रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Assembly Election 2019 - झारखंड की राजनीति में दल-बदल अब चौंकाने वाली बात नहीं रही। यूं कहें झारखंड गठन के साथ ही शुरू हुआ यह खेल बदलते वक्त के साथ परवान चढ़ता गया। कहीं अति महत्वाकांक्षा तो कहीं दल विशेष से नाराजगी इसकी वजह बनती रही। चुनाव से पूर्व टिकट नहीं मिलने क्षुब्ध विक्षुब्धों की टोली जहां अन्य दलों में अपनी जमीन तलाशती नजर आती है तो चुनाव के बाद सरकार में शामिल होने के लिए नेताओं की निष्ठा डोलती रही है।

इससे इतर राज्य गठन के बाद हुए विधानसभा चुनावों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब राष्ट्रीय दलों के अलावा बड़े क्षेत्रीय दलों के लगभग दो दर्जन दिग्गजों ने पाला बदल लिया हो। इनमें से आधे से अधिक किसी न किसी विधानसभा क्षेत्र के सिटिंग विधायक हैं। भाजपा के कद्दावर नेताओं में शुमार सरयू राय सरीखे नेता भी इनमें शामिल हैं। दल छोडऩे वाले अधिकतर दिग्गज अब अपने ही विधानसभा में अपने पुराने दल के प्रतिद्वंद्वी को मात देंगे।

दल बदलुओं में 11 सिटिंग विधायक

दल बदलने वाले नेताओं में 10 सिटिंग विधायक भी हैं। इनमें छतरपुर के विधायक राधाकृष्ण किशोर (भाजपा से आजसू), सिंदरी के विधायक फूलचंद मंडल (भाजपा से झामुमो), भवनाथपुर विधायक भानु प्रताप शाही (नौजवान संघर्ष मोर्चा से भाजपा), बरही विधायक मनोज यादव (कांग्रेस से भाजपा), लातेहार विधायक प्रकाश राम (झाविमो से भजपा), लोहरदगा विधायक सुखदेव भगत (कांग्रेस से भाजपा), तमाड़ विधायक विकास मुंडा (आजसू से झामुमो), बोरियो विधायक ताला मरांडी (भाजपा से झामुमो) , मांडू विधायक जय प्रकाश भाई पटेल (झामुमो से भाजपा) तथा बहरागोड़ा के विधायक कुणाल षाड़ंगी (झामुमो से भाजपा) शामिल हैं।

इन्होंने भी छोड़ा पुराना घर 

प्रदीप बलमुचू घाटशिला (कांग्रेस से आजसू), जनार्दन पासवान चतरा (राजद से भाजपा), सत्यानंद भोक्ता (चतरा झाविमो से राजद),शालिनी गुप्ता कोडरमा (भाजपा से आजसू), अंतु तिर्की खिजरी (झामुमो से झाविमो), शशिभूषण सामड चक्रधरपुर (झामुमो से झाविमो), अकील अख्तर पाकुड़ (झामुमो से आजसू ), बैद्यनाथ राम लातेहार (भाजपा से झामुमो) आबो देवी (राजद से आजसू) ने भी अपने दल से प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर पाला बदल लिया।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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