विजय सक्सेना, प्रयागराज : समय वह भी था जब लोगों ने इमरजेंसी देखी। साथ ही लोकसभा का बढ़ा हुआ कार्यकाल भी। इलाहाबाद हाइकोर्ट ने जब रायबरेली का लोकसभा चुनाव अवैध घोषित किया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 26 जून 1975 को देश में इमरजेंसी लागू कर दी। कांग्रेस सरकार को इतने से भी संतोष नहीं हुआ। 1976 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव एक वर्ष टाल दिया गया। इसलिए अगला आम चुनाव पांच की बजाय छह वर्ष बाद वर्ष 1977 में हुआ। इसमें कांग्रेस को इमरजेंसी लगाने और उस दौरान लिए गए निर्णयों का खमियाजा भुगतना पड़ा था।  

राजनारायण ने इंदिरा पर चुनाव में धांधली का लगा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की

1971 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी रायबरेली संसदीय क्षेत्र से जीती थीं। निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी प्रत्याशी राज नारायण को हार बर्दाश्त नहीं हुई। उन्होंने इंदिरा गांधी पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए इलाहाबाद हाइकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। तब तक देश में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बन चुकी थी। इधर हाइकोर्ट में निर्वाचन संबंधी मामले में लगातार सुनवाई हो रही थी। एक बार इंदिरा गांधी भी कोर्ट में हाजिर हुईं। गुजरात में शुरू हुए छात्र आंदोलन ने कांग्र्रेस के खिलाफ माहौल बनाया ही था, जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में शुरू हुई बदलाव की मुहिम विस्तार पा चुकी थी। 

इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी

इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे समाजवादी नेता केके श्रीवास्तव बताते हैं कि हाइकोर्ट में दाखिल याचिका का खिलाफ जाना, छात्र आंदोलन और जेपी आंदोलन तत्कालीन कांग्रेस सरकार को खतरा लगा था। हाइकोर्ट का आदेश आने के बाद 26 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी। देश में 18 माह इमरजेंसी लागू रही। इस दौरान सरकार ने नसबंदी समेत कई ऐसे निर्णय लिए जिससे लोगों में कांग्रेस से नाराजगी बढ़ गई। 1976 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव 1977 में हुआ। 

सांसद मधु लिमये ने लोकसभा सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था

काग्रेस सरकार का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ाए जाने के खिलाफ तत्कालीन सांसद मधु लिमये ने लोकसभा सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। उनका कहना था कि जनता ने उन्हें पांच वर्ष के लिए चुना है। यह 1976 में पूरा हो गया। अब मुझे संसद में रहने का हक नहीं है। 

 

Posted By: Brijesh Srivastava