राजकुमार श्रीवास्तव, प्रयागराज : कभी चायल (अब कौशांबी) संसदीय क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ था। इमरजेंसी के बाद हुए आम चुनाव में यह मिथक टूटा। इस लोकसभा सीट पर पहली बार भाजपा को करीब दो दशक पहले पहली बार जीत मिली। यहां कमल का फूल खिलाने में एक कर्मचारी नेता ने अपनी नौकरी दांव पर लगा दी थी। कर्मचारियों के भारी समर्थन से वह चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचने में सफल हुए थे। 

 सीजीएचएस कर्मचारी संघ के मंत्री को भाजपा ने बनाया था प्रत्याशी

चायल संसदीय सीट से वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) कर्मचारी संघ के तत्कालीन संगठन मंत्री रहे अमृत लाल भारतीय को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया। अमृत लाल नैनी के चकनिरातुल क्षेत्र के रहने वाले थे। वह सीजीएचएस डिस्पेंसरी नंबर सात (नैनी) में बतौर वरिष्ठ फार्मासिस्ट सेवारत थे। 

अमृतलाल भारतीय के चुनाव मैदान में उतरने की रोचक है कहानी

अमृतलाल भारतीय के चुनाव लडऩे की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। बताते हैं कि दिग्गज भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने उनसे वादा किया था कि वह उन्हें चायल संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरवा सकते हैं, बशर्ते वह अपना इस्तीफा स्वीकार करा लें। इस मसले पर एजी ब्रदरहुड में तत्कालीन पदाधिकारियों की बैठक हुई। उन्हें सलाह दी गई कि इस्तीफा देने पर पेंशन नहीं मिलेगी, इसलिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लें। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया। डॉ. जोशी ने डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज से वार्ता कर उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दिला दी। 

कर्मचारी नेता के समर्थन में शत्रुघ्न सिन्हा ने की थी जनसभा

इसके बाद अमृतलाल भारतीय चुनाव मैदान में उतरे। उनके समर्थन में एक बड़ी चुनावी सभा मंझनपुर चौराहे पर हुई। इसमें समय भाजपा के दिग्गज नेता शत्रुघ्न सिन्हा को बुलाया गया था। सभा में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से भी बड़ी संख्या में कायस्थ समुदाय के लोग शामिल हुए थे। शत्रुघ्न सिन्हा ने अपना भाषण शुरू करते ही कहा कि 'मैं आपके बीच एक ऐसे व्यक्ति के लिए वोट मांगने आया हूं, जो अपनी सरकारी नौकरी दांव पर लगाकर आपकी सेवा करने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं। इसलिए अमृत लाल को भारी मतों से चुनाव जिताकर लोकसभा भेजिए।'

बोले, संसद में कर्मचारियों की बात रख सकें

फिर उन्होंने यह भी जोड़ा कि संसदीय क्षेत्र कर्मचारियों का गढ़ है, कर्मचारियों के बल पर ही एजी के कर्मचारी नेता छोटे लाल भी लोकसभा पहुंचे थे। छोटे लाल को 1971 में इस क्षेत्र से विजयश्री मिली थी। इसलिए मुझे उम्मीद है कि आप लोग दूसरे कर्मचारी नेता को भी लोकसभा पहुंचाएंगे, ताकि वह संसद में कर्मचारियों की बात रख सकें।

...और अमृतलाल चुनाव जीत गए

 अमृतलाल चुनाव जीत गए थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी राम निहोर राकेश को हराया था। वरिष्ठ कर्मचारी नेता कृपाशंकर श्रीवास्तव के मुताबिक इस सीट से पहली बार भाजपा की जीत हुई थी।   

 

Posted By: Brijesh Srivastava

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