खत्म हुआ सूरजकुंड मेला,18 लाख से ज्यादा पर्यटकों ने किया दीदार; सामानों पर लोगों को मिली बंपर छूट
Surajkund fair Ends सात फरवरी से शुरू हुए सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का समापन रविवार को हुआ। मेले में 18.10 लाख पर्यटकों ने शिरकत की। अंतिम दिन कई शिल्पियों और बुनकरों ने अपने उत्पादों पर 20 से 50 प्रतिशत तक छूट दी। मेले में विभिन्न रंगारंग कार्यक्रमों की धूम रही। कलाकारों ने लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। लेख में पढ़िए पूरी खबर।

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। Surajkund Crafts Mela: सात फरवरी से शुरू हुए सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का समापन बड़े ही खूबसूरत माहौल में किया गया। मेले में विभिन्न रंगारंग कार्यक्रमों की धूम रही। रविवार को दो लाख से अधिक पर्यटक मेेला देखने पहुंचे।
पर्यटन निगम के रिकॉर्ड के अनुसार 17 दिनों में 18.10 लाख पर्यटकों ने मेला देखा। अंतिम दिन होने के कारण कई शिल्पियों और बुनकरों ने अपने-अपने उत्पादों पर 20 से 50 प्रतिशत तक छूट भी दी। सेल का बाजार चलता रहा।
पर्यटक मध्य प्रदेश पवेलियन, ओडिशा पवेलियन तथा गोवा पवेलियन में पर्यटक सेल्फी लेते नजर आए। फूड कोर्ट में आम दिनों की अपेक्षा अधिक रौनक देखने को मिली। मुख्य चौपाल पर दिन भर रंग जमा। चौपाल पर बड़ी संख्या बैठे पर्यटकों ने कार्यक्रम का आनंद लिया।
कलाकारों ने लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की
मेला के अंतिम दिन रविवार को कलाकारों ने पर्यटकों खूब मनोरंजन का किया। छोटी चौपाल पर कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से मन मोह लिया। जब माही वे तेरे वेखन नूं चक चरखा गली दे विच डांवा..मीठे-मीठे पंजाबी व हिंदी गीतों से गायिका सुषमा शर्मा ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के कलाकारों ने दिन भर समां बांधे रखा। झज्जर निवासी व दुबई में रहने वाली करुणा राठौर टीना ने नृत्य के माध्यम से देशभक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम की बेहतरीन प्रस्तुति दी।
गायिका सुषमा शर्मा ने प्रसिद्ध हरियाणवी गीत मेरे सिर पै बंटा टोकणी, मेरे हाथ मैं नेजूं डोल, मैं पतली सी कामणी सुनाया तो युवतियां भी झूमने लगीं। कजरा मोहब्बत वाला, अंखियों में ऐसा डाला, कजरे ने ले ली मेरी जान, हाय रे मैं तेरे कुर्बान गीत को भी पसंद किया गया।
सुरमेदानी वरगा है मेरा माही पंजाबी गीत की मधुर प्रस्तुति पर भी पर्यटक झूम उठे। कुंभ पर उनके गाए गीत बारह बरस के बाद हमारा पावन मेला आया है, गंगा किनारे डुबकी लगाकर जय-जय घोष लगाया है की भी सराहना हुई।
लोक गायक वेद प्रकाश व उनके साथियों के गायन को काफी सराहा गया। यहां हरपाल नाथ की पार्टी ने बीन वादन, ढोल व तूंबा बजाकर मस्त धुनों से पर्यटकों का दिल जीत लिया। निर्भय शंकर ने गिटार वादन सेरंग जमाया। प्रेम देहाती ने पुरानी तर्ज पर आधारित हरियाणवी रागनी सुनाकर लोक संस्कृति की छाप छोड़ी।
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