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    शॉर्ट कपड़े पहनना और बार में गानों पर नाचना अपराध नहीं, अदालत ने 7 महिलाओं को किया बरी

    कोर्ट ने सात महिलाओं को अश्लील नृत्य के आरोप से बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा है कि मामले में कोई अपराध हुआ था। अब न तो छोटे कपड़े पहनना कोई अपराध है और न ही गानों पर नाचने के लिए दंडित किया जा सकता है भले ही ऐसा नृत्य सार्वजनिक रूप से किया गया हो।

    By Ritika Mishra Edited By: Kapil Kumar Updated: Wed, 12 Feb 2025 07:40 AM (IST)
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    अदालत ने बार में अश्लील नृत्य करने की आरोपी सात महिलाओं को बरी किया। फाइल - सोशल मीडिया

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। अदालत ने एक बार में अश्लील नृत्य करने की आरोपित सात महिलाओं को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा है कि मामले में कोई अपराध हुआ था।

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    छोटे कपड़े पहनना कोई अपराध नहीं

    तीस हजारी स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नीतू शर्मा ने कहा कि अब न तो छोटे कपड़े पहनना कोई अपराध है और न ही गानों पर नाचने के लिए दंडित किया जा सकता है, भले ही ऐसा नृत्य सार्वजनिक रूप से किया गया हो। यह केवल तभी दंडित किया जा सकता है जब नृत्य करने वाले के अलावा किसी अन्य को परेशान करने लगे।

    अधिकारी ने कहीं भी यह दावा नहीं किया

    अदालत ने कहा कि मामले में पुलिस अधिकारी ने कहीं भी यह दावा नहीं किया कि नृत्य किसी अन्य व्यक्ति को परेशान कर रहा था। वहीं, अभियोजन पक्ष के दो गवाहों ने भी अपने बयान में कहा कि वे उस स्थान पर मजे के लिए गए थे और उन्हें मामले के बारे में कुछ भी पता नहीं था।

    जनता का समर्थन नहीं मिला

    अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि पुलिस ने एक कहानी गढ़ी, लेकिन उसे जनता का समर्थन नहीं मिला। ऐसी परिस्थितियों में एकबारगी भले ही एसआइ धर्मेंद्र के दावे को स्वीकार कर लिया जाए, लेकिन इससे अपराध की प्रकृति स्थापित नहीं होती है। अदालत ने पुलिस द्वारा आसपास मौजूद अन्य लोगों को जांच में शामिल नहीं करने पर भी सवाल उठाया।

    अदालत ने बार के प्रबंधक को भी संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया, जिस पर सीआरपीसी की धारा 144 के तहत एसीपी, पहाड़गंज द्वारा जारी आदेश का उल्लंघन करते हुए बार में सीसीटीवी कैमरों का उचित रखरखाव नहीं करने का आरोप था।

    अदालत ने यह भी दर्ज किया कि ऐसा कोई आरोप नहीं था

    अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह दिखाने के लिए कोई सुबूत पेश करने में विफल रहा कि अधिसूचना कभी जारी हुई थी या आरोपित को एसीपी द्वारा जारी आदेश के बारे में जानकारी थी। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि ऐसा कोई आरोप नहीं था कि संबंधित बार उचित लाइसेंस के बिना या सरकार द्वारा जारी प्रविधानों और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए चल रहा था।

    पहाड़गंज पुलिस ने महिलाओं पर भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत मामला दर्ज किया था, जिसके अनुसार दूसरों को परेशान करने के लिए सार्वजनिक स्थान पर किया गया कोई अश्लील कृत्य अपराध होता है। यह मामला एक सबइंस्पेक्टर (एसआइ) की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिसने इलाके में गश्त करने के दौरान यह मामला पकड़ने का दावा किया था।

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    उसका आरोप था कि जब वह बार में दाखिल हुआ, तो उसने देखा कि कुछ लड़कियां छोटे कपड़े पहनकर अश्लील गानों पर नृत्य कर रही थीं।

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