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    आईआईटी दिल्ली में पसंदीदा स्ट्रीम में कर सकेंगे एक वर्षीय एमटेक डिग्री, विद्यार्थियों का तनाव कम करने को लिए कई अहम निर्णय; पढ़ें डिटेल

    Updated: Tue, 27 May 2025 08:28 PM (IST)

    आईआईटी दिल्ली ने छात्रों के तनाव को कम करने के लिए कक्षाओं का आकार घटाने माइनर डिग्री का विकल्प देने और ऑनर्स कार्यक्रम शुरू करने जैसे कई बदलाव किए हैं। कोर ब्रांच के साथ दूसरी ब्रांच में माइनर डिग्री ले सकेंगे और उन्हें एमटेक की डिग्री का विकल्प भी मिलेगा।

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    आईआईटी दिल्ली ने 12 साल बाद अपने पाठ्यक्रम में बदलाव किया है।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों अपनी कोर ब्रांच के साथ दूसरी ब्रांच में माइनर डिग्री भी ले सकेंगे।

    इसके लिए उन्हें 20 क्रेडिट के पेपर पढ़ने होंगे। इसके साथ ही अपनी पसंदीदा स्ट्रीम में विद्यार्थियों एक वर्षीय एमटेक की डिग्री कर पाएंगे। तीन वर्ष बाद उन्हें एमटेक की डिग्री का विकल्प दिया जाएगा।

    एमटेक में जाने के लिए उन्हें बीटेक में आठ सीजीपीए अंक लाने जरूरी होंगे। आईआईटी दिल्ली ने 12 साल बाद अपने पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। 2022 से इस पर काम किया जा रहा था।

    18 क्रेेडिट के पेपर पढ़कर कर सकते हैं ऑनर्स

    विद्यार्थियों के लिए ऑनर्स कार्यक्रम की शुरुआत भी की गई है। 18 क्रेडिट के पेपर पढ़कर छात्र बीटेक ऑनर्स की डिग्री हासिल कर सकते हैं।

    संस्थान के एसोसिएट डीन पाठ्यक्रम शॉरी चटर्जी ने बताया कि विद्यार्थियों को पांच वर्ष में स्नातक के साथ परास्नातक की डिग्री दी जा रही है।

    विद्यार्थियों को इसके लिए अलग से कोई प्रतियोगी परीक्षा नहीं देनी होगी। बेहतर सीजीपीए लाने होंगे। उन्होंने कहा, किसी भी ब्रांच में माइनर डिग्री वाले विद्यार्थी दो वर्षीय एमटेक में प्रवेश लेने के लिए भी योग्य होंगे।

    उन्होंने कहा कि प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों से संवाद बढ़ाने के लिए और तनाव कम करने के लिए कक्षाओं का आकार घटाया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    अब प्रथम वर्ष की कक्षा में 150 से ज्यादा विद्यार्थी नहीं होंगे

    अब प्रथम वर्ष की एक कक्षा में 150 से अधिक विद्यार्थी नहीं होंगे। इसको भी छोटे-छोटे बैच में बांट दिया जाएगा। फिलहाल प्रथम वर्ष में एक कक्षा में 300 से 600 तक विद्यार्थी शामिल होते हैं।

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    डीन अकादमिक प्रो. नारायणन अरूर ने कहा, शिक्षकों को भी इसके लिए कहा गया है और वह भी कक्षा का आकार घटाने की मांग कर रहे थे। इससे निश्चित तौर पर विद्यार्थियों को फायदा होगा।

    एसोसिएट डीन आफ आउटरीच प्रो. शिल्पी शर्मा ने कहा, पहले वर्ष के बाद विद्यार्थिेयों के ब्रांच बदलने के नियमों को नहीं बदला गया है। विद्यार्थी माइनर पढ़ने के साथ पहले साल के बाद ब्रांच बदल सकते हैं।

    उच्च स्कोर लाने वाले 15 प्रतिशत विद्यार्थियों के लिए है मौका

    उच्च स्कोर लाने वाले शुरुआती 15 प्रतिशत विद्यार्थियों को ही यह मौका दिया जाता है। पंद्रह सदस्यीय पाठ्यक्रम सुधार समिति ने आठ संस्थानों में पढ़ाई जा रहे कोर्सों का अध्ययन किया है।

    इनमें स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाॅजी , कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, हार्वे मड काॅलेज, रोज-हुलमैन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाॅजी, इंडियाना, आईआईटी मुंबई, गांधीनगर और हैदराबाद हैं।

    पेपर के क्रेडिट घटाए गए, कोर्स बनाए गए प्रायोगिक

    प्रो. नारायणन अरूर ने बताया कि पेपर के क्रेडिट को कम किया गया है। कोर्सों को ज्यादा से ज्यादा प्रायोगिक आधारित बनाने का प्रयास किया गया है।

    अलग-अलग विभागों व कोर्सों में पहले 148 से 158 तक क्रेडिट हुआ करते थे। इसको 142 से 154 तक कर दिया गया है। क्रेडिट जरूर कम किए गए हैं, लेकिन कोर पेपरों पर फोकस रखा गया है। 

    लाए गए बदलावों को इस तरह से समझिए

    आईआईटी दिल्ली ने कोर्स में बदलाव के चार बिंदु तय किए हैं। इनमें पहला फ्लेक्सिबिलिटी, दूसरा हैंड्स ऑन लर्निंग, इन्वारनमेंटल सस्टेनबिलिटी, इंटीग्रेशन आफ एआई है।

    • फ्लेक्सिबिलिटी: सामान्य इंजीनियरिंग, बेसिक साइंस और मानविकी विषय चुनने का विकल्प होगा।माइनर डिग्री या विशेषज्ञता पा सकते हैं। कुल क्रेडिट को संस्थान और विभाग के अनुरूप बांटा गया है।
    • हैंड्स ऑन लर्निंग: प्रायोगिक और व्यावहारिकता बढ़ाई है। प्रायोगिक पढ़ाई 20 प्रतिशत तक बढ़ाई है। प्रयोगशाला और ट्यूटोरियल को शामिल किया गया है।
    • इन्वारमेंटल सस्टेनिबिलिटी: पर्यावरण को सभी पेपरों में जोड़ा गया है। जैसे हाइड्रोजन की पढ़ाई कर रहे हैं तो पर्यावरण से जोड़कर पढ़ाया जाएगा। 
    • इंटीग्रेटेड एआई: एआई और मशीन आधारित कोर्स को जरूरी बनाया गया है। एआई के प्रयोग के बारे में सीखाने के लिए इसकी शुरुआत की गई है। सुलझाने के लिए प्रायोगिक विधियों पर जोर दिया जाएगा।

    परास्नातक और पीएचडी के कोर्सों में किया गया बदलाव

    एमटेक या एमएस (रिसर्च) कोर्स को इंडस्ट्री कनेक्ट और प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षा के आधार पर फिर से बनाया गया है। कैपस्टोन प्रोजेक्ट और समर इंटर्नशिप अनिवार्य किए गए हैं।

    छात्र अपने शोध कार्य संस्थान में या फिर इंडस्ट्री में जाकर कर सकते हैं। कुछ विभागों में एमटेक प्रोग्राम का विलय किया गया है। एमटेक या एमएसआर के दौरान पीएचडी में बदलने की भी सुविधा है।

    आईआईटी में तीन नए कोर्सों की शुरुआत की गई 

    आईआईटी के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने बताया कि सत्र 2025-26 से तीन नए कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। इनमें बीटेक इन डिजाइन, बीएस इन केमिस्ट्री और एमटेक इन फोटोनिक्स शामिल हैं।

    बेचलर ऑफ साइंस कार्यक्रम आईआईटी दिल्ली में पहली बार शुरू किया गया है। स्नातक के दोनों कोर्स में प्रवेश जेईई एडवांस के माध्यम से होगा। एमटेक इन फाटोनिक्स में प्रवेश गेट के जरिये होगा।

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