नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने 25 सितंबर को अपने 'मन की बात' (Mann Ki Baat) कार्यक्रम में गुजरात के सूरत की रहने वाली अन्वी के बारे में बताया। डाउन सिंड्रोम से पीड़ित अन्वी की जिंदगी योग ने पूरी तरह से बदल दी। वह इसी महीने ही पीएम मोदी से दिल्ली में मिली थीं। अन्वी को लोग रबर गर्ल (Rubber Girl) के नाम से भी जानते हैं। पीएम मोदी ने अन्वी से हुई मुलाकात को याद करते हुए कहा कि वो डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हैं। वो हार्ट की बीमारी से भी जूझ रही हैं। तीन महीने के दौरान उन्हें ओपन हार्ट की सर्जरी से गुजरना पड़ा था।

पीएम मोदी ने कहा कि उनके माता-पिता ने हार न मानते हुए अन्वी को छोटी छोटी बातें सिखाना शुरू किया। उन्होंने अन्वी को योग सीखने के लिए प्रेरित किया। डाउन सिंड्रोम की वजह से वो अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाती थीं। अब वो योग कर रही हैं और देशभर के योग कंपटीशन में मेडल जीत रही हैं। योग ने अन्वी को नया जीवन दे दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि लोगों को योग का सामर्थ्य देखना है तो अन्वी को देख सकते हैं। वह उनसे काफी कुछ सीख सकते हैं।

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डाउन सिंड्रोम से हैं पीड़ित, पैरों पर नहीं हो पाती थीं खड़ी

गुजरात के सूरत की रहने वाली अन्वी 14 साल की हैं। अन्वी 75 फीसदी बौद्धिक अक्षमता के साथ डाउन सिंड्रोम से पीड़ित है। योग अन्वी के जीवन में सभी बाधाओं और चुनौतियों से लड़ने का काम कर रहा है। योगाभ्यास से दवाओं पर निर्भरता कम हो गई। दरसअल अन्वी Mitral Valve लीकेज की समस्या से जूझ रही है। उसकी बड़ी आंत में भी दिक्कत है साथ ही अन्वी ठीक से बोल नहीं पाती है।

पिता बोले- पैरों से कंधे छूकर सोती थी अन्वी

10 सितंबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान अन्वी के पिता विजय जंजारुकिया ने कहा, "एक दिन मैंने और पत्नी को पता चला कि वह अपने पैरों से कंधों को छूकर सोती है, क्योंकि इससे उसे दर्द से राहत मिलती है। यह देखकर हमने एक बार के लिए सारी उम्मीद खो दी थी। उस दिन मैंने उसके शरीर में लचीलापन देखा और उसे योग करने के लिए प्रोत्साहित किया।"

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बोलने में भी होती है दिक्कत

उन्होंने कहा कि योग करने से दवाओं पर अन्वी निर्भरता कम हुई है। उसकी उनकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी और वह इस समय माइट्रल वॉल्व लीकेज से पीड़ित हैं। 21 ट्राइसॉमी (डाउन सिंड्रोम) और कठोर वसंत रोग के कारण उसे बड़ी आंत में विकलांगता है। साथ ही बोलने में भी दिक्कत होती है।

जीता था राष्ट्रीय बाल पुरुष्कार

अन्वी की मां अवनि जंजारुकिया ने बताया कि उनकी बेटी को योग ने नया जीवन दान दिया है। हर दिन वह सुबह और शाम एक घंटे योग का अभ्यास करती है। उसने कई प्रतियोगिताओं में सामान्य बच्चों के साथ हिस्सा लिया है और कई पुरस्कार भी जीते हैं। अन्वी ने इस साल 24 जनवरी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार जीता था।

क्या है डाउन सिंड्रोम?

डाउन सिंड्रोम के साथ जन्मे बच्चे देखने में तो अलग लगते ही हैं, साथ ही इनका मानसिक विकास भी धीमी गति से होता है। इन बच्चों को कुछ कई तरह की सेहत संबंधी परेशानियों का भी खतरा रहता है। लेकिन यह जरुरी नहीं। कई बच्चे एकदम हेल्दी होते हैं। डाउन सिंड्रोम को 'ट्राइसोमी 21' के नाम से भी जाना जाता है।

डाउन सिंड्रोम के कारण

नॉर्मली बच्चा 46 क्रोमोसोम के साथ पैदा होता है। 23 क्रोमोसोम उसे अपने पिता से और 23 क्रोमोसोम उसे अपनी मां से मिलते हैं। डाउन सिंड्रोम की स्थिति तब होती है जब माता या पिता अतिरिक्त क्रोमोसोम का योगदान करते हैं। जब बच्चे में ये अतिरिक्त 21वां क्रोमोसोम आ जाता है तो उसकी बॉडी में इनकी संख्या 46 से बढ़कर 47 हो जाती है जो डाउन सिंड्रोम की वजह बनता है।

(फोटो- एएनआई&बीजेपी ट्विटर)

Edited By: Geetarjun

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