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जिंदगी से दूर ले जाता है डिप्रेशन, आप भी चाहते हैं राहत जरूर पढ़ें यह खबर

डिप्रेशन एक मानसिक विकार है जिसके लिए किसी भी एक कारण को जिम्मेदार नही ठहराया जा सकता इसके लिए बहुत सारे कारण जिम्मेदार होते हैं। थोड़ी सावधानी आपको इस बीमारी से राहत दे सकती है।

By JP YadavEdited By: Published: Tue, 03 Sep 2019 02:37 PM (IST)Updated: Tue, 03 Sep 2019 03:48 PM (IST)
जिंदगी से दूर ले जाता है डिप्रेशन, आप भी चाहते हैं राहत जरूर पढ़ें यह खबर

नई दिल्ली [प्रियंका मेहता दुबे]। युवाओं की अच्छी सेहत के लिए शरीर का फिट होना बहुत जरूरी है। ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि अपनी फिटनेस को लेकर युवा हमेशा चिंतित रहें। फिटनेस की चिंता में युवा अपनी जिंदगी को बोझिल, तनावग्रस्त और उबाऊ न बना डालें। व्यायाम शरीर को स्वस्थ रखने का अच्छा तरीका है। दौड़, दंड-बैठक, सैर, कुश्ती, जिम्नास्ट, हॉकी, क्रिकेट, टेनिस आदि खेल व्यायाम के ही कई रूप हैं, जो शरीर को फिट रखते हैं। व्यायाम ऐसी क्रिया का नाम है, जिससे शरीर में हरकत हो, शरीर की हर नस गतिशील हो जाए। जिस समय हम व्यायाम करते हैं, तब हमारे शरीर के अंग ऐसी चेष्टा करते हैं जिसमें हमें आनंद भी मिलता है और श्रम भी होता है। जब हम व्यायाम करते हैं तो हम अंगों को हिलाते-डुलाते हैं, उससे हमारे हृदय और फेफड़ों को अधिक काम करना पड़ता है, हमारे शरीर में रक्त का संचार तेज हो जाता है और शरीर लचीला बना जाता है।

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बाजारों में जंक फूड युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, जिसे खाकर वे अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसकी जगह दालें, फल, सब्जियां, सोयाबीन, दही आदि का सेवन करना चाहिए। इनके साथ रोटी और चावल शरीर के लिए उपयुक्त हैं। हां खाने में सलाद का प्रयोग अधिक करना चाहिए। एक और बात है। शहरी जीवन में हम लोग अक्सर देर तक सोते हैं। इसे त्यागना जरूरी है। रोजाना सूर्य उदय होने से पहले जागना चाहिए। हर किसी को रोजाना कम से कम दो किलोमीटर दौड़ लगानी चाहिए। अगर दौड़ लगाने में सक्षम न हों तो सैर ही कर सकते हैं। इससे शरीर की मांसपेशियां खुलती हैं ।

विभिन्न संस्कृतियों के संगम दिल्ली-एनसीआर में एक चीज है जो कि सभी को एक ही वर्ग में खड़ा करती है। वह है यहां की जीवनशैली। बड़ी-बड़ी कंपनियां, फूड चेन, पार्टी कल्चर, रेस्तरां और बार सभी को एक ही रंग में रंग देते हैं। यहां की लाइफस्टाइल चकाचौंध से भरी है जिसका आकर्षण उस वक्त तक लोगों को बांधे रखता है जबतक वे बीमार नहीं हो जाते। तबतक बहुत देर हो जाती है। कई सर्वेक्षणों में सामने आया है कि दिल्ली एनसीआर में बदलता खानपान, कामकाज का बढ़ता दबाव, तनाव, अवसाद और भागदौड़ युवाओं को अनफिट बना रहे हैं।

शहरी चकाचौंध में अवसादग्रस्त होते युवा
बड़े शहरों की चकाचौंध भरी लाइफ में हर तरफ मौजमस्ती का आलम है लेकिन फिर भी युवा कम उम्र से ही डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। हाल ही में एक निजी स्वास्थ्य बीमा कंपनी के सर्वे में यह बात सामने आई है कि 65 प्रतिशत युवा डिप्रेशन (अवसाद) का शिकार हैं। सर्वे में यह भी सामने आया है कि शहरी युवाओं में यह प्रतिशत बढ़ा है जबकि बड़ी उम्र के लोगों में डिप्रेशन का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक युवाओं में इसके चलते हृदय रोगों के लक्षण भी बढ़ रहे हैं। इसके सबसे बड़े कारण के रूप में उभर के आ रहा है देर रात की पार्टी, नाइट शिफ्ट और सिगरेट व शराब की लत।

युवतियों में बढ़ा है प्रतिशत
इस सर्वे के मुताबिक महिलाओं में डिप्रेशन रेट अधिक है। इसका कारण यह है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देती और प्रोफेशनल लाइफ की परेशानियों से तनाव लेती हैं। इस बारे में साइकोलॉजिस्ट डॉ. नियति धवन का कहना है कि महिलाएं आज के दौर में वर्कप्लेस की चिंता करती हैं। परफेक्ट बनने की चाह में काम का बोझ दिमाग पर ले लेती हैं जिससे वे अवसाद से घिरने लगती हैं। महिलाओं में अक्सर यह शिकायत होती है कि उन्हें ऑफिस की थकान के बाद भी नींद नहीं आती। नींद पूरी नहीं हो पाने के चलते समस्या गहराने लगती है।

बदलनी होगी दिनचर्या
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि कासलीवाल का कहना है कि आज के दौर में हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाना बहुत जरूरी हैं। कुछ चीजें हमारे हाथ में नहीं हैं लेकिन संतुलित भोजन, समय से सोना व उठना, सिगरेट व शराब का सेवन छोड़ना व सबसे महत्वपूर्ण है दिनचर्या में व्यायाम को शामिल किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक और कुछ नहीं तो बीस मिनट की सैर को नियमित रूप से किया जाना चाहिए। इससे डिप्रेशन के साथ साथ डाइबिटीज व दिल की समस्याओं सहित अन्य रोगों से दूर रहा जा सकता है।

अनफिट बनाते फूड सप्लीमेंट
हेल्थ या फूड सप्लीमेंट्स इस दौर में सेहत के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। लोग स्वस्थ व फिट रहने के लिए इस तरह के सप्लिमेंट्स का सेवन बिना किसी परामर्श के ले रहे हैं। ऐसे में युवाओं को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। युवाओं में परफेक्ट दिखने की चाह उनसे कुछ भी करवाती है। बिना विशेषज्ञ की सलाह से लिए गए सप्लीमेंट कई बार जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। यह प्रोटीन सप्लीमेंट आहार अनुपूरक के स्वास्थ्य एवं शिक्षा अधिनियम 1994 के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) में भी पंजीकरण करवाने के लिए अनिवार्य नहीं हैं ऐसे में उनमें पाई जीने वाली चीजों में लेड, कैडमियम व आर्सेनिक जैसी चीजों का असंतुलित अनुपात हो सकता है जो कि स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।

सेहत बिगाड़ता मॉलीक्यूलर क्यूजीन
मूल व्यंजन की प्रजेंटेशन का एक तरीका है मॉलीक्यूलर क्यूजीन। इसके लिए वैज्ञानिक स्तर पर क्रिएटिविटी के जरिए व्यंजन के टेक्सचर में बदलाव किया जाता है। टेबल पर परोसी हुई चीज को आंखों के सामने बर्फ की तरह जमा दिया जाता है। भोजन के विभिन्न घटकों की अणु संरचना में रासायनिक एजेंट्स के माध्यम बदलाव लाकर यह क्यूजीन बनाए जाते हैं। इसके लिए लिक्विड नाइट्रोजन, चिलिंग डिवाइस, एटोमाइजर, फोमिंग मशीन व चिलिंग आइस आदि का उपयोग किया जाता है। इससे लिवर और पाचनतंत्र पर की बीमारियां बढ़ रही हैं।

अत्याधिक व्यायाम भी डाल रहा है दुष्प्रभाव
बदलते दौर में स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जा रही चुनौतियों के कारण लोगों में फिटनेस का क्रेज बढ़ा है। इस फिटनेस को अपने रुटीन में न केवल शामिल कर रहे हैं बल्कि इसे दिनचर्या का अहम हिस्सा बना रहे हैं। फिटनेस के प्रति इस दीवानगी के दुष्परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। युवाओं में योगा व एक्सरसाइज के बाद भी चिड़चिड़ापन, थकान, हार्ट की समस्या व भावनात्मक अस्थिरता देखने को मिल रही है। इन परेशानियों की वजह के रूप में सामने आ रहा है ‘ओवर ट्रेनिंग सिंड्रोम।’ यह सिंड्रोम उस स्थिति में आता है जब अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक एक्सरसाइज की जाती है। इसके लक्षणों में जल्द थकान, ऊर्जा का क्षय अनिद्रा, मानसिक उथल-पुथल, चिड़चिड़ापन, शरीर दर्द व भावनात्मक रूप से कमजोरी महसूस करना शामिल है।

नुकसान पहुंचाते फिटनेस के शॉर्टकट
आज की पीढ़ी को सबकुछ तुरंत चाहिए लेकिन जैसा कि कहा गया है कि हर चीज को बेहतर तरीके से तैयार होने में वक्त लगता है। फिटनेस भी ऐसी ही चीज है जो लगातार कसरत व संतुलित भोजन से ही संभव है। विशेषज्ञों के मुताबिक अब लोग फटाफट फिटनेस पाने की चाह में गलत तरीकों को रुटीन में शामिल कर रहे हैं। लोगों में तनाव व डिप्रेशन के अलावा अन्य बीमारियों के लक्षण पनपने लगते हैं।

उर्वशी राउतेला (फिल्म अभिनेत्री) का कहना है कि फिटनेस केवल आकर्षक बॉडी पाने के लिए ही नहीं बल्कि मानसिक सुकून के लिए भी आवश्यक है। फिटनेस को किसी ब्यूटी ट्रीटमेंट की तरह न लेकर उसे ब्रेकफास्ट व लंच की तरह रुटीन में शामिल करना चाहिए। आज के दौर की भागदौड़ व जिम्मेदारियों में बंधकर लोग अपने प्रति दायित्व को नहीं निभा पाते जिसका खामियाजा उन्हें कम उम्र से ही बीमारियों व मानसिक परेशानियों के रूप में भुगतना पड़ता है। फिटनेस मानसिक व भावनात्मक रूप से भी इंसान को फिट रखती है। फिटनेस को जीवन मानकर चलना चाहिए।

डॉ. सौम्या मुद्गल (मनोचिकित्सा सलाहकार, मैक्स अस्पताल, पंचशील पार्क) के मुताबिक, हम लोग पुरानी सामाजिकता को भूलते जा रहे हैं। व्यायाम व योग नहीं करते, हेल्दी फूड नहीं खाते तो जाहिर सी बात है कि अवसाद होगा। युवाओं के ऊपर फेमिली को इंप्रेस करना, बॉस को इंप्रेस और फिर काम, पीयर प्रेशर, भागदौड़ सब तनाव को बढ़ावा देते हैं। जब मैं लोगों को देखती हूं तो पाती हूं कि इतना बदलाव आ गया है। आज के दौर में न तो लाइफ है, न स्टाइल है, सिगरेट, शराब जैसी चीजें हाइपरटेंशन, हृदयघात व डाइबिटीज कर रहे हैं। मेरे पास बेहद कम उम्र युवा मरीज आ रहे हैं।

 बरुण सोबती (टीवी व फिल्म अभिनेता) की मानें तो  लगातार जंक फूड खाना ठीक नहीं है लेकिन अपने पसंदीदा भोजन से समझौता मत कीजिए। जो पसंद हो खाना चाहिए लेकिन इसकी एक ही शर्त है कि नियमित रूप से वर्कआउट जरूर करें। ऐसा करने से आपको प्रेरणा मिलती है, आत्मविश्वास बढ़ता है। मैं फूडी हूं और खाना मुङो बहुत पसंद है लेकिन मैं अपने आप को फिट रखने के लिए नियमित व्यायाम जरूर करता हूं। इस तरह से स्वाद के साथ समझौता भी नहीं करना पड़ता और फिटनेस भी बरकरार रहती है। अपने आपको फिट रखने के लिए थोड़ा समय निकालना कोई बड़ी बात नहीं है।

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