मां की पुकार अनसुनी कर दूसरों को बचाने लौटा सत्येंद्र…लौटी सिर्फ लाश; सीने में सुलग रही तिगड़ी एक्सटेंशन की आग
सत्येंद्र नामक एक युवक ने अपनी मां की बात न मानते हुए, दूसरों की जान बचाने के लिए वापस जलती हुई इमारत में प्रवेश किया। दुखद रूप से, वह खुद आग का शिकार हो गया और उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना से तिगड़ी एक्सटेंशन में शोक की लहर दौड़ गई है, और हर कोई सत्येंद्र की बहादुरी को याद कर रहा है।

तिगड़ी एक्सटेंशन स्थित मकान में लगी आग में मृतक सत्येंद्र उर्फ जिमी (इनसेट, फाइल फोटो) की मां को सांत्वना देते स्वजन। जागरण
शशि ठाकुर, नई दिल्ली। 'अंदर मत जा, रूक जा, पर उसने मेरी एक न सुनी... मैं देखती रही और मेरा बेटा धधकती आग में समा गया। अगर उसने मेरी बात मान ली होती तो आज वह जिंदा होता।' तिगड़ी एक्सटेंशन में चार मंजिला मकान में लगी आग में जान गंवाने वाले 38 वर्षीय सत्येंद्र उर्फ जिम्मी की मां मिथिलेश गुप्ता ने रोते हुए बताया कि उनका बेटा दुकान में लगी आग से बाहर निकलकर आया तो उसके बाल और कपड़ों में आग लगी थी। जिसे लोगों ने बुझाकर उसे बचा लिया था, लेकिन वह आग की लपटों में फंसे लोगों को बचाने के लिए फिर अंदर चला गया। इसके बाद उसका जला मृत शरीर बाहर आया।
मृतक सत्येंद्र के छोटे भाई जितेंद्र बताते हैं कि दो दिन पहले उनके परिवार में खुशियों का माहौल था। उन्होंने 28 नवंबर को ही अपने परिवार के साथ अपना और अपने भाई जिम्मी की जन्मतिथि धूमधाम से आगरा में मनाया था। भूतल पर जूते-चप्पल की दुकान थी। इसके पीछे वाले कमरे और पहली मंजिल पर सत्येंद्र और जितेंद्र अपने-अपने परिवार और मां के साथ रहते थे।
आग में झुलसकर जान गंवाने वाली महिला मंजू उर्फ अनीता किराए पर इनके घर में दूसरी मंजिल पर पिछले 10 वर्षों से अपने परिवार की तरह ही रह रही थी। शनिवार को जब हादसा हुआ तो सत्येंद्र के स्वजन व अनीता के दो बच्चे घर से बाहर गए हुए थे। इसके चलते वे सुरक्षित हैं। जबकि अनीता की बहन ममता उनके साथ घर में मौजूद थी और वह हादसे की चपेट में बुरी तरह घायल हो गई। ममता 25 प्रतिशत झुलसी हैं। सफदरजंग हास्पिटल में उनका उपचार चल रहा है।
दो शवों की नहीं हो पाई पहचान
सफदरजंग अस्पताल की माेर्चरी में रखे गए दो शवों की अब तक पहचान नहीं हो पाई है। आस पड़ोस के लोगों का कहना है कि अज्ञात शव दुकान में जूते की खरीदारी करने आए लोगों के हो सकते हैं जोकि सत्येंद्र के साथ ही दुकान के अंदर फंसने पर पूरी तरह जले होंगे। हादसे से पहले सत्येंद्र इन्हें जूते दिखा रहे थे।
रस्सी बांधकर दो को निकाला
पड़ोसी कमल ने बताया कि उनके घर में 25 नवंबर को बेटी की शादी थी। घर को लाइटों से सजाया गया था। आग लगने पर पड़ोस के लोगों ने उन्हें जल्द घर से बाहर निकालकर छत पर लकड़ी की सीढियों और लड़ियों के सहारे रस्सी बांधकर चौथी मंजिल से अनीता व ममता को नीचे उतारा। लेकिन अनीता की जान नहीं बच पाई। जबकि ममता का अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस आग में दोनों परिवारों की गृहस्थी जलकर खाक हो गई। सत्येंद्र के स्वजन को पड़ोसियों ने शरण दी है। हादसे वाले घर में स्वजन जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं।
शाॅर्ट सर्किट और कंप्रेशर ब्लास्ट को बता रहे वजह
स्वजन आग लगने की वजह भूतल पर रखे पुराने रेफ्रिजरेटर शार्ट सर्किट और कंप्रेशर का ब्लास्ट होना बता रहे हैं। बाद में जूतों में आग लगने के कारण घर में फैल गई। हादसे के समय अनीता की बेटी व बेटा ट्यूशन गए हुए थे। सत्येंद्र की पत्नी प्रियंका अपने दोनों बच्चों को ट्यूशन से वापस लेने गई हुई थीं।
सत्येंद्र का भाई जितेंद्र किसी काम से मोहल्ले में निकला था और उनकी मां मिथिलेश घर के बाहर बैठी थीं। इस कारण परिवार के अन्य सदस्य बच गए। जितेंद्र ने बताया कि आग लगने की जानकारी मिलते ही वे दौड़कर घर पहुंचे।
पड़ोसियों के साथ मिलकर आग को बुझाने की कोशिश की और दमकल व पुलिस को भी सूचित किया। जब तक आग पर काबू पाया गया, तब तक उनके भाई समेत चार लोग आग में बुरी तरह झुलस चुके थे और उनकी मौत हो गई थी।

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