जामताड़ा, प्रमोद चौधरी। आदिवासियों की जुबान में जोहार (प्रणाम) सम्मान लेने व देने का प्रतीक है। संताल परगना में जोहार की अपनी अहमियत है। इसलिए झारखंडी नामधारी पार्टियों के अलावा वाम या दक्षिणपंथी विचारधारा के नेता जब जनता के बीच पहुंचते हैं तो जोहार के बोल से ही अपनी नजदीकियां बढ़ाते हैं। संताल परगना में इसी जोहार से सामाजिक आंदोलन को राजनीतिक पैठ में बदलने वाले दिशोम गुरु की अलग पहचान व सम्मान है। इसीलिए इस प्रमंडल के तीन संसदीय सीटों में से दुमका व राजमहल में झामुमो का बोलबाला है।

शिबू सोरेन उर्फ गुरुजी इस बार नौंवी बार जीत हासिल करने के इरादे से दुमका से नामांकन दाखिल कर चुके हैं। वहीं गुरुजी के विजयी रथ को रोकने के लिए इस बार भगवा ने भी प्रभावकारी रणनीति बनाई है। पहली बार भाजपा ने प्रतिद्वंदी के गढ़ में आदिवासियों का विश्वास जीतने की कमान अपने आदिवासी नेताओं को सौंपी है। पीएम मोदी के काम-नाम के अलावा रघुवर सरकार में आदिवासियों के लिए किए गए कार्यों को भी घर-घर गिनाया जा रहा है। ताकि गुरुजी के तीर-धनुष की चुनावी हवा में कमल खिलाया जा सके।

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अभी नहीं भोंपू का शोर, चुपचाप बूथ प्रबंधन पर जोर : दुमका संसदीय सीट पर उम्मीदवारों के नामांकन का दौर शुरू हो गया है। सोमवार को महागठबंधन की ओर से झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन ने पर्चा भरा। जबकि राजग की तरफ से दूसरे मजबूत प्रत्याशी सुनील सोरेन नामांकन की तैयारी में है। ऐसे में इस संसदीय क्षेत्र के जामताड़ा जिले में भोंपू का शोर अभी सुनाई नहीं पड़ रहा है। बगैर शोर के दोनों पार्टियां बूथ प्रबंधन से लेकर कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने में जुटी हुई हैं। चुनावी दंगल में गुरुजी की राह आसान करने को पूर्व सीएम हेमंत सोरेन तीन दिन पूर्व ही  जामताड़ा के नए नगर भवन में कार्यकर्ताओं से बैठक कर चुके हैं। वहीं अन्य नेता बूथ प्रबंधन की राह पर हैं। जबकि भगवा बिग्रेड पिछले दो चुनावों में गुरुजी के सामने हार के संताप को भूलकर फिर से सुनील सोरेन को हर स्तर पर मजबूती देने को खड़ी हो चुकी है। पूरे संसदीय क्षेत्र के 1891 बूथों पर कमेटी के गठन-पुनर्गठन की तैयारी पूरी कर भाजपाई मतदाताओं तक पहुंचने का सफर भी शुरू कर चुके हैं। गांव-गांव में बैठक कर जनता तक अपनी बात पहुंचाई जा रही है।

सह प्रभारी हांसदा कैंप किए : झामुमो की चुनौती की काट के लिए संताल परगना के भाजपा के सह प्रभारी बीस दिनों से यहां कैंप किए हुए हैं। वे हर स्तर के कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। सबसे ज्यादा समय वे आदिवासी बहुल इलाकों में दे रहे हैं। आदिवासियों में इस बात को रखकर अपने दल की जगह बना रहे हैं कि गुरुजी सम्मानित हैं, पर उनके आड़े उम्र आ रही है। विकास के लिए युवा सुनील हर उम्मीदों पर खरा उतरेंगे।  बकौल हांसदा जनता तक पीएम मोदी के व्यक्तित्व व विकास के कार्यों को पहुंचाया जा रहा है। आदिवासियों को बताया जा रहा है कि नई सोच के तहत भाजपा में आदिवासी नेतृत्व को उभारा जा रहा है। वे खुद सह प्रभारी के रूप में इसका प्रमाण हैं। मंडल स्तर से जिलास्तर तक की कमेटियों का नेतृत्व आदिवासियों के हाथों में सौंपा गया है। रघुवर सरकार ने धर्मातंरण बिल पास करवाया। संथाल बहुल इलाकों के स्कूलों में संथाली भाषा की पढ़ाई शुरू करवाई गई।  अब यह हथियार दुमका के चुनावी महासमर में गुरुजी के प्रति सहानुभूति व सम्मान की  लहर को किस हद तक कम कर पाएगा यह वक्त के साथ ही साफ होगा। 

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Posted By: mritunjay

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