नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। सदी के महानायक व बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन का 11 अक्टूबर को जन्मदिन होता है और सिनेमा जगत के साथ पूरा देश इसे धूमधाम से मनाता है। वहीं, देश की राजधानी दिल्ली का एक घर पिछले चार दशक से अमिताभ बच्चन का इंतजार कर रहा है। दरअसल, दिल्ली के पॉश इलाके गुलमोहर पार्क में वर्ष 1972 में अमिताभ के साहित्यकार पिता हरिवंशराय बच्चन और मां तेजी बच्चन ने प्लॉट नंबर B-8 में घर बनवाया और नाम रखा था 'सोपान'।

इसके बाद हरिवंश राय पत्नी तेजी बच्चन के साथ कुछ वर्ष रहे भी। फिर वर्ष 1979 में डॉन फिल्म की अपार सफलता के बाद अमिताभ बच्चन माता-पिता को अपने साथ मुंबई ले गए। तब से इस बंगले में कोई रहता नहीं है और न ही बच्चन परिवार यहां पर आता है। हालांकि, यहां के गार्ड के मुताबिक, वर्ष- 2017 में अमिताभ कुछ समय के लिए घर पर आए थे, लेकिन कुछ पलों बाद चले गए। गार्ड की मानें तो यहां पर उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं आता।

जानकारों की मानें तो फिल्म 'डॉन' की अपार सफलता के बाद अमिताभ बच्चन माता-पिता को मुंबई ले गए। तब तक वो सुपर स्टार बन चुके थे और एक के एक उन्हें फिल्में मिलने लगी थीं। व्यस्तता ने अमिताभ को इतना उलझाया कि वे लगता है यहां पर आना ही भूल गए। 

70 के दशक में 'सोपान' आते थे अमिताभ

बताया जाता है कि 1970 के आसापस बच्चन दंपती ने 'सोपान' को बनवाने के बाद यहां रहना शुरू कर दिया था। अमिताभ बच्चन तब मुंबई में संघर्ष कर रहे थे, लेकिन जब भी दिल्ली आते तो 'सोपान' में ही ठहरते। इस दौरान माता-पिता के साथ समय भी गुजारते थे। 

साहित्यिक चर्चाएं होती थीं 'सोपान' में

70 के दशक में 'सोपान' में अक्सर कविता पाठ और साहित्यिक चर्चाएं होती थीं। इस दौरान मेजबान हरिवंश राय बच्चन भी दूसरे साहित्यकारों की गोष्ठियों में भाग भी लेते थे।'सोपान' में नामी साहित्यकार धर्मवीर भारती, कमलेश्वर, कन्हैया लाल नंदन, अक्षय कुमार जैन, विजेन्द्र स्नातक जैसे नामवर जैसे साहित्यकार आते थे और साहित्य पर घमासान होता था। 

अमिताभ की मां तेजी बच्चन के नाम पर था प्लॉट

'सोपान' करीब 200 वर्ग गज में बना हुआ है। उन्हें वर्ष 1968 में यह प्लॉट अलॉट हुआ था। 70 के दशक में तेजी बच्चन आकाशवाणी में काम करती थीं। गुलमोहर पार्क तो पत्रकारों की कॉलोनी बन रही थी तो उन्हें यह प्लॉट मिला था। यह अलग बात है कि अब बी-8 गुलमोहर पार्क को यहां के लोग अमिताभ बच्चन के घर के रूप में जानते हैं।  

 वर्ष 1983 में अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म कुली रिलीज हुई थी। दिल्ली के गुलमोहर पार्क सोसायटी में उस वक्त कॉलोनी के लोग एक कम्युनिटी सेंटर बनवाना चाहते थे, हालांकि उसके लिए फंड नहीं था।

सोसायटी निवासी योगेंद्र सहाय ने बताया कि उनके पिता बलदेव सहाय की हरिवंशराय बच्चन से अच्छी जान-पहचान थी। उन्होंने कम्युनिटी सेंटर के लिए फंड की बात की।

बात और आगे बढ़ी तो तेजी बच्चन (अमिताभ की मां) ने कहा कि वह अमिताभ से कहेंगी कि दिल्ली में कुली फिल्म के प्रीमियर से जो भी पैसे आएंगे वे इस सेंटर के लिए दे दिए जाएं।

इस पर बलदेव सहाय सोसायटी के दो-तीन और सदस्यों के साथ मुंबई गए और अजिताभ बच्चन से मिले। तब अजिताभ ही अमिताभ का सारा काम देखते थे। बात बन गई।

दिल्ली के ओडियन सिनेमा में कुली का प्रीमियर हुआ। अमिताभ ने उससे मिले करीब ढाई लाख रुपये इस सेंटर के लिए दिए। आज यहां कल्चरल प्रोग्राम से लेकर हेल्थ कैंप तक का आयोजन किया जाता है। गुलमोहर पार्क के बी-8 यानि ‘सोपान’ में अभी कोई नहीं रहता है। गार्ड ने बताया कि इस बार भी अमिताभ या उनके घर से कोई नहीं आ रहा है। गार्ड ने बताया कि पांच माह पहले अमिताभ यहां किसी काम से आए थे।

अमिताभ-राजीव गांधी की दोस्ती थी कभी

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन की दोस्ती तब से थी जब राजीव 2 साल के थे और अमिताभ बच्चन 4 साल के थे। दोस्ती की शुरुआत जवाहर लाल नेहरू और हरिवंश राय बच्चन के समय में शुरू हुई। जब नेहरू प्रधानमंत्री थे उस वक्त हरिवंश राय बच्चन विदेश मंत्रालय में हिंदी ऑफिसर थे। धीरे-धीरे इंदिरा गांधी और हरिवंश राय बच्चन की पत्नी तेजी बच्चन के बीच भी दोस्ती हो गई और अक्सर दोनों परिवारों के बीच मिलना जुलना होने लगा। और फिर अमिताभ और राजीव गांधी भी करीब आ गए। 

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Posted By: JP Yadav