दिल्ली के उद्योगों के लिए खुशखबरी, MCD से फैक्ट्री लाइसेंस लेना हुआ आसान; जानिए अब क्या करना होगा
एमसीडी सदन ने फैक्ट्री लाइसेंस के सरलीकरण को मंजूरी दी जिससे दिल्ली के उद्यमियों को बड़ी राहत मिली है। नए नियमों के अनुसार दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग में पंजीकरण ही लाइसेंस माना जाएगा और संपत्ति कर का पांच प्रतिशत शुल्क तय किया गया है। इस फैसले से एक लाख से अधिक औद्योगिक इकाइयों को फायदा होगा और इंस्पेक्टर राज खत्म होगा।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : दिल्ली में फैक्ट्री लाइसेंस का सरलीकरण कर MCD ने उद्यमियों को बड़ी राहत देते हुए राजस्व वृद्धि का बड़ा रास्ता तैयार किया है।
मौजूदा समय में करीब 30 हजार औद्योगिक इकाई ही इसके दायरे में हैं, जबकि नए नियम लागू हाेने के बाद एक लाख से अधिक उद्योग इसके दायरे में आ जाएंगे।
पोर्टल पर पंजीकरण को ही लाइसेंस मना जाएगा
एमसीडी ने फैक्ट्री लाइसेंस की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए इसे दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग या सूक्ष्म एवं लघु उद्योग पोर्टल पर पंजीकरण को ही लाइसेंस के रूप में मान्यता दी है।
साथ ही कुल संपत्तिकर का पांच प्रतिशत फैक्ट्री लाइसेंस शुल्क तय किया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को बृहस्पतिवार को निगम सदन की बैठक में मंजूरी मिल गई है। इसके लिए सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से आन टेबल प्रस्ताव लाया गया था।
इसी वित्तीय वर्ष से लागू होगी नई व्यवस्था
तय प्रक्रिया का पालन कर एमसीडी से आदेश जारी होने के बाद यह इसी वित्तीय वर्ष से लागू हो जाएगा। जिसके बाद से लाइसेंस के लिए उद्यमियों का एमसीडी कार्यालय तथा अधिकारियों के चक्कर लगाना अतीत की बात हो जाएगी।
इस सुधार की मांग दिल्ली के उद्यमी दशकों से कर रहे थे। एकीकरण से पूर्व तीन निगमों में बंटी एमसीडी ने फैक्ट्री लाइसेंस में सुधार संबंधित प्रस्ताव पारित कर दिल्ली सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजी थी, लेकिन वह संसद से पारित नहीं हो सका था।
लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस मुद्दे को अपने संकल्पपत्र में जगह दी थी तथा सत्ता में आने पर सरलीकरण का वादा किया था। जो अब हकीकत हो गया है।
दैनिक जागरण ने उठाया था मुद्दा
एमसीडी द्वारा हेल्थ ट्रेड लाइसेंस में सरलीकरण के बाद 26 जून को दैनिक जागरण ने फैक्ट्री लाइसेंस में भी आवश्यक सुधार की ओर एमसीडी द्वारा कदम बढ़ाने संबंधित खबर सबसे पहले प्रकाशित की थी।
अब प्रस्ताव के पारित हो जाने के बाद से दिल्ली के एक लाख से अधिक उद्यमियों को लाभ होगा। दिल्ली के कुल 56 औद्योगिक क्षेत्राें में उद्यमियों को अलग से लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी। अब जब भी वे संपत्तिकर जमा करेंगे तो पोर्टल पर इससे संबंधित विकल्प होगा।
इस विकल्प को चुनते ही पांच प्रतिशत अतिरिक्त संपत्तिकर जमा करते ही लाइसेंस दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग से मिले लाइसेंस को निगम से मान्य मान लिया जाएगा। हालांकि, अग्निशमन से लेकर प्रदूषण से संबंधी मंजूरी दिल्ली सरकार को देखनी होगी।
पहले क्या होता था
- एमसीडी से लाइसेंस के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था।
- निगम का फैक्ट्री लाइसेंस विभाग कागजों का सत्यापन करता था।
- निगम के फैक्ट्री विभाग के इंस्पेक्टर साइट का निरीक्षण करते थे।
- मशीनों की क्षमता के आधार पर लाइसेंस को दिया जाता था।
अब क्या होगा
- औद्योगिक इलाकों और री-डेवलपमेंट वाले इलाकों का संपत्तिकर जमा करने के दौरान ही दिल्ली सरकार से जारी लाइसेंस स्वतः एमसीडी का लाइसेंस माना जएगा।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए भाजपा ने एक ऐतिहासिक निर्णय किया है। इस तहत फैक्ट्री लाइसेंस देने और नवनीकरण करने की प्रक्रिया में इंस्पेक्टर राज को खत्म कर दिया। औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्री लाइसेंस को संपत्ति कर के साथ जोड़ दिया गया है जिसके चलते फैक्ट्री मालिकों को वार्षिक संपत्ति कर का पांच लाइसेंस शुल्क निगम को देना होगा और दिल्ली सरकार का लाइसेंस ही निगम का लाइसेंस माना जाएगा।
- राजा इकबाल सिंह, महापौर, दिल्ली
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