नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली सरकार के लोकनायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) में ऑपरेशन थियेटर ठप हो गए हैं। यहां के जनरल सर्जरी विभाग में मरीजों का ऑपरेशन बंद होने के कगार पर है, क्योंकि ऑपरेशन थियेटर (ओटी) चिकित्सा उपकरणों की कमी से जूझ रहे हैं। इस वजह से मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) के जनरल सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. पवनिंदर लाल ने एक दिसंबर से ओटी बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। उन्होंने दो दिन पहले यह आदेश जारी किया है। लोकनायक अस्पताल एमएएमसी से संबद्ध है।

उन्होंने आदेश में कहा है कि अस्पताल प्रशासन से कई बार कहने के बावजूद ओटी के लिए नए उपकरण नहीं खरीदे गए। ओटी में सुविधाओं का अभाव है। यहां तक कि रोशनी का भी पर्याप्त इंतजाम नहीं है। इस वजह से ऑपरेशन थियेटर में ऑपरेशन करना मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं है। उन्होंने इस फैसले से दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव, एमएएमसी के डीन व लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा निदेशक को अवगत करा दिया है।

लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. किशोर सिंह ने इस आदेश को राजनीतिक करार दिया है।

30 नवंबर तक इसी ऑपरेशन थियेटर में मरीजों की सर्जरी होती रहेगी। इस दौरान यदि समस्या का कोई हल नहीं निकला तो एक दिसंबर से पहली मंजिल पर स्थित चार ऑपरेशन थियेटर बंद कर दिए जाएंगे। ऐसे में मरीजों की मुश्किलें बढ़ना तय है। लोकनायक दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल है। जिसमें करीब दो हजार बेड हैं। बेड क्षमता के लिहाज से यह एम्स व सफदरजंग के बाद दिल्ली का तीसरा बड़ा अस्पताल है। जनरल सर्जरी के ऑपरेशन थियेटर में प्रतिदिन विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 15 से 20 मरीजों की सर्जरी होती है। सर्जरी बंद होने पर मरीज इलाज के लिए भटकने को मजबूर होंगे।

डॉ. पवनिंदर लाल ने अपने आदेश में कहा है कि लैप्रोस्कोपिक सेट, ऑपरेशन टेबल, मरीजों को स्थानांतरित करने के लिए ट्रॉली बेड, पोस्ट ऑपरेटिव आइसीयू बेड, ऑपरेशन थियेटर में सीलिंग लाइट, सी आर्म सहित कई उपकरणों का अभाव है। अस्पताल इन उपकरणों को खरीद पाने में नाकाम रहा है। फिर भी डॉक्टरों पर सर्जरी करने और इलाज की उच्च गुणवत्ता बरकरार रखने का दबाव है। विभाग ने अस्पताल प्रशासन को कई बार उपकरणों की खरीद के लिए प्रस्ताव भेजा। चिकित्सा निदेशक से बातचीत भी की गई। फिर भी उपकरण नहीं खरीदे गए।

छोटी लाइटों के सहारे सर्जरी को मजबूर डॉक्टर

डॉ. पवनिंदर के अनुसार ऑपरेशन थियेटर में बेहतर प्रकाश के लिए बड़ी-बड़ी सीलिंग लाइटें होना जरूरी है। जबकि इस ऑपरेशन थियेटर में चक्के वाली छोटी लाइटें हैं, जिसके सहारे डॉक्टर सर्जरी करते हैं।

लैप्रोस्कोपी का उपकरण लोन पर लेकर चलाया काम

आदेश में कहा गया है कि लैप्रोस्कोपी से संबंधित उपकरण डेमो के रूप में लोन पर लेकर 18 महीने तक मरीजों की सर्जरी की गई है। आखिर इस तरह कब तक काम चलेगा। मौजूदा समय में दूरबीन से सर्जरी लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है। अस्पताल में ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। इस तकनीक से सर्जरी करने पर मरीज जल्द स्वस्थ होकर घर चले जाते हैं। इसलिए मजदूरी करने वाले गरीब मरीजों का समय बचता है। वे जल्दी अपने काम पर लौट पाते हैं। इसके अलावा रेजिडेंट डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए भी लैप्रोस्कोपी सेट का उपकरण होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मजबूर होकर यह आदेश जारी करना पड़ा। वहीं चिकित्सा निदेशक डॉ. किशोर सिंह ने कहा कि अभी वह दिल्ली से बाहर हैं, लेकिन इस घटना के बारे में उन्हें सूचना मिली है। यह राजनीति से प्रेरित है।

मेजर ओटी में नहीं हो पा रही बड़ी सर्जरी

ओटी तकनीशियनों की कमी के कारण चार में से एक ओटी में बड़ी सर्जरी नहीं हो पा रही है। जबकि यह मेजर ओटी है। नियमानुसार इसमें बड़े ऑपरेशन ही होने चाहिए, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण इसमें सिर्फ माइनर ऑपरेशन हो पा रहे हैं।

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Posted By: JP Yadav

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