नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। वारदात के समय रोहिणी कोर्ट के सातों प्रवेश द्वारों व परिसर की सुरक्षा में दिल्ली पुलिस के करीब 50 जवान के अलावा दो दर्जन सुरक्षा गार्ड की तैनाती थी। कोर्ट में आने जाने वाले लोगों की निगरानी के लिए प्रवेश द्वारों, पार्किंग व परिसर में 90 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। बावजूद इसके दोनों हमलावर लोडेड पिस्टल के साथ कोर्ट के रूम नंबर 207 तक पहुंच गए, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी लापरवाही थी कि दोनों हमलावर आसानी से अपने लक्ष्य तक पहुंच गए। सुरक्षा को लेकर बरती गई यह लापरवाही पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आई है। सुरक्षा में यह चूक हमलावरों के प्रवेश द्वार से लेकर कोर्ट रूम तक पहुंचने तक कई स्तरों पर हुई है।

नहीं ली गई तलाशी

हमलावरों के गेट नंबर चार से प्रवेश करने की बात कही जा रही है। इस गेट पर दोनों की पुलिस कर्मियों ने तलाशी नहीं ली और न ही उन्हें मुख्य गेट से सटे छोटे गेट पर लगे मेटल डिटेक्टर से गुजरने के लिए ही कहा। जबकि कई बार पुलिस कर्मी मुख्य गेट से अंदर जाने वालों को मेटल डिटेक्टर से होकर गुजरने के लिए कहते हैं। ऐसे में दोनों आसानी से हथियार सहित कोर्ट परिसर में दाखिल हो गए।

पुलिस का दावा, एक कैमरा था खराब

दूसरी लापरवाही यह हुई कि सीसीटीवी कैमरे की मानिट¨रग करने वाले कर्मचारी भी उनकी गतिविधियों को भांप नहीं सके। जबकि रोहिणी जिले के डीसीपी प्रणव तायल का दावा किया है वारदात के बाद जांच में पता चला है कि सुरक्षा व्यवस्था में लगे 90 सीसीटीवी कैमरों में से मात्र एक कैमरा काम नहीं कर रहा था। ऐसे में इस चूक में कई लोगों की भूमिका सामने आ रही है। ऐसे जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी पुलिस के आला अधिकारी कर रहे हैं।

बदले जाएंगे सुरक्षाकर्मी

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार इसकी पूरी संभावना है कि दो से तीन दिनों में वर्तमान समय में सुरक्षा में तैनात सभी पुलिस कर्मियों को हटाकर नए लोगों को जिम्मेदारी दी जा सकती है। बताया जाता है कि मामले की जांच के लिए गठित टीम ने शनिवार को कोर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज आदि की जांच की है। जिसमें काले मास्क लगाए दोनों हमलावरों के देखे जाने की बात कही जा रही है। हालांकि डीसीपी का कहना है कि अभी फुटेज आदि की जांच चल रही है।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari