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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भारत में होगा विश्व सीफूड कांग्रेस 2026 का आयोजन, जल कृषि में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है इंडिया

Published: Sat, 27 Sep 2025 02:00 AM (IST)

भारत 2026 में विश्व सीफूड कांग्रेस का आयोजन करेगा जो चेन्नई में होगा। यह कांग्रेस भारत के सीफूड उद्योग की ...और पढ़ें

भारत में होगा विश्व सीफूड कांग्रेस 2026 का आयोजन
भारत में होगा विश्व सीफूड कांग्रेस 2026 का आयोजन

HighLights

  1. भारत में होगा विश्व सीफूड कांग्रेस 2026 का आयोजन |
  2. वैश्विक सीफूड निर्यात में भारत छठा सबसे बड़ा देश |
  3. चेन्नई में पहली बार आयोजित होगी कांग्रेस |

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। विश्व सीफूड कांग्रेस 2026 का आयोजन भारत में किया जाएगा। यह आयोजन भारत के सीफूड क्षेत्र की वैश्विक स्तर पर बढ़ती भूमिका और नेतृत्व को रेखांकित करेगा। 1999 में शुरू हुई यह द्विवार्षिक कांग्रेस अब तक कनाडा, नीदरलैंड, आस्ट्रेलिया, आयरलैंड, मोरक्को, अमेरिका, यूके, आइसलैंड, मलेशिया और पुर्तगाल जैसे देशों में आयोजित हो चुकी है। अब यह बार पहली बार चेन्नई में आयोजित की जाएगी।

भारत मंडपम में चल रही चौथी वर्ल्ड फूड इंडिया के बीच में यह जानकारी शुक्रवार को इंटरनेशनल एसोसिएशन आफ फिश इंस्पेक्टर्स (आइएएफआइ) के अध्यक्ष डा इयान गोल्डिंग और पीडीए वेंचर्स लिमिटेड के अध्यक्ष प्रदीप देवैया ने साझा की। उन्होंने बताया कि वैश्विक सीफूड निर्यात में भारत छठा सबसे बड़ा व जल कृषि में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

उन्होंने बताया कि विश्व सीफूड कांग्रेस में व्यापार प्रदर्शनी, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परीक्षण, सर्टिफिकेशन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन होगा। इसके अलावा पोषण और आजीविका में सीफूड व्यापार की भूमिका, जलीय उत्पादों की प्रोसेसिंग तकनीक और वैज्ञानिक उपयोग मत्स्य और एक्वाकल्चर में सर्कुलर इकोनामी की चुनौतियां विषयक सत्र, तकनीकी प्रस्तुतियां, कार्यशालाएं, पैनल चर्चा होंगी।

डा इयान ने कहा कि विश्व सीफूड कांग्रेस विज्ञान का भारत में आयोजन एशिया और अफ्रीका जैसे विकासशील देशों के लिए वैश्विक व्यापार में भागीदारी बढ़ाने का एक सशक्त मंच होगा। वहीं देवैया ने कहा कि यह हमारे समुद्री खाद्य क्षेत्र की क्षमता को दुनिया के सामने लाने, वैश्विक साझेदारियाँ विकसित करने और स्थायी तकनीकों पर चर्चा करने का ऐतिहासिक अवसर है।