नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। ट्रेनों की लेट लतीफी दूर करने के लिए रेलवे द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में लिंक एक्सप्रेस व स्लीप कोच के संचालन की संख्या सीमित की जाएगी। इससे किसी ट्रेन में अतिरिक्त कोच जोड़ने या फिर कोच को कम करने की जरूरत नहीं रहेगी। इससे समय की बचत होगी और ट्रेन को समय पर चलाने में मदद मिलेगी। उत्तर रेलवे भी आठ जोड़ी ट्रेनों में यह सुविधा समाप्त करने का फैसला किया है।

चल रही नए टाइम टेबल लागू करने की तैयारी

नए टाइम टेबल में इसे लागू करने की तैयारी है। रेलवे में नए टाइम टेबल बनाने की तैयारी चल रही है। पिछले कुछ वर्षों से अक्टूबर में नया टाइम टेबल लागू किया जाता है। हालांकि, कोरोनो संकट की वजह से इन दिनों में विशेष ट्रेनें चल रही हैं। इस वजह से पिछले वर्ष टाइम टेबल नहीं आया था। इस वर्ष नया टाइम टेबल घोषित करने की तैयारी चल रही है। कई ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई जाएगी जिससे उसके परिचालन समय में भी बदलाव होगा। कई ट्रेनों के फेरे बढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही बेहतर परिचालन के लिए कुछ रूट पर लिंक एक्सप्रेस बंद करने की तैयारी है।

कोच जोड़ने में होती है समय की बर्बादीः-

अधिकारियों का कहना है कि लिंक एक्सप्रेस व स्लीप कोच सेवा में किसी स्टेशन पर दो ट्रेनों या कुछ कोच को जोड़ने और उसे अलग करने में काफी समय लगता है। वहीं, एक रूट की ट्रेन के लेट होने पर दूसरी ट्रेन को भी रोककर रखना पड़ता है जिससे कि दोनों को जोड़ा जा सके। इस प्रक्रिया में काफी समय की बर्बादी होती है और ट्रेन को समय पर चलाने में परेशानी होती है।

पत्नी को बिना बताए क्यों चलवाया ससुर के घर पर बुलडोजर, नितिन गडकरी ने सालों बाद खोला राज

इन ट्रेनों में बंद होगी यह सुविधाः-

दिल्ली-देहरादून मसूरी एक्सप्रेस में इस समय तीन स्लीपर कोच हरिद्वार तक के लगाए जाते हैं। इन्हें हरिद्वार में अलग करके शेष ट्रेन को देहरादून की ओर रवाना किया जाता है। नया टाइम टेबल आने के बाद कोच अलग नहीं किए जाएंगे। पूरी ट्रेन देहरादून जाएगी।

इसी तरह से कालका-श्रीगंगानगर, हरिद्वार-ऊना हिमाचल जनशताब्दी एक्सप्रेस, वाराणसी-देहरादून एक्सप्रेस, कोच्चुवेली-देहरादून एक्सप्रेस, ओखा-देहरादून एक्सप्रेस, मदुरई-देहरादून एक्सप्रेस और हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस में भी लिंक एक्सप्रेस व स्लीप कोच की सेवा बंद हो जाएगी।

यहां जानिए क्या होता है लिंक एक्सप्रेस

लिंक एक्सप्रेस में अलग-अलग स्थानों से आने वाली दो ट्रेनें किसी स्टेशन पर आपस में जुड़ जाती हैं। उसके बाद दोनों एक ट्रेन बनकर गंतव्य की ओर रवाना होती है।

यहां जानिए क्या होते हैं स्लीप कोच

किसी ट्रेन के कुछ कोच किसी स्टेशन पर अलग हो जाते हैं। उसके बाद शेष ट्रेन गंतव्य की ओर रवाना हो जाती है। वहीं, उस ट्रेन से हटाए गए कोच को किसी अन्य ट्रेन के साथ जोड़कर गंतव्य की ओर रवाना किया जाता है।

ये भी पढ़ें- जानिए महिलाओं के प्रति होने वाले सबसे ज्यादा अपराध के मामले में किस स्थान पर है दिल्ली, मुंबई और यूपी

ये भी पढ़ें- जानिए विस्फोट से दहलाने के अलावा और क्या-क्या करने वाले थे पाकिस्तान में प्रशिक्षण लेकर लौटे आतंकी

ये भी पढ़ें- यूपी में भी घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाली है 300 यूनिट बिजली फ्री मगर कब, जानने के लिए पढ़िए मंत्री जी का बयान

Edited By: Prateek Kumar