नार्वे और हांगकांग की तर्ज पर दिल्ली में बनेगा देश का पहला Net-Zero ईको पार्क, 150 करोड़ का आएगा खर्च
दिल्ली सरकार होलंबी कलां में 150 करोड़ की लागत से देश का पहला प्रदूषण-रहित ई-वेस्ट इको पार्क बनाने जा रही है। इसके लिए वैश्विक स्तर पर अध्ययन किया जा रहा है ताकि ई-वेस्ट प्रबंधन के नए मानक स्थापित किए जा सकें। इस इको पार्क से हर साल 51000 मीट्रिक टन ई-वेस्ट का निस्तारण होगा और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। देश का पहला प्रदूषण-रहित और नेट-जीरो ई-वेस्ट ईको पार्क तैयार करने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक थर्ड-पार्टी कंसल्टेंसी को वैश्विक अध्ययन करने का दायित्व सौंपा है।
इसका उद्देश्य होलंबी कलां में एक विश्वस्तरीय सुविधा स्थापित करना है, जो ई-वेस्ट प्रबंधन के नए मानक तय करेगी।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद बताया गया कि 150 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए ग्लोबल टेंडर की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।
DSIIDC की ओर से जारी किया जाएगा टेंडर
टेंडर जल्द ही इस प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं ढांचागत विकास निगम (DSIIDC) की ओर से जारी किया जाएगा।
सिरसा ने बताया कि हम दुनिया भर के सफल माॅडलों का अध्ययन कर रहे हैं। खासकर नार्वे (जो बेहद ईको-फ्रेंडली है) और हांगकांग, जहां ई-वेस्ट प्लांट शहरों के बीच होते हुए भी शून्य प्रदूषण फैलाते हैं।
हमारा लक्ष्य है कि हम सबसे स्वच्छ और सुरक्षित तकनीक अपनाएं। इससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और दिल्ली को प्रदूषण से राहत मिलेगी।
निम्न बिंदुओं पर केंद्रित होगा यह अध्ययन
- जीरो एमिशन और ज़ीरो लैंडफिल रीसायक्लिंग पार्क का डिजाइन और इंजीनियरिंग मॉडल।
- वैज्ञानिक तरीकों से कचरे को अलग-अलग करना और उसका डिस्पोज ऑफ।
- रेयर अर्थ और कीमती धातुओं की रिकवरी प्रणाली।
- प्रदूषण नियंत्रण के उपाय, वायु गुणवत्ता की निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग।
- अनौपचारिक ई-वेस्ट श्रमिकों के लिए कौशल विकास के साथ फार्मल सेक्टर से जुड़ाव।
- घने पेड़ों की कैनोपी, ग्रीन जोन और आकर्षक डिजाइन।
हर वर्ष 51 हजार मीट्रिक टन ई-वेस्ट की जाएगी Disposed
11.4 एकड़ में फैले इस ग्रीन ई-वेस्ट इको पार्क में हर साल 51,000 मीट्रिक टन से अधिक ई-वेस्ट Disposed की जाएगी। यह 350 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व अर्जित करेगा।
साइट के 33 प्रतिशत हिस्से में ग्रीन बेल्ट और 53 प्रतिशत हिस्से में खुले क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं, जो एक प्राकृतिक प्रदूषण रोधक कवच का काम करेंगे।
साथ ही, यह प्लांट दिल्ली में वायु, जल और मिट्टी के प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा, कीमती धातुओं की रिकवरी करेगा और अनौपचारिक श्रमिकों को फार्मल सेक्टर में जोड़ते हुए हजारों ग्रीन नौकरियों के अवसर पैदा करेगा।
DSIIDC जल्द ही “दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ग्रीन टेक्नोलाॅजी पार्टनर्स” को इस ग्लोबल बिड में आमंत्रित करेगा। ताकि यह सुविधा ग्रीन, क्लीन, नेट ज़ीरो और दिल्ली के एक मुख्य आकर्षण के रूप में विकसित हो।
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