कहां गायब थे मनीष सिसोदिया? 11 दिन से फोन भी था बंद; खुद बता दी सारी बात
दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने खुलासा किया है कि वे पिछले 11 दिनों से राजस्थान में विपश्यना ध्यान शिविर में थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि यह अनुभव उनके लिए बहुत ही शांति और आत्म-ज्ञान का स्रोत रहा। पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा सबसे दिलचस्प बात यह लगी कि शिविर में 75% लोग 20-35 वर्ष की उम्र के थे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में हार के बाद मनीष सिसोदिया लोगों और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए नजर आ रहे हैं। चुनाव परिणाम घोषित होने के कुछ दिन बाद वह अचानक गायब हो गए।
गायब होने के साथ ही उन्होंने अपना फोन भी बंद कर दिया। अब मनीष सिसोदिया ने खुलासा किया है कि वह पिछले कई दिनों से विपश्यना केंद्र में थे।
सिसोदिया ने खुद किया खुलासा
उन्होंने शनिवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर बताया, "पिछले 11 दिन से राजस्थान के एक गांव में विपश्यना ध्यान शिविर में था। मौन, एकांत, और अपने ही अंतर्मन का अवलोकन। फोन भी बंद था, बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ। आज सुबह ही शिविर पूरा हुआ।"
आगे लिखा, विपश्यना सिर्फ ध्यान नहीं, एक गहरी आध्यात्मिक यात्रा है। दिन में 12+ घंटे केवल अपनी साँसों को देखना, बिना किसी प्रतिक्रिया के बस अपने मन और शरीर को समझना। गौतम बुद्ध की वही सीख— चीजों को वैसे ही देखना, जैसी वे वास्तव में हैं, न कि जैसी हम उन्हें देखना चाहते हैं।
इस यात्रा में कोई संवाद नहीं। न फोन, न किताबें, न लेखन, न ही किसी से नजरों का सामना। पहले कुछ दिन दिमाग भागता है, बेचैन होता है, लेकिन धीरे-धीरे समय ठहरने लगता है। एक अजीब-सी शांति हर हलचल के बीच जन्म लेने लगती है।
पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा, सबसे दिलचस्प बात यह लगी कि शिविर में 75% लोग 20-35 वर्ष की उम्र के थे। जब आख़िरी दिन बातचीत की, तो पता चला कि सफलता की दौड़ थकान, उलझती जिंदगियां और भीतर की बेचैनी उन्हें इतनी कम उम्र में ही इस राह पर ले आई है।
उनकी शिकायत थी कि जिस शिक्षा ने उन्हें सफलता की इस दौड़ के लायक़ बनाया है उसमें इस थकान और इन उलझनों से निपटने का मंत्र भी सिखा दिया जाता तो हर पढ़े लिखे इंसान की ज़िंदगी कितनी खुशहाल भी हो सकती है।
पूर्व शिक्षा मंत्री ने बताए मेडिटेशन के फायदे
सिसोदिया ने कहा, मुझे खुशी है कि दिल्ली का शिक्षा मंत्री रहते हुए स्कूलों मे हैप्पीनेस पाठ्यक्रम के तहत रोजाना हर बच्चे के लिए #HappinessClass शुरू करा सका। यह शिक्षा के मानवीयकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है जिसका जिक्र विपासना ध्यान में दस दिन बिताने के बाद के बाद ये युवा कर रहे थे।
आज शाम तक दिल्ली लौटूंगा, नई ऊर्जा और नए जोश के साथ। और संकल्प वही—देश के हर बच्चे को शानदार शिक्षा मिले। अच्छी शिक्षा हर बच्चे को न सिर्फ सफल बल्कि एक बेहतर इंसान बनाए। शिक्षा के मानवीयकरण का काम भी तो आगे बढ़ाना है।
और हां, अगर जीवन में आपको भी कभी मौका मिले, तो 10 दिन का यह अनुभव जरूर लें। यह केवल चित्त की शांति का मार्ग नहीं, बल्कि स्वयं को जानने का एक दुर्लभ अवसर है।
विपश्यना शिविर में अपने चित्त को समझने और निर्मल बनाने की जो आध्यात्मिक प्रगति मिलती है, वह तो अद्भुत है ही… लेकिन शिविर की सबसे प्रभावशाली और विशेष बात जो मुझे लगती है, वह है दस दिनों का मौन। पूर्ण मौन।
— Manish Sisodia (@msisodia) March 8, 2025
यहाँ मौन केवल चुप रहने का अभ्यास नहीं, यह स्वयं को गहराई से सुनने की… https://t.co/6QMR5v3f53
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