नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। वायु प्रदूषण के लिहाज से राजधानी दिल्ली में अगस्त का महीना काफी अच्छा रहा, जबकि नवंबर बेहद खराब रहा। नवंबर में वाहनों से निकलने वाना धुआं, औद्योगिक इकाइयों एवं पराली के कारण होने वाला प्रदूषण संयुक्त रूप से राजधानी वासियों के लिए जानलेवा बना गया। पूरे नवंबर में राजधानी के वायु प्रदूषण स्तर पर सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरनमेंट (सीएसई) ने अध्ययन कर एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट से आंकड़ों के आधार पर कई नई चीजें पता चलती हैं। इस अध्ययन में पाया गया है कि लंबे लॉकडाउन के दौरान वायु प्रदूषण न्यूनतम पर पहुंचा लेकिन नवंबर में जाड़े का मौसम शुरू होते ही इस स्तर को कायम नहीं रखा जा सका। वर्ष भर का सामान्य प्रदूषण नवंबर में गंभीर स्तर तक पहुंच गया। वाहनों, औद्योगिक इकाइयों में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल, बिजली उत्पादन संयंत्र और कचरा प्रबंधन पर कठोर नियम बनाकर ही राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जाना संभव है।

बता दें कि दिल्ली के विषय में यह भी पाया गया कि वर्ष भर सामान्य प्रदूषण स्तर जाड़े में काफी ज्यादा बढ़ जाता है। जाड़े में पीएम 2.5 का स्तर, जो अत्यंत सूक्ष्म धूलकण हैं एवं फेफड़ों को अधिक नुकसान पहुंचा सकता है, इस वर्ष नवंबर में दीवाली के आसपास बहुत ज्यादा बढ़ गया। पीएम 2.5 व पीएम 10 के स्तर में पूरे वर्ष की तुलना में नवंबर में 70 फीसद की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।

इस अध्ययन के अनुसार वर्ष 2019 में नवंबर के अंत तक राजधानी में दो बार स्मॉग छाया, जिसके विपरीत वर्ष 2020 में नवंबर के शुरू में ही सात से दस तारीख के बीच ही लगातार स्मॉग छाया रहा। यानि नवंबर के प्रारंभ में ही स्मॉग का प्रभाव दिखा, लेकिन यह दोबारा नहीं हो पाया है। दीवाली के दिन पटाखे, धुआं व पराली के संयुक्त प्रभाव से वायु प्रदूषण काफी बढ़ा लेकिन स्मॉग नहीं छाया क्योंकि दीवाली के अगले दिन वर्षा के कारण प्रदूषण काफी कम हो गया। दीवाली के दिन पीएम 2.5 का स्तर 404 तक पहुंचा लेकिन बारिश हो जाने से अगले दिन घटकर 308 पहुंच गया। पिछले वर्षों में दीवाली के अगले दिन प्रदूषण स्तर बिलकुल कम नहीं होता था, कभी कभी दीवाली के अगले दिन प्रदूषण स्तर और बढ़ जाता था।

सीएसई के अध्ययन में पाया गया है कि इस बार जाड़े में प्रदूषण स्तर कभी काफी ऊपर जाता है फिर नीचे आ जाता है। यह राजधानी के स्थानीय वायु प्रदूषण कारकों के घटने या बढ़ने के कारण होता है। जिस दिन नवंबर में स्मॉग छाया, एनएसआइटी द्वारका पर पीएम 2.5 का स्तर महज 108 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था जबकि मुंडका में यह 699 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया। यानि इस वर्ष एक ही दिन अलग अलग स्थानों पर प्रदूषण स्तर में काफी भिन्नता पाई जा रही है।

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Edited By: JP Yadav