ताहिर हुसैन की अर्जी पर SC के जजों का अलग-अलग फैसला, एक ने दी जमानत; दूसरे ने खारिज की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले अंतरिम जमानत की मांग करने वाली ताहिर हुसैन की याचिका पर खंडित फैसला सुनाया। एक न्यायाधीश ने जमानत दे दी जबकि दूसरे न्यायाधीश ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इस मुद्दे पर फैसला करने के लिए नई पीठ के गठन के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के समक्ष रखा जाएगा। आगे विस्तार से पढ़िए पूरा मामला।

डिजिटल डेस्क/पीटीआई, नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले अंतरिम जमानत की मांग करने वाली ताहिर हुसैन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने खंडित फैसला सुनाया। एक न्यायाधीश ने जमानत दे दी, जबकि दूसरे न्यायाधीश ने उसकी याचिका खारिज कर दी।
ताहिर हुसैन की याचिका पर आया खंडित फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पूर्व पार्षद और दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत की मांग वाली याचिका पर खंडित फैसला सुनाया। यानी पीठ के दोनों न्यायमूर्ति ने अलग-अलग फैसला सुनाया है।
याचिका को इसलिए किया खारिज
न्यायमूर्ति पंकज मिथल ने हुसैन की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कोई मामला नहीं बनता, जबकि न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा किया जा सकता है।
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इस मुद्दे पर फैसला करने के लिए नई पीठ के गठन के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के समक्ष रखा जाएगा। 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और कई घायल हुए थे।
शरीर पर थे चोटों के 51 निशान
हुसैन इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की मौत से जुड़े फरवरी 2020 के दंगों के एक मामले में आरोपी हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 फरवरी, 2020 को शिकायतकर्ता रविंदर कुमार ने दयालपुर पुलिस स्टेशन को सूचित किया कि उनका बेटा शर्मा 25 फरवरी, 2020 से लापता है। कथित तौर पर उनके पार्थिव शरीर को दंगा प्रभावित क्षेत्र के खजूरी खास नाले से बरामद किया गया था और उनके शरीर पर चोटों के 51 निशान थे।
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