नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। रात्रि भत्ता भुगतान के लिए वेतन की सीमा निर्धारित करने के विरोध में देशभर के रेलवे स्टेशन मास्टर शनिवार को 12 घंटे की भूख हड़ताल पर रहे, लेकिन ट्रेनों के परिचालन में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी। पिछले लगभग एक पखवाड़े से स्टेशन मास्टर रेलवे बोर्ड के फैसले का विरोध कर रहे हैं। मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (आइस्मा) के पदाधिकारियों का कहना है कि रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार 43600 रुपये तक मूल वेतन वालों को ही रात्रि भत्ता दिया जाएगा। बोर्ड के इस आदेश का देशभर के 39000 स्टेशन मास्टर विरोध कर रहे हैं। सबसे पहले आइस्मा के पदाधिकारियों ने रेलवे बोर्ड के अधिकारियों को ईमेल भेजकर विरोध जताया था। दूसरे चरण में रात की ड्यूटी के दौरान में मोमबत्ती जलाकर और तीसरे चरण में काली पट्टी बांधकर विरोध जताया गया। बावजूद रेल प्रशासन ने उनकी मांग नहीं मानी और अगले माह रात्रि भत्ता भुगतान में कटौती करने का आदेश जारी कर दिया गया, इसलिए शनिनवार को सभी स्टेशन मास्टर उपवास भूखे रहकर काम किया।

उनका कहना है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। अबतक रेल परिचालन में किसी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं होने दी गई है, इसलिए सरकार को उनकी मांग पर विचार करना चाहिए। आंदोलन के दौरान कोरोना से बचाव के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देश का पालन किया जा रहा है।

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