इस वर्ष के पहले रोजगार मेले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 71 हजार लोगों को नियुक्ति पत्र सौंपकर इस साल दिसंबर तक दस लाख सरकारी नौकरियां देने के अभियान को आगे बढ़ाया। चूंकि विभिन्न सरकारी विभागों में लाखों पद रिक्त हैं, इसलिए उन्हें समय रहते भरा ही जाना चाहिए। इस मामले में केंद्र सरकार जैसी सक्रियता सभी राज्य सरकारों को दिखानी चाहिए-वे चाहे भाजपा शासित सरकारें हों या अन्य दलों द्वारा शासित राज्य सरकारें। इस सक्रियता की आवश्यकता इसलिए है, क्योंकि विभिन्न विभागों में अनेक पद वर्षों तक रिक्त बने रहते हैं। इससे संबंधित विभागों की कार्यकुशलता प्रभावित होती है और इसके दुष्परिणाम आम जनता को भोगने पड़ते हैं। इससे कुल मिलाकर सरकारों की छवि ही प्रभावित होती है।

कहीं सरकारी विभागों के तमाम पद लंबे समय तक इसलिए तो रिक्त नहीं रहते, क्योंकि मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस की धारणा के तहत यह मान लिया गया है कि सरकार को अपना काम कम से कम कर्मचारियों से चलाना चाहिए? इस धारणा का अपना एक महत्व है, लेकिन यह भी ध्यान रहे कि सरकारों की दक्षता और कार्यकुशलता तभी बढ़ती है, जब उनके पास पर्याप्त सरकारी कर्मचारी होते हैं। संख्याबल के अभाव से जूझते सरकारी तंत्र के सहारे सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता।

यह अच्छा है कि केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष दस लाख रिक्त पद भरने का अभियान शुरू किया। इस अभियान के तहत अब तक तीन रोजगार मेले आयोजित कर हजारों युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। अभी तक दो लाख से अधिक नौकरियां दी जा चुकी हैं। रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने के अभियान को और गति देने की आवश्यकता है, क्योंकि वांछित लक्ष्य को पूरा करने के लिए अगले 11 माह में करीब आठ लाख नौकरियां देनी होंगी। इस अभियान को गति देने के साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सरकारी कर्मचारी और अधिक कार्यकुशल एवं जवाबदेह बनें।

सरकारों को सरकारी नौकरियों के बारे में बनी इस धारणा को दूर करने के भी जतन करने चाहिए कि वे नौकरी की सुरक्षा की गारंटी के साथ आरामतलबी का पर्याय हैं। सरकारी नौकरियों को लेकर यह धारणा भी व्याप्त है कि वे जवाबदेही की मांग नहीं करतीं। शायद इसका ही यह परिणाम है कि औसत सरकारी कर्मचारियों में जनता की सेवा को लेकर अपेक्षित प्रतिबद्धता का अभाव दिखता है। कहने को तो वे लोकसेवक कहे जाते हैं, लेकिन उनमें सेवा का भाव मुश्किल से ही नजर आता है। सरकारी कर्मचारियों में अपने दायित्वों के प्रति कहीं अधिक समर्पण होना चाहिए। इस समर्पण भाव के माध्यम से ही वे उन उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक बन सकते हैं, जो सरकारों की ओर से तय किए जाते हैं और जिनके आधार पर उनके कामों का मूल्यांकन किया जाता है।

Edited By: Amit Singh

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