नई दिल्ली,जेएनएन। Lok Sabha election Results 2019, चुनाव आयोग ने अभी तक अमेठी लोकसभा चुनाव के नतीजों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अब-तक के रुझानों को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी हार स्वीकार कर ली है और भाजपा नेता और अपनी प्रतिद्वंद्वी स्मृति ईरानी को बधाई दे दी है। भारतीय राजनीति में इसे ऐतिहासिक घटना के रूप में दर्ज किया जाएगा, जब गांधी परिवार को उसके गढ़ में शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इससे पहले सोशलिस्ट पार्टी के नेता राजनारायण ने स्वर्गीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 1977 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली से पराजित किया था।

उत्तर प्रदेश की रायबरेली, अमेठी और सुल्तानपुर को गांधी परिवार और कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। इस लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर से गांधी परिवार की छोटी बहू मेनका गांधी भाजपा की ओर से मैदान में हैं। अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस का कितना गहरा असर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2014 में मोदी की लहर में भी पार्टी ये दोनों सीटें बचाने में कामयाब रही थी। अमेठी से राहुल गांधी जबकि रायबरेली से सोनिया गांधी ने चुनाव जीता था। इस लोकसभा चुनाव में हालांकि कांग्रेस का सिर्फ एक गढ़ यानी रायबरेली ही बच पाने की उम्मीद है जहां से सोनिया गांधी फिर उम्मीदवार हैं।

कौन थे राजनारायण
15 मार्च,1917 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्मे राजनारायण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और राजनेता थे। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से एमए और एलएलबी की शिक्षा ग्रहण करने वाले  राजनारायण 58 बार जेल गए। इस तरह से उनके जीवन के पंद्रह साल सलाखों के पीछे बीते। जब देश आजाद हुआ तो उन्होंने आचार्य नरेंद्र देव, जय प्रकाश नारायण और डॉ. राम  मनोहर लोहिया की सोशलिस्ट पार्टी से नाता जोड़ लिया। डॉ. लोहिया उन्हें शेर दिल वाला गांधीवादी कहते थे। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनावी संघर्ष और जीत के लिए उन्हें सबसे ज्यादा याद किया जाता है।

बात 1971 की है जब लोकसभा चुनाव में रायबरेली सीट से इंदिरा गांधी उम्मीदवार थीं और उन्हें चुनौती दे रहे थे राजनारायण। हालांकि, राजनारायण चुनाव हार गए लेकिन उन्होंने  चुनाव में भ्रष्ट तरीकों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए इंदिरा गांधी की जीत को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। 12 जून, 1975 को अदालत ने इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उनका चुनाव रद कर दिया। इस फैसले से विपक्ष का मनोबल बढ़ा और जय प्रकाश नारायण ने केंद्र सरकार के खिलाफ संपूर्ण क्रांति का आह्वान कर दिया। इससे डरी हुई इंदिरा गांधी ने 25 जून, 1975 को देश में आपातकाल यानी इमरजेंसी लगा दी।

देश में दो साल तक इमरजेंसी रही। विपक्ष के सभी बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया। इस दौरान इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी के विवादास्पद नसबंदी प्रोग्राम की वजह से कांग्रेस के खिलाफ जबरदस्त माहौल बन गया। अंततः इंदिरा गांधी को इमरजेंसी हटानी पड़ी। इसके बाद 1977 में हुए चुनाव में राजनारायण ने इंदिरा गांधी को रायबरेली से शिकस्त दी और देश की राजनीति में अमर हो गए।

अमेठी में पहले भी हारी है कांग्रेस
हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस को अपने गढ़ अमेठी में हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले गांधी परिवार के विश्वस्त सतीश शर्मा और खुद संजय गांधी अमेठी से चुनाव हार चुके हैं। संजय गांधी को 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में अमेठी से हार का सामना करना पड़ा था।

 

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Tanisk