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    Delhi News: मानहानि केस में मेधा पाटकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी, ये है पूरा मामला

    Updated: Wed, 23 Apr 2025 06:57 PM (IST)

    सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के खिलाफ मानहानि के मामले में गैर-जमानती वारंट जारी हुआ है। उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने 23 साल पहले गुजरात में एक एनजीओ प्रमुख रहने के दौरान यह मामला दर्ज कराया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने पाटकर को दोषी ठहराया था और आठ अप्रैल को उन्हें अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा कर दिया था।

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    मेधा पाटकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। उप-राज्यपाल वीके सक्सेना की ओर से दर्ज कराए गए 23 साल पुराने मानहानि के मामले में प्रोबेशन बॉन्ड जमा न करने पर साकेत स्थित सत्र न्यायालय ने बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है।

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    पाटकर ने हाईकोर्ट में प्रोबेशन बॉन्ड जमा करने की कार्रवाई पर दो सप्ताह तक रोक लगाने की याचिका लगाई थी, जिसे मंगलवार को कोर्ट ने अस्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट जाने के निर्देश दिया था।

    23 पहले दर्ज हुआ था मामला

    वीके सक्सेना ने 23 साल पहले गुजरात में एक एनजीओ प्रमुख रहने के दौरान यह मामला दर्ज कराया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने 70 वर्षीय पाटकर को मानहानि के मामले में दोषी ठहराया था और आठ अप्रैल को उन्हें अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा कर दिया था। साथ ही उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने की शर्त भी रखी थी।

    23 अप्रैल को मामला पाटकर की उपस्थिति, प्रोबेशन बांड जमा करने और जुर्माना राशि जमा करने के लिए सूचीबद्ध किया गया था। वीके सक्सेना के वकील एडवोकेट गजिंदर कुमार ने कहा कि पाटकर न तो अदालत में पेश हुईं और न ही उन्होंने अदालत के निर्देशों का पालन किया।

    इस मामले में दिल्ली पुलिस आयुक्त के माध्यम से पाटकर के खिलाफ एनबीडब्ल्यू (गैर जमानती वारंट) जारी किया गया है। कोर्ट ने पाया कि स्थगन की मांग करने के लिए दोषी द्वारा दायर आवेदन में पर्याप्त आधार नहीं है।

    गजिंदर कुमार ने कहा कि यदि दोषी तीन मई को सुनवाई की अगली तारीख तक अपने आदेश का पालन नहीं करता है, तो अदालत आठ अप्रैल को पारित उदार सजा को बदलने पर विचार करेगी। विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है।

    सजा पर 30 मई 2024 को पूरी हो गई थी बहस 

    सक्सेना ने 24 नवंबर, 2000 को उनके खिलाफ जारी मानहानिकारक प्रेस विज्ञप्ति के लिए पाटकर के खिलाफ राष्ट्रीय नागरिक स्वतंत्रता परिषद के अध्यक्ष के रूप में मामला दायर कराया था। सजा पर बहस 30 मई 2024 को पूरी हो गई थी, जिसके बाद सजा की मात्रा पर फैसला सात जून 2024 को सुरक्षित रखा गया था।

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    एक जुलाई को अदालत ने उसे पांच महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई, जिसके बाद पाटकर ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।