पहले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को महज 2 सीटें मिलीं। 1989 में नौवीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा ने अप्रत्याशित बढ़त दर्ज की और 85 सीटें जीतीं। भाजपा ने जनता दल को समर्थन देकर वीपी सिंह की सरकार बनवाई।

राम मंदिर आंदोलन:

1989 में ही भाजपा ने राम मंदिर आंदोलन का समर्थन किया। 1990 में लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा निकाली। 1991 में मुरली मनोहर जोशी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। आडवाणी की रथयात्रा से देशभर में भाजपा को समर्थन मिला। नतीजा ये हुआ कि 1991 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 120 सीटें जीतीं।

सबसे बड़ी पार्टी बनी भाजपा:

1996 के लोकसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 161 सीटों पर जीत दर्ज की। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा की केंद्र में सरकार बनी। लेकिन बहुमत न होने के कारण 13 दिनों में ही सरकार गिर गई।

अटल फिर बने प्रधानमंत्री:

1998 में 181 सांसद जीतकर आए। अटल फिर प्रधानमंत्री बने। 13 महीने के अंदर ही यह सरकार भी एक वोट से गिर गई और 1999 में फिर से चुनाव हुए। एक बार फिर अटल बिहारी वाजपेयी देश के पीएम बने। 2004 और 2009 लोकसभा चुनाव में भाजपा को शिकस्त झेलनी पड़ी। 2014 लोकसभा चुनाव से एक साल पहले राजनाथ सिंह को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ा और पहली बार केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी।


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