Move to Jagran APP

Delhi: परियोजनाओं को पूरा करने में देरी पर पांच ठेकेदार छह माह के लिए प्रतिबंधित, जानिए पूरा मामला

Delhi News लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में अब परियोजनाओं के कार्य में लेटलतीफी नहीं चल सकेगी। विभाग में प्रमुख अभियंता के पद पर ज्वाइन करते ही ओपी त्रिपाठी ने इसके संकेत दे दिए हैं। उन्होंने परियोजनाओं को पूरा करने में देरी पर छह ठेकेदारों छह माह के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। विभाग में इसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

By Jagran NewsEdited By: GeetarjunMon, 28 Aug 2023 01:27 AM (IST)
दिल्ली की पीडब्ल्यूडी मंत्री आतिशी (फाइल फोटो)।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में अब परियोजनाओं के कार्य में लेटलतीफी नहीं चल सकेगी। विभाग में प्रमुख अभियंता के पद पर ज्वॉइन करते ही ओपी त्रिपाठी ने इसके संकेत दे दिए हैं। उन्होंने परियोजनाओं को पूरा करने में देरी पर छह ठेकेदारों छह माह के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।

विभाग में इसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। जिन ठेकेदारों पर कार्रवाई की गई है ये केंद्रीय लोक निर्माण विभाग से पंजीकृत ठेकेदार हैं। जिन ठेकेदारों पर कार्रवाई हुई हैं। उनमें चौहान एंड संस कंपनी को नौ माह के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। जबकि रोडटेक, यूनिक इंटरप्राइजेज, एएस इंफ्राटेक, अलियम कांस्ट्रक्शन और प्रताप सिंह एंड कंपनी को छह माह के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

इस अवधि के लिए ये ठेकेदार दिल्ली लोक निर्माण विभाग और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग में काम नहीं कर सकेंगे। इसमें से ठेकेदार प्रताप सिंह एंड कंपनी को उत्तरी पूर्वी दिल्ली में सड़कों की मरम्मत का काम सौंपा गया था।

मगर यह ठेकेदार काम पूरा करने में विफल रहा था। इसी तरह नोएडा से आ रहे उत्तर प्रदेश लिंक रोड पर एक सड़क के खराब हिस्से का काम पूरा नहीं करने पर ठेकेदार रोडटेक फर्म को टेंडर देने से छह महीने के लिए रोक दिया गया है।

एक अन्य ठेकेदार चौहान एंड संस को भी 2021 में रावतुला राम फ्लाईओवर की चारदीवारी के निर्माण सहित पांच ठेके दिए गए थे। मगर काम पूरा नहीं किया।यूनिक को घिटोरनी, ए एस इंफ्राटेक को नजफगढ़, अलियम को हरी नगर में सड़़कों से संबंधित काम दिया गया था।

अधिकारियों के अनुसार, इन ठेकेदारों को पहले कारण बताओ नोटिस दिया गया था, जिसके बाद विभाग की अधिकार प्राप्त समिति ने तथ्यों और रिकॉर्ड की जांच की और पाया कि चूंकि वे काम को निष्पादित करने में विफल रहे थे, इसलिए इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

सूत्रों का कहना है कि जिन ठेकेदारों पर कार्रवाई हुई है, उसमें कुछ के खिलाफ गलत कार्रवाई हुई है। ये सभी 2021-22 के मामले हैं और इन्हें 21 अक्टूबर 2022 में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग में भेजे गए थे, जिस पर केंद्रीय निर्माण विभाग ने पांच दिसंबर 2022 को पत्र भेज कर सुझाव दिया था। इसमें कहा गया था कि ये सभी मामले अलग अलग मामले भेजे जाएं।

भेजे गए कुछ मामले में सवाल भी उठाए गए थे।मगर उन पर संज्ञान नहीं लिया गया है और मनमाने तरीके से कार्रवाई की गई है।