दिल्ली में तीन वायरस का कहर, अस्पतालों में मरीज बढ़ने से डॉक्टरों की बढ़ी चिंता; जानें बचाव के उपाय
दिल्ली में फ्लू के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। स्वाइन फ्लू (H1N1) के अलावा H3N2 और इन्फ्लूएंजा बी वायरस के संक्रमण के मामले भी सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सांस हृदय रोग सहित विभिन्न पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीजों बच्चों बजुर्गों व गर्भवती महिलाओं को फ्लू से गंभीर बीमारी होने का जोखिम अधिक होता है।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। बदलते मौसम में इन फ्लू का संक्रमण भी बढ़ गया है। इस वजह से फ्लू के संक्रमण से पीड़ित होकर अस्पतालों में अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि इन फ्लू के एक या दो वायरस का नहीं बल्कि तीन वायरस का संक्रमण फैला हुआ है।
यही वजह है कि स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के अलावा एच3एन2 और इन्फ्लूएंजा बी वायरस के संक्रमण के मामले देखे जा रहे हैं। एन3एन2 के संक्रमण से पीड़ित मरीज अधिक देखे जा रहे हैं। थोड़ी राहत की बात यह है कि यह स्वाइन फ्लू की तुलना में कम घातक होता है। स्वाइन फ्लू में गंभीर बीमारी होने का जोखिम अधिक होता है। इसलिए डाक्टर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
भीड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल
डॉक्टरों का कहना है कि सांस, हृदय रोग सहित विभिन्न पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीजों, बच्चों, बजुर्गों व गर्भवती महिलाओं को फ्लू से गंभीर बीमारी होने जोखिम अधिक होता है। इस वजह से इन लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है और भीड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं।
मरीजों को श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में संक्रमण
शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के पल्मोनरी मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ. विकास मौर्या ने बताया कि जनवरी के माह में भी फ्लू के मामले आ रहे थे लेकिन इसकी तुलना में अभी मरीज अधिक देखे जा रहे हैं। स्वाइन फ्लू की तुलना में एच3एन2 संक्रमण के मरीज अधिक देखे जा रहे हैं। एच3एन2 से ज्यादातर मरीजों को श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में संक्रमण होता है।
मरीजों के फेफड़े में भी निमोनिया जैसी परेशानी
इससे फेफड़े में संक्रमण होने का जोखिम कम होता है। लेकिन एन3एन2 के कुछ मरीजों के फेफड़े में भी निमोनिया जैसी परेशानी देखी जा रही है। स्वाइन फ्लू होने पर फेफड़े में संक्रमण होने का जोखिम अधिक होता है। इसलिए इन दिनों सर्दी, जुकाम, गले में खराश, दर्द व बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डाक्टर को दिखाकर दवा लेनी चाहिए।
बदलते मौसम में फ्लू का संक्रमण ज्यादा
आकाश सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के पल्मोनरी मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ. अक्षय बुधराजा ने बताया कि एन1एन1 और एन3एन2 के अलावा इन्फ्लूएंजा बी वायरस और आरएसवी (रेस्पिरेटरी सीनसीटियल वाइरस) का संक्रमण भी देखा जा रहा है। बदलते मौसम में फ्लू का संक्रमण ज्यादा फैलता है।यही वजह है कि बरसात के बाद अक्सर सितंबर व अक्टूबर में फ्लू का संक्रमण शुरू होता है और पूरे सर्दी के मौसम में इसके मरीज देखे जाते हैं।
इन सभी वायरस में मरीजों को एक जैसे लक्षण होते हैं और इलाज भी एक जैसा ही होता है। इलाज के लिए एंटी वायरल दवा उपलब्ध है। इसलिए घबराने की जरूरत है नहीं लेकिन सतर्कता जरूरी है। ज्यादातर मरीज पांच से सात दिन में ठीक हो जाते हैं। कुछ मरीजों को ठीक होने में दस से 15 दिन समय भी लग रहा है।
बचाव के उपाय
- सर्दी जुकाम व बुखार होने पर अलग कमरे में रहना चाहिए।
- बाजार या भीड़ में बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल करें।
- हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।
- खानपान में ठंडी चीजें खाने से परहेज करें।
- सर्दी जुकाम व बुखार के साथ यदि सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं।
- फ्लू का टीका उपलब्ध है। बचाव के लिए टीका ले सकते हैं।
- बचाव के लिए मास्क लगा सकते हैं। फ्लू का टीका भी उपलब्ध है। टीका लगाया जा सकता है।
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