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    NCR में विकास को मिलेगी रफ्तार, दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने पर यमुना की बदलेगी सूरत

    दिल्ली में भाजपा की जीत ने शहरी विकास की नई संभावनाएं जगाई हैं। दिल्ली हरियाणा उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भाजपा की सरकारें होने से विकास में तेजी आ सकती है। रैपिड रेल प्रदूषण नियंत्रण शहरी परिवहन कचरा प्रबंधन और पर्यटन जैसे मुद्दों पर सहयोग से एनसीआर एक आदर्श क्षेत्र बन सकता है। आगे विस्तार से पढ़िए आखिर किन-किन क्षेत्रों में विकास को रफ्तार मिलेगी।

    By manish tiwari Edited By: Kapil Kumar Updated: Wed, 12 Feb 2025 08:12 AM (IST)
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    शहरी परिवहन, यमुना, कचरा व प्रदूषण पर एनसीआर की सूरत बदल सकती है। फाइल - पीटीआई

    मनीष तिवारी, नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Chunav 2025) में भाजपा की जीत ने पहली बार पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार सुनिश्चित करने के साथ ही शहरी विकास की नई संभावनाएं भी जगाई हैं।

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा की जीत के बाद इसका उल्लेख भी किया था और अब शहरी विकास के विशेषज्ञों ने वे प्राथमिकताएं भी बताई हैं, जिन पर दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की भाजपा सरकारें सहमति बनाकर आपस में काम कर सकती हैं। एक सुझाव एनसीआर से संबंधित मुख्यमंत्रियों की एक परिषद बनाने का भी है।

    आर्थिक विकास का हब भी बना सकता है

    शहरी सुधार के विशेषज्ञ हितेश वैद्य के अनुसार, जो स्थिति उभरी है, वह एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की वास्तविक अवधारणा को साकार कर सकती है। बोर्ड नियोजित विकास ही नहीं, इस क्षेत्र को रोजगार और आर्थिक विकास का हब भी बना सकता है।

    दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भाजपा की अकेले बहुमत वाली सरकारों के होने के कारण न तो अपने-अपने एजेंडे वाली राजनीतिक खींचतान की गुंजाइश है और न ही गठबंधन की मजबूरियों का बहाना हो सकता है।

    केवल दिल्ली-मेरठ की परियोजना ही धरातल पर उतर सकी

    दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार के समय एनसीआर को रैपिड रेल वाली परियोजनाओं के साथ ही प्रदूषण के मोर्चे पर राजनीतिक असहमति के दुष्परिणाम भोगने पड़े। रैपिड रेल के तीन प्राथमिकता वाले कॉरिडोर दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-पानीपत और दिल्ली-एसएनबी (शाहजहांपुर-नीमराना-बहरोड़) में से केवल दिल्ली-मेरठ की परियोजना ही धरातल पर उतर सकी है।

    जरूरी आर्थिक सहयोग भी किया

    इसलिए, क्योंकि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने केंद्र सरकार का साथ देने के लिए न केवल तेजी दिखाई, बल्कि जरूरी आर्थिक सहयोग भी किया। इसके विपरीत केजरीवाल सरकार ने रैपिड रेल के प्रोजेक्टों में दिल्ली के हिस्से का पैसा देने पर तब तक सहमति नहीं जताई जब तक सुप्रीम कोर्ट ने उसे फटकार लगाते हुए बचने के सारे दरवाजे बंद नहीं कर दिए।

    मनोहर लाल के केंद्रीय शहरी कार्य मंत्री बनने के बाद से बाकी दोनों कॉरिडोर पर काम तेज हुआ है। समान दल की सरकारों के सहयोग का दूसरा उदाहरण मध्य प्रदेश और राजस्थान की भाजपा सरकारों के बीच पार्वती-कालीसिंध नदी जोड़ो परियोजना के लिए समझौता होना भी है।

    एनसीआर से जुड़े राज्यों के बीच बननी चाहिए सहमति 

    नेशनल इंस्टीट्यूट आफ अर्बन अफेयर्स के पूर्व प्रमुख हितेश वैद्य ने कहा कि एनसीआर के लिए बहुत बड़ा संकट बन चुके प्रदूषण की रोकथाम एनसीआर से जुड़े राज्यों के बीच सहयोग का सबसे पहला बिंदु बनना चाहिए। इसका कारण पंजाब में पराली का जलना भी है, जहां आम आदमी पार्टी की ही सरकार है, लेकिन चार राज्य अपने स्तर पर इसका समाधान निकाल सकते हैं। इनके बीच सहमति और सुधार की इच्छाशक्ति का विषय शहरी परिवहन भी बनना चाहिए।

    यह लोगों की समस्याएं हल करने के साथ ही रोजगार के नए अवसर भी खोल सकता है। अगर मुख्यमंत्रियों की कोई परिषद बनती है तो वह साझा परिवहन, पर्यटन, आर्थिक विकास और शहरी नियोजन का न्यूनतम कार्यक्रम तय कर सकती है।

    डीडीए का मास्टर प्लान 2041

    वहीं, उदाहरण के लिए अब पर्यटन के लिहाज से दिल्ली, आगरा और जयपुर को पैकेज के रूप में देखने की जरूरत है। वैद्य ने कहा कि एनसीआर के प्लान और डीडीए के मास्टर प्लान 2041 को मिलाकर क्षेत्रीय विकास का नया फ्रेमवर्क बनाने पर विचार किया जाना चाहिए। शहरी कार्य मंत्रालय इसका संरक्षक हो सकता है।

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    हितेश वैद्य ने केशव वर्मा की अध्यक्षता वाली समिति की इस सिफारिश के अमल करने पर भी जोर दिया कि महानगरीय विकास के लिए एक बड़ी क्षेत्रीय इकाई के गठन की जरूरत है ताकि उससे सटे अन्य इलाके भी उसी अनुपात में विकसित हो सकें और महानगरों में जनसंख्या के दबाव को कम किया जा सके।

    यमुना साफ करने में बाधा नहीं

    नरगुंड शहरी नीतियों के विशेषज्ञ संतोष नरगुंड ने कहा कि यह मौका प्रशासनिक ढंग से ही एनसीआर में सुधार की शुरुआत का है। यमुना की सफाई में अब कोई बाधा नहीं है, दिल्ली में कूड़े के पहाड़ खत्म करने में राजनीतिक विरोध की कोई अड़चन नहीं है।

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    शहरी कार्य मंत्रालय ने 2026 तक कूड़ा मुक्त शहर का लक्ष्य रखा है, जिसे दिल्ली में भी हासिल किया जा सकता है। वास्तव में एनसीआर वाले राज्य कचरा प्रबंधन के लिए एक एकीकृत नीति बना सकते हैं। अगर सभी राज्यों की भाजपा सरकारें ठान लें तो अगले दो साल में एनसीआर एक आदर्श क्षेत्र के रूप में विकसित हो सकता है।