क्या है उल्लास योजना? 80 साल के बुजुर्गों समेत 5000 निरक्षरों ने दी परीक्षा, पास करने पर संवर जाएंगी जिंदगी!
80 वर्ष की आयु पार करने के बाद भी फरीदाबाद के बुजुर्गों ने साक्षरता हासिल करने के लिए उल्लास योजना के तहत परीक्षा दी। 100 केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में 5000 से अधिक निरक्षर लोगों ने भाग लिया। शिक्षा की अहमियत को समझते हुए ये बुजुर्ग कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने के लिए दृढ़ हैं।
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। पढ़ना सभी के लिए जरूरी है, लेकिन समय बीतने के बाद पढ़ाई का महत्व समझ आता है। जो लोग कभी स्कूल नहीं जा पाए, उनके अंदर आज ही शिक्षित होने की लालसा है। इनका कहना है कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती, कठिन परिस्थितियों के कारण बचपन में स्कूल नहीं जा पाए।
लेकिन अब वह बुढ़ापे में शिक्षा प्राप्त करने का सपना पूरा करेंगे। 80 वर्षीय बुजुर्ग शिक्षा के महत्व को जानते हैं और साक्षर बनना चाहते हैं। रविवार को जिले के 300 से अधिक बुजुर्गों ने उल्लास योजना के तहत पहले चरण की परीक्षा दी। इस परीक्षा में खास तौर पर वे लोग हिस्सा ले रहे हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़ दी थी।
100 सरकारी स्कूलों में परीक्षा आयोजित
रविवार को उल्लास योजना के तहत जिले के 100 सरकारी स्कूलों में परीक्षा का पहला चरण आयोजित किया गया। इसमें 15 वर्ष से अधिक आयु के 5000 से अधिक निरक्षर लोगों ने सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक शिक्षकों की देखरेख में परीक्षा दी। जो बुजुर्ग चलने-फिरने में असमर्थ थे, उन्हें घर से ही परीक्षा देने की अनुमति दी गई।
पहले चरण में पास होने वाले प्रशिक्षण के बाद दूसरे चरण की परीक्षा देंगे। योजना के तहत दोनों चरण पास करने वालों को उनकी रुचि के अनुसार, कोर्स कराए जाएंगे। पढ़ाई के बाद उन्हें कम ब्याज दर पर बैंक से लोन दिलाकर रोजगार स्थापित करने में मदद की जाएगी।
जिले में 15 हजार निरक्षरों को पहले से ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। परीक्षा परिणाम तीन दिन बाद घोषित किया जाएगा। परिणाम घोषित होने के बाद निरक्षरों के लिए कक्षाएं लगाई जाएंगी।
जब मैं पढ़ने की उम्र में थी, तब हालात सामान्य नहीं थे। पढ़ने का सपना हमेशा जिंदा रहता था। एक दिन गली में सरकारी कर्मचारियों ने उल्लास योजना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद मैंने अपना नाम दर्ज करवा लिया। आज मैंने परीक्षा भी दे दी है। मैं साक्षर बनना चाहती हूं। -रानी, 80 वर्ष, निवासी सेक्टर-21
धीरे-धीरे मुझे शिक्षा का महत्व समझ में आया, लेकिन तब तक मेरे कंधों पर बहुत सारी जिम्मेदारियां आ चुकी थीं। यह सोचकर कि शिक्षा के लिए कोई उम्र सीमा नहीं होती, मैंने उल्लास योजना के तहत साक्षर बनने का फैसला किया। आज मैंने परीक्षा का पहला चरण दिया। मुझे शब्दों को एक साथ लिखना था। अगर मैं पास हो गई तो आगे की पढ़ाई करूंगी।
-अंगूरी, 82 वर्ष, जाजरू निवासी
रविवार को 100 केंद्रों पर 5000 से अधिक लोगों ने परीक्षा दी। तीन दिन में परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। पास होने वालों को दूसरे चरण में प्रवेश मिलेगा। फेल होने वालों को दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा। 15000 से अधिक लोगों को पहले से ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
-राहुल कुमार, जिला समन्वयक, उल्लास योजना।
क्या है उल्लास योजना?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के अनुसार, भारत सरकार ने 2022-2027 तक पांच साल की अवधि के लिए न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम नामक एक केंद्र प्रायोजित योजना शुरू की है, जिसे लोकप्रिय रूप से उल्लास (समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने की समझ) के रूप में जाना जाता है।
इस योजना के तहत 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी बुजुर्गों को सशक्त बनाना है, जिन्हें अभी तक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला है। इस योजना के तहत वे अपने पछतावे से मुक्त होकर स्वयं को शिक्षित कर सकेंगे और देश के विकास में अपना योगदान दे सकेंगे।
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