नई दिल्ली, एएनआइ। देश-दुनिया की जानी-मानी फार्मा कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर मालविंदर सिंह ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआइआर को रद करने की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यहां पर बता दें कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 740 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में फार्मा कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शि¨वदर मोहन सिंह सहित चार लोगों को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए अन्य लोगों में रेलिगेयर के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी, कवि अरोड़ा और अनिल सक्सेना शामिल हैं।

आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक धन का गलत तरीके से अपनी कंपनियों में निवेश किया। शि¨वदर के छोटे भाई माल¨वदर मोहन सिंह के खिलाफ भी लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। आर्थिक अपराध शाखा के एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. ओपी मिश्र के मुताबिक, शिविंदर मोहन साउथ एक्स पार्ट-2, सुनील गोधवानी असोला फतेहपुर बेरी, रवि अरोड़ा गुरुग्राम व अनिल सक्सेना नोएडा सेक्टर-104 में रहते हैं।

बता देंकि कई महीने तक मामले की जांच के बाद डीसीपी वर्षा शर्मा के नेतृत्व में एसीपी अमरदीप सहगल, इंस्पेक्टर संजीव धोढ़ी, उमेश शर्मा, नितिन कुमार की टीम ने चारों को पूछताछ के बहाने मंदिर मार्ग स्थित आर्थिक अपराध शाखा के मुख्यालय में बुलाकर गिरफ्तार कर लिया। रेलिगेयर फिनवेस्ट के अधिकारी मंजीत सिंह सूरी ने माल¨वदर, शिविंदर, सुनील व अन्य पर मुकदमा दर्ज कराया था। शिविंदर रेलिगेयर इंटरप्राइजेज में प्रमोटर थे। आरएफएल में भी उनका 85 फीसद शेयर है।

आरोपित सुनील गोधवानी उस अवधि में अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक थे। कवि व अनिल सक्सेना प्रबंधकीय पदों पर थे। अगस्त में प्रवर्तन निदेशालय ने शि¨वदर और मालविंदर के निवास पर छापेमारी की थी। दोनों ने बीते साल फरवरी में फोर्टिस हेल्थकेयर के निदेशक मंडल से इस्तीफा दे दिया था।

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Posted By: JP Yadav

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