'OPD में इलाज के लिए रात में रोड पर नहीं रहते मरीज', Rahul Gandhi की वीडियो वायरल होने के बाद Delhi AIIMS का दावा
Delhi AIIMS एम्स दिल्ली ने राहुल गांधी के वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए दावा किया है कि अब मरीजों को ओपीडी इलाज के लिए रात में सड़क पर नहीं रहना पड़ता। सीआरपीएफ की मदद से ट्रॉमा सेंटर के पास आश्रय शिविर बनाया गया है जहां 250 मरीजों को ठहराया जा सकता है। साथ ही एम्स के चार विश्राम सदन भी हैं जहां 500 से अधिक मरीज ठहर सकते हैं।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। delhi aiims Rahul Gandhi Video: लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का एम्स के बाहर सब-वे में बैठे मरीजों से मुलाकात का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने क बाद एम्स प्रशासन ने दावा किया है कि ओपीडी में इलाज के लिए अब मरीज रात में रिंग रोड की सर्विस लेन में नहीं रहते।
सीआरपीएफ की मदद से ट्रामा सेंटर के नजदीक बने आश्रय कैंप में प्रतिदिन 225-250 मरीजों को ठहराया जा रहा है और उन्हें निश्शुल्क भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इस वजह से आठ दिन में 1,777 मरीज आश्रय कैंप में ठहराए गए हैं।
500 से अधिक मरीज ठहरे-एम्स
साथ ही एम्स के अपने चार विश्राम सदन भी हैं। उनमें भी 500 से अधिक मरीज ठहरे हैं। एम्स के बाहर सब-वे में रहने वाले सभी एम्स के मरीज हों, यह जरूरी नहीं है। कुछ लोग निश्शुल्क भोजन व कंबल के लिए वहां बैठे रहते हैं।
एम्स के मीडिया डिवीजन की प्रभारी डा. रीमा दादा ने कहा, आश्रय कैंप में 1,500 बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा एम्स के चार विश्राम सदन में अभी 559 बेड उपलब्ध हैं। जरूरतमंद मरीज डॉक्टर से पर्ची पर विश्राम सदन में ठहरने की अनुशंसा कराकर रुक सकते हैं।
राहुल आपके हैं pic.twitter.com/7HqHI6bheY
— Congress (@INCIndia) January 16, 2025
उन्होंने बताया कि अंसारी नगर पश्चिम में मेगा विश्राम सदन बनेगा, जिसमें दो हजार बेड की व्यवस्था होगी। साथ ही एम्स प्रशासन का कहना है कि अतिरिक्त विश्राम सदन के निर्माण के लिए पड़ोसी राज्यों की सरकार से जमीन उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
हर रोज 18 हजार पहुंचते हैं मरीज
डा. रीमा दादा ने कहा कि आश्रय कैंप में ठहराए जाने वाले मरीजों को सुबह एम्स के शटल सेवा से ओपीडी में पहुंचाया जाता है, ताकि उनका इलाज हो सके। प्रतिदिन अस्पताल में करीब 18 हजार मरीज पहुंचते हैं।
दो-तीन वर्षों में एम्स का बहुत विस्तार हुआ है। इससे इलाज में वेटिंग कम हुई है। एम्स में सुविधाओं के विस्तार के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। कई ओपीडी रात आठ से बजे तक चलती है।
हमें नहीं पता कि सब-वे में बैठे मरीज एम्स के ही हैं या नहीं। एम्स को एक प्राथमिक सेंटर समझकर नजला बुखार जैसे हल्की बीमारियों के मरीज भी पहुंच जाते हैं। एम्स में सिर्फ गंभीर बीमारियों के मरीज पहुंचने चाहिए।
13 साल की बेटी को ब्लड कैंसर है। एक महीने से यहां रहने को मजबूर हूं। कई अस्पतालों में जाने के बाद यहां रेफर किया है। बाहर सुलभ शौचालय में जाने नहीं देते हैं। इस जगह से भी लोग भगा देते हैं। राहुल गांधी को समस्या बताई है। उम्मीद है बेटी को इलाज मिले। - आशा देवी, तीमारदार
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