'हमें AI से बने जंगल नहीं चाहिए', रिज में पेड़ काटने पर सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए को लगाई कड़ी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली रिज में सड़क निर्माण के लिए 473 पेड़ काटने की डीडीए की अनुमति याचिका पर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पहले काटे गए 1.65 लाख पेड़ों ...और पढ़ें

पीटीआई, नई दिल्ली। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा दिल्ली रिज क्षेत्र में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज तक सड़क निर्माण के लिए 473 पेड़ काटने की अनुमति मांगने पर सुप्रीम कोर्ट ने आज कड़ी फटकार लगाई।
चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने पूछा कि पहले काटे गए 1.65 लाख पेड़ों में से कितनों की भरपाई की गई है। कोर्ट ने कहा, "हमें एआई से बने जंगल नहीं चाहिए।" कोर्ट ने पिछले आदेश के अनुपालन का ठोस प्रमाण मांगा।
कोर्ट ने पर्यावरण नियमों को लागू करने पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि बिना संतुष्ट हुए नई अनुमति नहीं दी जाएगी। चीफ जस्टिस ने पूछा, "18 पॉकेट्स में काटे गए 1.65 लाख पेड़ों की भरपाई का क्या हुआ?" सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अनुपालन एफिडेविट दाखिल करने की बात कही, लेकिन कोर्ट ने जमीन पर वास्तविक कार्रवाई के फोटो मांगते हुए डीडीए से 185 एकड़ के 18 स्थलों पर पौधारोपण की वास्तविक स्थिति बताने को कहा।
डीडीए की ओर से पेश वकील ने बॉउंड्री वर्क और मार्च तक का समय बताया, लेकिन कोर्ट ने मिट्टी की गुणवत्ता और गहरे गड्ढों पर सवाल उठाए। चीफ जस्टिस ने चेतावनी दी कि वास्तविक पौधारोपण और सबूत के बिना आगे अनुमति नहीं मिलेगी। सॉलिसिटर जनरल ने सड़क निर्माण के लिए मौजूदा पौधों को स्थानांतरित करने की व्यावहारिक समस्या बताई।

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