नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली में वाहन चलाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) अनिवार्य दस्तावेज है, लेकिन वाहन चालक इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। स्थिति ये है कि जुलाई की अपेक्षा अगस्त में जहां प्रमाण पत्र हासिल करने वालों की संख्या बढ़नी चाहिए थी, वह उल्टे घट गई है। पिछले साल जुलाई में 4.4 लाख और अगस्त में छह लाख पीयूसी बने थे। मगर इस साल जुलाई में 3,97,143 और अगस्त में 3,71,450 पीयूसी जारी हुए हैं। यानी अगस्त में जुलाई से भी 25,693 कम। पिछले साल के आंकड़ों से तुलना करें तो पिछले साल की तुलना में इन दोनों ही माह में कम रहे हैं। इस साल एक और बात भी सामने आ रही है कि वाहन प्रदूषण जांच में फेल भी हो रहे हैं।

जुलाई में 3,71,960 गाडि़यों की प्रदूषण जांच हुई, जिसमें से 3,61,144 गाडि़यां पास हुई और 10816 गाडि़यां फेल। फेल होने वालों में चार पहिये वाली गाडि़यों का नंबर 3.76 फीसद रहा, दो पहिया 2.78 फीसद और तिपहिया 0.11 फीसद फेल हुए। वहीं इस महीने में डीजल की 25,183 गाडि़यों की प्रदूषण जांच हुई, जिसमें 607 यानी 2.35 फीसद गाडि़यां प्रदूषण जांच के नियमों पर खरी नहीं उतरी। वहीं अगस्त में 3,40,889 गाडि़यों की प्रदूषण जांच हुई, जिसमें से 3,29,785 गाडि़यां पास हुई और 11104 गाडि़यां फेल हुई। वहीं इस महीने में फेल होने वाली गाडि़यों में चार पहिये वाली गाडि़यों का फीसद 3.95 रहा, जबकि दो पहिया 3.07 और तिपहिया 0.16 फीसद फेल हुए।

डीजल की 30561 गाडि़यों में से 3.36 फीसद गाडि़यां जांच में फेल हुईं।सितंबर में अभी तक 3,58 लाख से ज्यादा गाडि़यों की जांच हो चुकी है। चार पहिये वाली गाडि़यों के आंकड़े को देखें तो 5.06 फीसद गाडि़यां जांच में फेल रही है। दो पहिया का नंबर 4.11 फीसद और तिपहिया का 0.16 फीसद है। डीजल की अभी तक 30 हजार से ज्यादा गाडि़यों की जांच हो चुकी है और 5 फीसद से ज्यादा गाडि़यां फेल रही है।

हालांकि माना जा रहा है कि सितंबर के अंत से अगले महीनों में पीयूसी की संख्या बढ़ सकती है। बता दें कि पीयूसी के बिना गाड़ी चलाने वालों को लेकर अब परिवहन विभाग और सख्त हो गया है। अब जुर्माने के साथ-साथ चालकों का लाइसेंस भी तीन माह के लिए निलंबित होगा। वैध पीयूसी न रखने पर छह महीने तक की कैद या दस हजार रुपये तक जुर्माना या फिर दोनों एक साथ हो सकते हैं। दिल्ली में 973 पीयूसी सेंटर हैं।

 

Edited By: Vinay Kumar Tiwari