LokSabha Elections 2109 : सपा प्रत्याशी ने लगाए सनसनीखेज आरोप, सांसद ने भी किया पलटवार
गोरखपुर सदर सीट से सपा के प्रत्याशी घोषित हुए पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद ने निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
गोरखपुर, जेएनएन। सपा-बसपा गठबंधन से निषाद पार्टी के अलग होने के बाद गोरखपुर सदर सीट से सपा के प्रत्याशी घोषित हुए पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद ने निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रामभुआल ने कहा कि डा. संजय को समाज के मान-सम्मान की कोई चिंता नहीं है। उन्हें पैसा चाहिए और वह सौदे के लिए लड़ते हैं। इस बार उन्होंने उसी भाजपा से 50 करोड़ रुपये लेकर सौदेबाजी की है, जिसकी सरकार में अभी कुछ दिन पहले ही निषाद पीटे गए थे। इस सौदेबाजी का सच दो-तीन दिन में उजागर हो जाएगा।
लोकसभा चुनाव में सपा का टिकट पाने के बाद बेतियाहाता स्थित पार्टी कार्यालय पर पहुंचे पूर्व राज्यमंत्री रामभुआल का कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक निषाद को प्रत्याशी बनाकर पूरे समाज का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। सपा की नीतियां और विकास कार्य आज भी लोगों को याद हैं। रामभुआल ने कहा कि पूर्व मंत्री जमुना निषाद के साथ हर बार छल करके उन्हें चुनाव हरवा दिया जाता था। इसी का नतीजा रहा कि पिछले उपचुनाव में गठबंधन के साथ निषादों ने कदम मिलाकर भाजपा को शिकस्त दी थी। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद का निषाद समाज से कोई लेना-देना नहीं है। वह सिर्फ समाज के लोगों को ठगने और बेचने के अभियान में निकले हैं। निषाद समाज इस अपमान का बदला जरूर लेगा।
लेन-देन के अनुभवी हैं रामभुआल: डा. संजय निषाद
उधर, रामभुआल निषाद के आरोप को निराधार बताते हुए डा. संजय निषाद ने कहा कि रामभुआल मंत्री रहे हैं और वह लेन-देन के अनुभवी हैं। इसलिए इस तरह का आरोप लगा रहे हैं। सपा निषाद पार्टी को समाप्त करना चाहती थी, इसलिए हम लोगों ने नाता तोड़ा। निषाद पार्टी के लिए निषाद समाज का हित सर्वोपरि है और आगे भी इसके लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी।
उपेक्षा नहीं सह सकता निषाद समाज : प्रवीण
समाजवादी पार्टी के सांसद प्रवीण निषाद ने कहा है कि निषाद पार्टी ने उपचुनाव में सपा को तो जीत दिला दी, लेकिन निषादों के आरक्षण की लड़ाई में सपा साथ नहीं दे रही थी। हर गठबंधन-समझौते की कुछ शर्ते होती हैं, जिसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए। हम निषाद समाज की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं कर सकते, चाहे इसके लिए कोई कीमत चुकानी पड़े।
लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन से निषाद पार्टी के अलग होने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद के बेटे सपा सांसद प्रवीण निषाद ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोल दिया। सांसद ने कहा कि गठबंधन की मंशा शुरू से ही साफ नहीं थी। पार्टी के किसी भी बैनर, होर्डिग में सांसद का नाम या तस्वीर न होना उपेक्षा का बड़ा प्रमाण है। निषाद समाज के इकलौते सांसद को चार बार लखनऊ बुलाकर टिकट घोषित न करना अपमान जैसा ही है। सपा की मंशा गड़बड़ थी। निषाद समाज को एकजुट करने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद को अंतिम समय तक अंधेरे रखकर टिकट काटने की योजना थी। जो टिकट इतने दिन से तय नहीं हो पा रहा था उसका एक ही दिन में घोषित होना यह साबित करता है कि सपा किसी निषाद को दोबारा जीतता नहीं देख सकती थी। गठबंधन ने आरक्षण के मुद्दे पर चल रही निषादों की लड़ाई में मदद का भरोसा दिया था, लेकिन वक्त आने पर ऐसा नहीं किया। आगे की राह किसके साथ और भाजपा नेताओं, मुख्यमंत्री से मुलाकात के सवाल पर प्रवीण निषाद ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व इस पर विचार और सर्वे कर रहा है। जो भी निर्णय लेना होगा वह निषाद समाज के निर्देश और उनकी मंशा के अनुरूप होगा।
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