नई दिल्ली (जेएनएन)। गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट का सियासी पारा इन दिनों आसमान पर है। यहां से केंद्रीय मंत्री और वर्तमान भाजपा सांसद महेश शर्मा पार्टी के उम्मीदवार हैं। 2014 की मोदी लहर में शर्मा ने जोरदार जीत हासिल की थी। इस संसदीय क्षेत्र में गुर्जर, ठाकुर, दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या अधिक है। 2009 में पहली बार गौतमबुद्ध नगर सीट पर संसदीय चुनाव हुआ था, जिसमें बसपा के सुरेंद्र सिंह नागर को जीत मिली थी। आइए जानते हैं इस लोकसभा क्षेत्र के सियासी सफर के बारे में-

पहले बुलंदशहर और फिर खुर्जा का था हिस्सा

1952 में हुए देश के पहले संसदीय चुनाव के वक्त गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट अस्तित्व में नहीं थी। तब यह क्षेत्र बुलंदशहर लोकसभा सीट का हिस्सा था। 1962 में तीसरे लोकसभा चुनाव के दौरान खुर्जा लोकसभा सीट का गठन किया गया और इसे खुर्जा में शामिल कर दिया गया। उन दिनों देश भर में कांग्रेस का सिक्का चल रहा था। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित खुर्जा सीट पर 1962 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस की लहर में उसके प्रत्याशी कन्हैया लाल बाल्मीेकी को भारी मतों से जीत मिली। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और जनसंघ समेत अन्य प्रमुख दलों को भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा।

स्वतंत्र सीट बनने पर बसपा ने फहराया झंडा

2009 में गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट का गठन किया गया और इसे सामान्य सीट कर दिया गया। परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद इस लोकसभा क्षेत्र में नोएडा, दादरी, जेवर, सिकंदराबाद और खुर्जा विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया। गौतमबुद्ध नगर जिला बसपा प्रमुख मायावती का गृह जनपद है। 2009 के संसदीय चुनाव में मायावती ने सुरेंद्र सिंह नागर को प्रत्याशी बनाया। स्वतंत्र लोकसभा सीट बनने के बाद यहां पहली बार हो रहे संसदीय चुनाव में जनता ने बसपा उम्मीदवार पर भरोसा जताया और नागर भारी मतों के साथ विजेता बने। भाजपा प्रत्याशी महेश शर्मा दूसरे नंबर पर और सपा के नरेंद्र भार्टी तीसरे नंबर पर रहे।

2014 में भाजपा ने लिया हार का बदला

पिछले लोकसभा चुनाव में करारी हार से सबक लेते हुए भाजपा ने इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी, जिसका नतीजा भी उसके लिए खुशी लेकर आया। 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी महेश शर्मा ने भारी मतों से जीत हासिल की। वहीं, सपा पिछली हार का अंतर कम करते हुए तीसरे स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंची। इस चुनाव में बसपा ने अपने तात्कालीन सांसद सुरेंद्र सिंह नागर का टिकट काट दिया और सतीश कुमार को उम्मीदवार बनाया। इस बदलाव का खामियाजा बसपा को भुगतना पड़ा। पिछले चुनाव में बसपा ने जहां जीत हासिल की थी, वहीं इस चुनाव में वह तीसरे पायदान पर पहुंच गई।

ठाकुर, ब्राहृमण और गुर्जर तय करते हैं जीत

गौतमबुद्धनगर के करीब 23 लाख वोटरों में करीब करीब 16 लाख वोटर गांव में रहते हैं। इनमें ठाकुर वोटर 4 से 4.5 लाख के करीब हैं। ब्राह्मण वोटरों की तादाद करीब 4 लाख है। मुस्लिम 3.5 लाख, गुर्जर 3.5 से 4 लाख, दलित 3.5 लाख और अन्य वोटर 3 लाख हैं।

2.54 लाख हैं नए मतदाता देंगे वोट

गौतमबुद्ध नगर में इस बार आम चुनावों में 2.54 लाख नए मतदाताओं की भूमिका अहम होगी। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक जिले की मतदाता सूची में 2,54,891 नए नाम जोड़े जा चुके हैं। भाजपा व सपा-बसपा गठबंधन में यदि कड़ा मुकाबला होता है तो फिर नए मतदाता निर्णायक भूमिका में रहेंगे। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नए मतदाता ज्यादातर शहरी क्षेत्र से हैं, जिनका रुझान आमतौर पर भाजपा की तरफ रहता है।

84 फीसद हैं हिंदू मतदाता

गौतमबुद्ध नगर की 84 फीसद आबादी हिंदू और 13 फीसद जनसंख्या मुस्लिम है। 11 अप्रैल को गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट के लिए 22 लाख 41 हजार मतदाता प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। बावजूद इसके कि अभी भी लोगों के पास मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का विकल्प मौजूद है। गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली पांचों विधानसभाओं नोएडा, दादरी, जेवर, खुर्जा व सिकंदराबाद में कुल पुरुष मतदाताओं की संख्या 12,32531 और महिला मतदाताओं की संख्या 1008475 है। वहीं, अन्य की श्रेणी में भी 228 मतदाता शामिल हैं।

2014 में हुआ था मात्र 60 फीसदी मतदान

2014 के लोकसभा चुनाव में कुल 19,86109 मतदाताओं ने हिस्सा लिया था, जिसमें 11 लाख पुरुष व 8 लाख महिला मतदाता शामिल थीं। गौर करने वाली बात यह है कि 2014 में यहां 60 फीसद मतदान ही हुआ था। इसमें भारतीय जनता पार्टी के डॉ. महेश शर्मा ने 599,702 (50 फीसदी) मत प्राप्त कर विजय पताका लहराई थी। वहीं समाजवादी पार्टी के नरेंद्र भाटी को कुल 319,490 मत प्राप्त हुए थे। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के सतीश कुमार 198,237 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे थे।

यहीं हैं रावण के पिता और द्रोणाचार्य का आश्रम

गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट के अंतर्गत नोएडा, दादरी, जेवर, सिकंदराबाद, खुर्जा विधानसभा सीटें आती हैं। गौतमबुद्ध नगर जिला 6 सितंबर 1997 को आस्तित्व में आया। यह जिला गाजियाबाद और बुलंदशहर को अलग करके बना था। कहा जाता है कि यहां के गुर्जरों के जानवर चराते हुए उन्होंने कई पुस्तकों का अनुवाद किया था। नलगढ़ा गांव में भगत सिंह ने भूमिगत रहते हुए कई बम-परीक्षण किए थे। वहां आज भी एक बहुत बड़ा पत्थर भगत सिंह की याद में सुरक्षित रखा हुआ है।

 

Posted By: Nitesh

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