'अचानक हुई हलचल, पता चला राहुल गांधी आए हैं...', मरीजों ने बताया- कांग्रेस नेता से कैसी थी मुलाकात
राहुल गांधी ने एम्स में मरीजों और तीमारदारों से मुलाकात की। उन्होंने उनकी समस्याओं को सुना और आश्वासन दिया कि सुधार किए जाएंगे। तीमारदारों ने बताया कि उन्हें महीनों से इसी जगह पर रहने और सोने को मजबूर हैं। इलाज के लिए तारीख मिलती रहती है। नौकरी-मजदूरी छोड़कर यहां रह रहे हैं। नहाने-धोने के लिए कोई जगह नहीं है इससे महिलाओं को खासी परेशानी होती है।

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। हम लोग सो रहे थे। कुछ सोने की तैयारी में थे। तभी अचानक हलचल हुई। देखते ही देखते कई लोग वहां पहुंच गए। कुछ लोग फोटो खींचने लगे तो कुछ वीडियो बनाने लगे। पूछने पर पता चला कि कांग्रेस सांसद व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आए हैं। उन्होंने कुछ तीमारदारों और मरीजों से खुद बात की। हम लोग भी अपनी समस्या लेकर उनसे मिले।
उन्होंने आश्वासन तो दिया है कि सुधार करेंगे। अब कुछ राहत मिले यही उम्मीद है। एम्स में बृहस्पतिवार रात को राहुल गांधी से मिले तीमारदारों ने ये सब बयां किया। राहुल गांधी रात करीब 10 बजे अचानक एम्स के बाहर फुटपाथ और सबवे पर सो रहे मरीजों व तीमारदारों के बीच पहुंचे और उनसे हाल-चाल जान बातचीत की।
महीनों से इसी जगह पर रहने व सोने को मजबूर: तीमारदार
दैनिक जागरण से बातचीत में राहुल गांधी से मिले तीमारदारों ने बताया कि वे महीनों से इसी जगह पर रहने व सोने को मजबूर हैं। इलाज के लिए तारीख मिलती रहती है। नौकरी-मजदूरी छोड़कर यहां रह रहे हैं। नहाने-धोने के लिए कोई जगह नहीं है, इससे महिलाओं को खासी परेशानी होती है। राहुल गांधी आश्वासन देकर गए हैं तो शायद कुछ हो।
कांग्रेस पार्टी ने कई तस्वीरें की साझा
हालांकि कुछ तीमारदारों ने कहा कि उनका आना सिर्फ वोट के लिए ही था। इसे लेकर कांग्रेस पार्टी ने कई तस्वीरें इंटरनेट मीडिया पर साझा की। इसमें लिखा था- बीमारी का बोझ, ठिठुराने वाली सर्दी, और सरकारी असंवेदनशीलता - आज एम्स के बाहर उन मरीजों और उनके परिवारों से मिला, जो दूर-दराज से इलाज की आस में आए हैं।
इलाज की राह में वो सड़कों, फुटपाथ और सब-वे पर सोने को मजबूर हैं - ठंडी जमीन, भूख, और असुविधाओं के बीच भी बस उम्मीद की एक लौ जलाए बैठे हैं। केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों, जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह से नाकाम रही हैं।
तीमारदारों की परेशानी
पत्नी को लीवर का कैंसर है। करीब तीन महीने से इलाज के लिए भटक रहा हूं। आरएमएल ने एम्स रेफर किया है। ड्रावर का काम करता हूं और तीन महीनों से काम छोड़कर इलाज के लिए भटक रहे हैं। मेरा फोन भी चोरी हो गया है। राहुल गांधी को सारे पर्चे दिखाए हैं। उन्होंने कहा है मदद करेंगे। उम्मीद है हमें इलाज मिले जिससे जान बच सके। -ब्रिजेश, तीमारदार
बेटे का हार्ट ट्रांसप्लांट होना है। एक महीने से यहां रहने को मजबूर हूं। इलाज के लिए तारीख ही मिले जा रही है। कोई ठीक से कुछ बताने वाला भी नहीं है। राहुल गांधी करीब 5-10 मिनट रुके थे लोगों की बातें सुनीं। हमें कहा था कल तक मदद हो जाएगी। अभी तो कुछ नहीं हुआ है। चुनाव है इसलिए वोट मांगने ही आए होंगे। -राजेश, तीमारदार
13 साल की बेटी को ब्लड कैंसर है। एक महीने से यहां रहने को मजबूर हूं। नालंदा, पटना, बिहार के कई अस्पतालों में जाने के बाद यहां रेफर किया है। बाहर सुलभ शौचालय में जाने नहीं देते हैं। इस जगह से भी लोग भगा देते हैं। राहुल गांधी से मिलकर समस्या बताई है। उम्मीद है बेटी को इलाज मिले और वो ठीक हो जाए। -आशा देवी, तीमारदार
बच्चे को ट्यूमर का इलाज कराने के लिए करीब दो महीनों से यहां आया हुआ हूं। साथ में छोटी बच्ची और मां भी है। नहाने- शौचालय जाने के लिए हमारे पास कोई जगह नहीं है इससे काफी परेशानी होती है। मजदूरी करता था काम धंधा छोड़कर यहां हूं। आश्वासन मिला है अब समस्या कोई दूर करे राहत मिले। - टुनटुन, तीमारदार
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