'शब्दोत्सव' में छात्राओं ने किताबों में तलाशा भविष्य, प्रदर्शनी में जीवंत हुई भारतीय विरासत
दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय शब्दोत्सव में युवाओं और बुजुर्गों ने भजनों व लोक नृत्यों का आनंद लिया। छात्रों ने किताबें तलाशी ...और पढ़ें

शब्दोत्सव कार्यक्रम में सेल्फी लेते युवा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राधे किशोरी दया करों, मीठे रस से भरी राधा रानी लागे, मेरे बांके बिहारी लाल, तू इतना ना करिओ श्रृंगार....। भजनों की प्रस्तुति जैसे ही माधवस राक बैंड ने देनी शुरू की, पूरा सभागार और परिसर राधे- कृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान युवा और बुजुर्ग कृष्ण भजनों पर जमकर झूमे।
मौका था मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय शब्दोत्सव का। अभ्युदय भारत थीम पर आधारित शब्दों और सुरों के उत्सव के पहले दिन साहित्य, कवि, संगीत व नृत्य क्षेत्र के कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

एक ओर जहां दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न कालेजों के छात्र अपनी पसंदीदा किताबों के पन्नों में भविष्य तलाशते नजर आए। वहीं, दूसरी ओर रोहतक की दादा लखमी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी के कलाकारों ने हरियाणा और राजस्थान की लोक नृत्य शैलियों से समां बाधा।
महाराष्ट्र की ऊर्जावान संस्कृति को जीवंत करते ढोल पथक बैंड की थाप ने दर्शकों में जोश भर दिया। परिसर में युवाओं ने केवल कला का आनंद ही नहीं लिया बल्कि मिट्टी की मूर्तियां और पेंटिंग बनाकर अपनी रचनात्मकता का भी प्रदर्शन किया।

पंच परिवर्तन और वैचारिक मंथन
शब्दोत्सव में उड़ान ए कल्चर एंड सोशल मूवमेंट द्वारा सामाजिक सरोकारों को भी प्रमुखता दी गई। पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य, कुटुंब प्रबोधन और सामाजिक समरसता पर आधारित पंच परिवर्तन फोटो प्रदर्शनी लगाकर दर्शकों को सामाजिक संदेश दिया। बौद्धिक सत्रों की कड़ी में स्वावलंबन से शौर्य और भीतर का रण, आंतरिक मोर्चे की चुनौती जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने देश की सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियों पर गंभीर विमर्श किया।

विरासत से रूबरू हुआ युवा भारत
परिसर में सजी शंख, वीणा और अयोध्या राम मंदिर की झांकियों के साथ- साथ छत्रपति शिवाजी महाराज, रानी लक्ष्मी बाई, महाराणा प्रताप और गुरु गोबिंद सिंह जैसे महापुरुषों की शौर्य गाथाओं ने युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ा। वीर महापुरुषों के अदम्य साहस को दर्शाती इस प्रदर्शनी के साथ सेल्फी लेने के लिए युवाओं की भारी भीड़ उमड़ी।

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