'रिजीम चेंज की बात करना राष्ट्रविरोधी कृत्य', सरदार पटेल की जयंती पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का तीखा हमला
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'रिजीम चेंज' की बात करना लोकतंत्र को सीधी चुनौती और राष्ट्रविरोधी कृत्य है। ...और पढ़ें

श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह: फोटो: काॅलेज
मुकेश ठाकुर, पश्चिमी दिल्ली। रिजीम चेंज की बात करना लोकतंत्र को सीधी चुनौती देने जैसा और राष्ट्रविरोधी कृत्य है। भारत में सरकारें चुनाव और जनमत से बनती हैं, न कि सड़कों पर हिंसा और अराजकता फैलाकर।
यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को पंजाबी बाग स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर भारत भारती संस्था की ओर से आयोजित राष्ट्रीय समारोह में कही।
हिंसा से नहीं, चुनाव से बदलती हैं सरकारें
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था है। ऐसे में सरकार बदलने के लिए हिंसा और अराजकता का रास्ता अपनाने की बात करना लोकतंत्र को चुनौती देने जैसा है।
भारत को तोड़ने की सोच रखने वालों को चेतावनी देते हुए उन्होंने हैदराबाद के निजाम का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उसके प्रमुख ने डेढ़ करोड़ हिंदुओं का विनाश करने की धमकी दी थी, लेकिन लौह पुरुष सरदार पटेल के दृढ़ संकल्प के आगे उन्हें घुटने टेकने पड़े।
राष्ट्रीय एकता के संकल्प को आगे बढ़ाया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उसी धरती पर जन्मे हैं, जहां सरदार पटेल का जन्म हुआ था। उन्होंने लौह पुरुष की विशाल प्रतिमा स्थापित करने के साथ उनके राष्ट्रीय एकता के संकल्प को भी आगे बढ़ाया है।
देश की अखंडता के लिए जो भी कुर्बानी देनी पड़े, भाजपा की सरकार पीछे नहीं हटेगी।
संत तुकाराम महाराज के दृष्टांत का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि असली हीरा हथौड़े की चोट सहकर भी अपनी चमक बरकरार रखता है, जबकि नकली बिखर जाता है। इसी तरह चुनौतियों के सामने अडिग रहना ही असली वीरता है और सरदार पटेल इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
पटेल और मुखर्जी ने रखा राष्ट्रहित सर्वोपरि
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरदार पटेल और डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दोनों ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। डाॅ. मुखर्जी ने भी राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का दायित्व निभाया।
उन्होंने 1928 के बारदोली सत्याग्रह का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां की महिलाओं ने वल्लभभाई पटेल को सरदार की उपाधि दी थी। पटेल किसी समुदाय के विरोधी नहीं थे। वे स्वयं को नेता नहीं, देश का अनुशासित सैनिक मानते थे। उनका जीवन मंत्र था-राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।