नई दिल्ली, [राहुल सिंह]। राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में इन दिनों ऑक्सीजन और ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर मारामरी मची हुई है। हर कोई एक अदद सिलेंडर के जुगाड़ में लगा हुआ है। इसका फायदा उठाकर बाजार में कुछ लोग दूसरे सिलेंडरों को ऑक्सीजन सिलेंडर बताकर बेच रहे हैं। कुछ सिलेंडर बिक्रेता इन दिनों ऑक्सीजन सिलेंडर के नाम पर कार्बन डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, अमोनिया समेत अन्य गैसों की रिफीलिंग में काम आने वाले सिलेंडर को ऑक्सीजन सिलेंडर बताकर जरूरतमंदों को गुमराह कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरी गैसों को भरने के लिए प्रयोग लाए जाने वाले सिलेंडरों में यदि ऑक्सीजन गैस (प्राणवायु) भरवाई जाए तो वह मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

पहचान बेहद मुश्किल

लोकनायक अस्पताल की इमरजेंसी प्रभारी डॉक्टर रितु सक्सेना का कहना है कि आम लोगों के लिए ऑक्सीजन के सिलेंडर की पहचान करना बेहद मुश्किल है। सिलेंडर खरीदने से पहले डाक्टर या किसी विशेषज्ञ की राय लेना फायदेमंद रहेगा।

उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर की बाडी भूरे रंग की होती है, जबकि उसका ऊपरी हिस्सा सफेद रंग का होता है। इसके अलावा दस्तावेज में ही ऑक्सीजन सिलेंडर व अन्य सिलेंडर की पहचान होना संभव है। उन्होंने कहा कि लोग पंजीकृत दुकान से ही सिलेंडर खरीदें। ऐसे ही किसी भी दुकान या व्यक्ति से सिलेंडर न खरीदें। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन सिलेंडर छह प्रकार के होते हैं, जिनमें अलग-अलग मात्रा में ऑक्सीजन भरी जा सकती है। तकनीकी भाषा में इन्हें एम सीरीज में बांटा गया है।

पेंट करके बेचे जा रहे नाइट्रोजन के सिलेंडर

आजकल ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग इतनी बढ़ गई है कि लोग कोई भी सिलेंडर खरीद ले रहे है, जोकि जानलेवा हो सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अन्य गैस के प्रयोग में आने वाले सिलेंडर में अगर लोग ऑक्सीजन भरवाएंगे तो वह जहरीली हो जाएगी, जिससे मरीज की जान भी जा सकती है। अधिकारियों की मानें इस वक्त लोग नाइट्रोजन के सिलेंडर को सफेद और काले रंग का पेंट करके बेच रहे हैं।

एसडीएम डा. नितिन शाक्या ने बताया कि लोगों की शिकायत के बाद लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं, ऑक्सीजन सिलेंडर की रिफीलिंग करने वाले एजेंसी संचालकों को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि वह ऑक्सीजन सिलेंडर के अलावा किसी अन्य सिलेंडर में ऑक्सीजन न भरें।

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