Heat Wave Action Plan: गर्मी से निपटने की तैयारी, नई दिल्ली में हीट वेव एक्शन प्लान लागू
नई दिल्ली जिला प्रशासन ने गर्मी की चुनौती से निपटने के लिए हीट वेव एक्शन प्लान लागू किया है। इसके तहत नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं 24x7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है और मौसम विभाग की चेतावनियों को तुरंत प्रसारित करने की व्यवस्था की गई है। योजना तीन चरणों में लागू होगी जिसमें ग्रीष्म ऋतु से पूर्व ग्रीष्म ऋतु और ग्रीष्म ऋतु के पश्चात के चरण शामिल हैं।

लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। नई दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी हर दोपहर लोगों को बीमार कर रही है। पिछले कुछ सालों में बढ़ते शहरीकरण, घटती हरियाली, लगातार फैलते कंक्रीट के जाल और जलवायु परिवर्तन के असर ने दिल्लीवासियों के लिए हीट वेव को नई चुनौती बना दिया है।
हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, बिजली-पानी की कमी और श्रमिकों की उत्पादकता में गिरावट जैसे प्रभाव अब आम होते जा रहे हैं। ऐसे में नई दिल्ली जिला प्रशासन ने समय रहते कदम उठाते हुए "हीट वेव एक्शन प्लान" लागू किया है, जो न सिर्फ मौजूदा संकट से निपटने का रोडमैप है, बल्कि दीर्घकालिक समाधान की दिशा में एक ठोस पहल भी है।
इस योजना का उद्देश्य गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों को कम करना, कमजोर समूहों की रक्षा करना और विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, शिक्षा विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, पर्यावरण एजेंसियों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से इस योजना को लागू करने की योजना बनाई गई है।
नई दिल्ली के डीएम और एसडीएम ने कहा, गर्मी को हल्के में न लें। यह अब सिर्फ तापमान का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है, अब हमें नागरिकों की सतर्कता और सहयोग की जरूरत है। एकजुट होकर ही हम गर्मी के खिलाफ इस लड़ाई को जीत सकते हैं।
क्या-क्या किए गए हैं इंतजाम?
जिलाधिकारी की निगरानी में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो पूरे जिले में योजना के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार होगा। 24x7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जो तापमान की निगरानी, सूचना के प्रसार और शिकायत निवारण में सक्रिय रहेगा।
मौसम विभाग की ओर से जारी चेतावनियां अब एसएमएस, व्हाट्सएप, इंटरनेट मीडिया और लाउडस्पीकर के जरिए आम जनता तक तुरंत पहुंचेंगी। मेट्रो स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल और बाजारों में लाल-नारंगी-पीले कोड वाले चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों को गर्मी से बचाव की विशेष सलाह भी दी जाएगी।
तीन चरणों में क्रियान्वयन की योजना
1. ग्रीष्म ऋतु से पूर्व चरण: नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, अस्पतालों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में ओआरएस, दवाई एवं जलापूर्ति की व्यवस्था, अस्थायी आश्रय गृहों की पहचान, कूल रूफ अभियान को बढ़ावा, इंटरनेट मीडिया एवं नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
2. ग्रीष्म ऋतु में नियंत्रण कक्ष पूर्ण रूप से सक्रिय रहेंगे। चेतावनियों का दैनिक प्रसारण, सार्वजनिक स्थानों पर ठंडे पेय, ओआरएस एवं छाया की व्यवस्था, श्रमिकों के कार्य समय में परिवर्तन, विद्यालयों में समय सारिणी में लचीलापन, जन जागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक, पोस्टर एवं स्थानीय संचार किया जाएगा।
3. ग्रीष्म ऋतु के पश्चात (समीक्षा एवं सुधार): हीट स्ट्रोक एवं उससे संबंधित बीमारियों का डाटा संकलन, विभागीय समीक्षा बैठकें, सफलता एवं कमियों के आधार पर योजना में संशोधन, छायादार स्थान, कूल रूफ एवं हरियाली जैसे दीर्घकालिक उपायों को बढ़ावा, हीट स्ट्रोक की पहचान एवं उपचार के लिए चिकित्सकों, एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण, अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के लिए विशेष वार्ड, ओआरएस, आईवी फ्लूइड एवं आवश्यक दवाईयों का पर्याप्त स्टॉक, अस्पतालों में निर्बाध बिजली एवं जलापूर्ति सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
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