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    RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर बोले-हिंदुत्व का अर्थ ही एक-दूसरे को जोड़ना, जुड़े तो कोई दल लड़ा नहीं सकता

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 05:24 PM (IST)

    आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने दिल्ली के शब्दोत्सव समारोह में कहा कि आज का युवा वैश्विक स्तर पर जागरूक है और अपनी सांस्कृतिक जड़ो ...और पढ़ें

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    मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित दिल्ली शब्दोत्सव संघे शक्ति कलियुगे सत्र में सम्बोधित करते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर। चंद्र प्रकाश मिश्र

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आज की युवा पीढ़ी अक्सर अपने अनूठे क्रेज और सपनों की दुनिया के लिए जानी जाती है लेकिन उन्हें केवल सतही तौर पर समझना ठीक नहीं है। जिस तरह बंगाल विभाजन और स्वतंत्रता आंदोलन के समय युवाओं ने वंदे मातरम को अपना मंत्र बनाया था, वैसे ही आज का युवा देश और कानून के प्रति जागरूक होकर वैश्विक स्तर पर अपना परचम लहरा रहा है। विदेशों में रहने वाले भारतीय युवाओं में यह समझ बढ़ रही है कि आधुनिकता के बीच अपनी सांस्कृतिक जड़ों को खोने के क्या नुकसान हैं। उन्हें आज एक ऐसे सूत्र की तलाश है जो उन्हें अपनी मूल पहचान से जोड़ सके। संघ वही काम कर रहा है।

    यह उक्त बातें आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में दिल्ली सरकार, सुरुचि प्रकाशन और दैनिक जागरण की मीडिया पार्टनरशिप में आयोजित तीन दिवसीय शब्दोत्सव समारोह के अंतिम दिन कही। संघे शक्ति कलियुगे सत्र को संबोधित करते हुए आंबेकर ने कहा कि केवल राजनीतिक दल या पार्टी के माध्यम से समाज में स्थायी बदलाव संभव नहीं है। अगर यह संभव होता तो संघ के संस्थापक डाॅ. हेडगेवार संघ के बजाए एक राजनीतिक दल की ही स्थापना करते, लेकिन उन्होंने संगठन की स्थापना की क्योंकि राष्ट्र निर्माण के लिए गहन चरित्र निर्माण की आवश्यकता होती है। राम मंदिर आंदोलन इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसने देश की सामूहिक भाषा और चेतना को बदल दिया। आज की परिस्थितियां ऐसी हैं कि यदि जनशक्ति व युवा जागरूक हो, तो भाजपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस जैसी पार्टियां भी परिवर्तन के मार्ग पर चलने को विवश हो सकती हैं।

    आंबेकर ने कहा कि कुछ लोग संघ को राजनीति व भाजपा से जोड़कर देखते और समझते हैं, जो सही नहीं है। अगर संघ को संघ को समझना है तो उसके राष्ट्र-प्रथम के कार्यों और उसके सिद्धांतों को पहले जानना होगा। भाजपा में कई नेता, मंत्री स्वयंसेवक हैं, जो संघ की कार्यपद्धति और विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं। पर्यावरण और सामाजिक परिवर्तन पर चर्चा करते हुए आंबेकर ने कहा कि आज दिल्ली जैसे महानगर प्रदूषण से जूझ रहे हैं।

    सरकार और मंत्री अपनी जगह काम कर रहे हैं, लेकिन इस समस्या का समाधान करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसका समाधान हमारे व्यक्तिगत व्यवहार में छिपा है। प्लास्टिक का उपयोग और पानी की बर्बादी रोकना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। इसी तरह जाति के नाम पर बंटने के बजाय यदि लोग एक- दूसरे के प्रति मित्रता का भाव रखें, तो कोई भी राजनीतिक दल हमें लड़ा नहीं सकता। क्योंकि हिंदुत्व का अर्थ ही एक-दूसरे को जोड़ना है।

    आंबेकर ने संघ की 100 साल की यात्रा पर चर्चा करते हुए कहा कि अगर तीन फीसदी भी स्वयंसेवक बनें तो समाज में वातावरण बदला जा सकता है। वसुधैव कुटुम्बकम् मंत्र को विदेश अपना रहे है। आने वाले समय में जब तक देश को इसकी आवश्यकता रहेगी, संघ चलता रहेगा। हमें उत्तम लोग तैयार करने है और सारे हिंदू समाज को एकजुट करना है।

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