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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 16, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दिल्ली विधानसभा में हंगामा, मार्शलों ने कपिल मिश्रा को सदन से निकाला बाहर

By Amit MishraEdited By:
Published: Tue, 16 Jan 2018 04:32 PM (IST)Updated: Wed, 17 Jan 2018 07:26 AM (IST)

कपिल मिश्रा काम रोको प्रस्ताव लाने की मांग कर रहे थे। कपिल सुशील गुप्‍ता का बैनर लेकर सदन में पहुंचे ...और पढ़ें

दिल्ली विधानसभा में हंगामा, मार्शलों ने कपिल मिश्रा को सदन से निकाला बाहर
दिल्ली विधानसभा में हंगामा, मार्शलों ने कपिल मिश्रा को सदन से निकाला बाहर

नई दिल्ली [जेएनएन]। दिल्ली विधानसभा के तीन दिवसीय शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन भी हंगामे के साथ शुरू हुआ। हंगामे की वजह से विधानसभा अध्यक्ष के आदेश पर मार्शलों ने विधायक कपिल मिश्रा और मनजिंदर सिंह सिरसा को सदन से बाहर निकाल दिया।

कपिल मिश्रा काम रोको प्रस्ताव लाने की मांग कर रहे थे। कपिल 'आप' के राज्यसभा सदस्य सुशील गुप्‍ता का बैनर लेकर सदन में पहुंचे और सत्र शुरू होने पर स्‍पीकर से चर्चा कराने की मांग करने लगे। इस दौरान विधानसभा स्‍पीकर ने कई बार उन्‍हें शांत बैठने के लिए कहा, लेकिन कपिल के न मानने पर मार्शलों को उन्‍हें सदन से बाहर करने का आदेश दिया गया। 

कपिल का अटैक 

कपिल मिश्रा पर कार्रवाई का सिरसा ने विरोध किया। स्पीकर ने सिरसा को लेकर रूलिंग दी कि सिरसा ने अध्यक्ष के आदेश के अमल में व्यवधान पहुंचाया है, इसलिए इस मामले को विशेषाधिकार समिति को सौंपा जा रहा है। सदन से बाहर आने पर कपिल ने कहा कि केजरीवाल ने कांग्रेस के व्यक्ति को राज्यसभा भेजा है। वे इस पर जवाब मांगते रहेंगे। उन्होंने केजरीवाल को कांग्रेस का एजेंट भी कहा। 

हंगामेदार रहा सत्र का पहला दिन 

गौरतलब है कि विधानसभा सत्र के पहले दिन भी सदन में जमकर हंगामा हुआ था। दिल्ली में चल रही सीलिंग की कार्रवाई से व्यवसायियों की नाराजगी का खौफ दिल्ली विधानसभा सत्र में दिखा। सत्ता पक्ष और विपक्ष सीलिंग का विरोध कर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे। मगर पूरे दिन की कार्यवाही में नतीजा शून्य निकला। 

वेल में आ गए सत्ता पक्ष के विधायक

पहले दिन दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष चौ. प्रेम सिंह को श्रद्धांजलि देने के बाद आगे की कार्यवाही होने से पहले ही सत्ता पक्ष के विधायक साथ लाई गई तख्तियां लेकर खड़े हो गए और सीलिंग को लेकर शोर-शराबा करने लगे। वे इसके लिए तीनों नगर निगमों पर आरोप लगाने लगे। भाजपा के खिलाफ तरह-तरह के नारे लगाए गए। इसके पीछे भ्रष्टाचार भी बताया गया। हंगामा करते हुए सत्ता पक्ष के विधायक वेल में आ गए। विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभा रहे भाजपा के चारों विधायक भी अपनी सीटों पर खड़े होकर सत्ता पक्ष पर आरोप लगाते रहे। मगर कम संख्या होने के कारण उनकी आवाज नहीं सुनी जा सकी। हंगामा होने के चलते विधानसभा अध्यक्ष ने 15 मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया।  

वेल में पहुंच गए विपक्षी

दोबारा कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा होने लगा। सत्ता पक्ष के सदस्य शांत होकर अपनी-अपनी सीटों पर बैठ गए। मगर विपक्ष अपनी बात पर अड़ा रहा। विपक्ष की मांग थी कि 351 सड़कों को अधिसूचित नहीं किए जाने पर सदन में नियम 54 के तहत चर्चा हो। सरकार बताए कि इन सड़कों को अधिसूचित क्यों नहीं किया गया। जिससे इन सड़कों पर कारोबार करने वालों को बचाया जा सके। अपनी मांग करते हुए विपक्ष के सदस्य अध्यक्ष के सामने वेल में पहुंच गए। हंगामा नहीं रुका तो 15 मिनट के लिए फिर से सदन स्थगित हुआ।

बुलाए गए मार्शल

सदन की कार्यवाही शुरू होने पर फिर से विपक्ष ने जोरदार ढंग से अपनी मांग उठाई। हंगामा नहीं रुका तो इस बार 25 मिनट के लिए सदन स्थगित हुआ। इसके बाद जब सदन शुरू हुआ तो फिर से विपक्ष ने अपनी मांग दोहराई। विधानसभा अध्यक्ष ने इस बार वेल में आए विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता सहित चारों सदस्यों को मार्शल बुलाकर बाहर करा दिया।

कन्वर्जन शुल्क का हिसाब

इसके बाद सत्ता पक्ष की ओर से सीलिंग पर जो चर्चा हुई, उसमें भी सीलिंग रोके जाने के लिए समाधान नहीं खोजे गए। सत्ता पक्ष के विधायकों का सीलिंग को लेकर नगर निगमों द्वारा भ्रष्टाचार किए जाने के आरोप पर अधिक जोर रहा। सत्ता पक्ष के विधायकों ने जमा किए गए कन्वर्जन शुल्क का हिसाब मांगा। निगम में सत्तासीन भाजपा से तीनों महापौर व तीनों निगम आयुक्तों तक को सदन में तलब किए जाने की मांग की गई।

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