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    NHAI के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों का हल्लाबोल, टोल टैक्स बढ़ोतरी को लेकर किया विरोध

    Updated: Fri, 04 Apr 2025 01:26 PM (IST)

    एनएचएआई ने देशभर के राजमार्गों पर टोल टैक्स में बढ़ोतरी की है। इस फैसले की ट्रांसपोर्टरों ने आलोचना की है और इसे वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि पहले से ही अधिक टोल वसूला जा रहा है और अब इसमें और बढ़ोतरी की जा रही है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इससे परिचालन लागत बढ़ेगी और महंगाई बढ़ेगी।

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    राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोली वृद्धि को ट्रांसपोर्टरों ने बताया अव्यवहारिक, वापस लेने की मांग। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा देशभर के राजमार्ग खंडों पर टोल शुल्क में बढ़ाेत्तरी के निर्णय की ट्रांसपोर्टरों ने आलोचना की है तथा इसे वापस लेने तथा पूर्व टोल में भी 60 प्रतिशत तक की कटौती की मांग की है।

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    एनएचएआई ने टोल टैक्स में औसतन चार से पांच प्रतिशत की ही वृद्धि की है, लेकिन इसे लेकर लोगों की कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रहा है। खासकर ट्रांसपोर्टर इसे देश की जनता तथा खुद के अंतहीन आर्थिक बोझ बता रहे हैं।

    अधिकतर सड़कें 10 साल का समय कर चुकी पार

    ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों की अधिकतर टोल पहले से ही अधिक वसूली कर चुकी हैं। उनके अनुसार, तय नियम के अनुसार तो टोल टैक्स में 60 प्रतिशत की कटौती की जानी चाहिए थी, जिसमें बढ़ोत्तरी की जा रही है।

    उनके अनुसार, अधिकतर सड़कें 10 वर्ष की अवधि पार कर चुकी है। जबकि निर्माण, रखरखाव व हस्तांतरण बिल्ट आपरेट ट्रांसफर (बीओटी) आधार पर तय अधिकतम वसूली लक्ष्य को आठ वर्ष में ही पूरी कर चुकी है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से ये अभी भी पूरा टोल टैक्स वसूल रही है।

    लगातार बढ़ते टोल टैक्स से परिचालन की लागत में इजाफा

    नियमानुसार, इन्हें अब केवल 40 प्रतिशत ही सड़कों के रखरखाव के लिए टोल टैक्स लेना चाहिए था। सभरवाल ने बताया कि इससे संबंधित उनके संगठन का एक मामला गुजरात हाई कोर्ट में चल रहा है। आल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर के अनुसार, भारी भरकम टोल वसूली आम जनता और परिवहन क्षेत्र के लिए एक अंतहीन आर्थिक बोझ बन गई है।

    सड़क निर्माण के लिए टोल वसूली अस्थाई प्रथा होनी चाहिए थी, लेकिन यह एक स्थायी शोषण प्रणाली के तौर पर विकसित हो गई है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते टोल टैक्स से परिचालन लागत बढ़ती है, जिससे महंगाई में इजाफा होता है। वह भी तब सड़कों की हालत बहुत अच्छी नहीं है।

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