जागरण संपादकीय: प्रधानमंत्री की चिंतन बैठक
शहरों की सूरत संवारने के साथ ही सरकार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
HighLights
प्रधानमंत्री की ओर से अपनी मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों के साथ दो दिवसीय चिंतन बैठक यह रेखांकित कर रही है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श होने जा रहा है। इनमें से एक विकसित भारत के लिए आवश्यक कदमों पर अमल करना और सुधारों को आगे बढ़ाना है। इस बैठक में योजनाओं की प्रगति, नीतियों के क्रियान्वयन और मंत्रालयों के बीच तालमेल जैसे विषयों पर भी चर्चा संभावित है।
जो भी हो, सरकार के कामकाज को और प्रभावी बनाना समय की मांग है। इसके लिए नौकरशाही को अपना रुख-रवैया बदलना होगा। इससे इनकार नहीं कि मोदी सरकार की ओर से विकास और जनकल्याण संबंधी अनेक कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन यह भी सच है कि इन कार्यों की गति और गुणवत्ता बढ़ाने की आवश्यकता है। इस आवश्यकता की पूर्ति करके ही 2047 तक देश को विकसित बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
इस लक्ष्य को आसान बनाने के लिए यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि सरकार एक साथ कई मोर्चों पर गंभीरता से ध्यान दे। इनमें एक मोर्चा है शहरों की सूरत संवारने का। चूंकि शहर आर्थिक विकास के इंजन हैं, इसलिए उनके ढांचे में सुधार के साथ नागरिक सुविधाओं में बेहतरी समय की मांग है। इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि समृद्धि बढ़ने के साथ एक ऐसा वर्ग उभर आया है, जिसे सब कुछ गुणवत्तापूर्ण चाहिए। इनमें नागरिक सुविधाओं से लेकर उपभोक्ता सामग्री एवं आमोद-प्रमोद के साधन भी शामिल हैं। ध्यान रहे कि देशों का वैभव उनके शहरों से भी प्रकट होता है। शहरों को साधन संपन्न बनाने का काम प्रमुखता से होना चाहिए, ताकि वे तनाव मुक्त जीवन का जरिया बन सकें।
शहरों की सूरत संवारने के साथ ही सरकार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने पर भी विशेष ध्यान देना होगा। यह ठीक नहीं कि तमाम प्रयासों के बाद भी कृषि की उत्पादकता बढ़ने का नाम नहीं ले रही है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन बढ़ रहा है। एक अन्य मोर्चा शिक्षा का है। यह ठीक है कि नई शिक्षा नीति पर अमल हो रहा है, लेकिन सभी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है।
ऐसी ही चुनौती युवाओं को उपयुक्त कौशल से लैस करने की भी है। हमारे युवा डिग्री तो हासिल कर ले रहे हैं, लेकिन वे किसी कौशल से लैस नहीं हो पा रहे हैं। इस समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए, क्योंकि इससे ही रोजगार की चुनौती का सामना करने में मदद मिलेगी। किसी भी सरकार का लक्ष्य लोगों की समस्याओं का समाधान करना और जीवन को आसान बनाना होता है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तब आसानी से होती है, जब नियम-कानूनों का सही से पालन होता है।




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