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    Court New: 1984 में 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोपी 90 वर्षीय बुजुर्ग को हाई कोर्ट से 2025 में मिली राहत

    Updated: Thu, 10 Jul 2025 06:00 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने 41 साल पुराने रिश्वत मामले में 90 वर्षीय व्यक्ति को राहत दी है। अदालत ने सजा को पहले ही बिताई गई अवधि तक सीमित कर दिया क्योंकि मुकदमे में अत्यधिक देरी हुई। सुरेंद्र कुमार पर 1984 में 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप था। अदालत ने त्वरित सुनवाई के अधिकार का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया।

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    41 साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में 90 वर्षीय बुजुर्ग को मिली राहत। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। 41 साल पुराने भ्रष्टाचार के एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक 90 वर्षीय व्यक्ति को यह कहते हुए राहत प्रदान की व्यक्ति केवल एक दिन हिरासत में रहा और मुकदमे व अपील के लंबित रहने के दौरान जमानत पर रहा। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने व्यक्ति द्वारा सजा को पहले ही बिताई गई अवधि तक कम कर दिया।

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    22 वर्षों से अधिक समय तक लंबित रही

    मामले में राहत देते हुए अदालत ने कहा कि चार जनवरी 1984 को मामला हुआ था और यह कार्यवाही चार दशकों से अधिक समय से चल रही है। इस मुकदमे को पूरा होने में ही लगभग 19 वर्ष लग गए और हाई कोर्ट में अपील 22 वर्षों से अधिक समय तक लंबित रही।

    अदालत ने उन्हें फिर जमानत दे दी

    याचिका के अनुसार भारतीय राज्य व्यापार निगम (एसटीसीआई) में मुख्य विपणन प्रबंधक के पद पर कार्यरत सुरेंद्र कुमार को 1984 में एक फर्म के साझेदार से 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

    सुरेंद्र कुमार को गिरफ्तारी के तुरंत बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया था, लेकिन 19 साल बाद 2002 में उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया गया। उक्त निर्णय को सुरेंद्र ने चुनौती दी और अपील अदालत ने उन्हें फिर जमानत दे दी।

    संवैधानिक आदेश के विपरीत

    अदालत ने कहा कि यह अपीलकर्ता की सजा की अवधि को कम करने के लिए उपयुक्त मामला है। पीठ ने कहा कि इस तरह की अत्यधिक देरी स्पष्ट रूप से भारत के संविधान के अनुच्छेद -21 के तहत त्वरित सुनवाई के संवैधानिक आदेश के विपरीत है।

    क्‍या-क्‍या लगे थे आरोप?

    प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि एसटीसी ने 140 टन सूखी मछली की आपूर्ति के लिए आपूर्तिकर्ताओं से कोटेशन आमंत्रित किए थे। जवाब में मुंबई की एक फर्म ने अपने साझेदार व शिकायतकर्ता अब्दुल करीम हामिद के माध्यम से अपना कोटेशन पेश किया।

    हामिद ने आरोप लगाया कि एक बैठक के दौरान सुरेंद्र कुमार ने 15 हजार रुपये की रिश्वत के बदले एसटीसी उनकी फर्म से 140 टन सूखी मछली का ऑर्डर देने का आश्वासन दिया था।

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